लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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शुक्रवार, 1 मई 2009

56. आँखों में नमी तैरी है (क्षणिका)

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आँखों में नमी तैरी है *******   बदली घिर रही आसमान में, भादो तो आया नहीं धुंध पसर रही आँगन में, माघ तो आया नहीं मानो तपते जेठ की असह्य ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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