सोमवार, 2 दिसंबर 2019

640. कुछ सवाल

कुछ सवाल 

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1.   
कुछ सवाल ठहर जाते हैं मन में 
माकूल जवाब मालूम है 
मगर कहने की हिमाकत नहीं होती 
कुछ सवालों को 
सवाल ही रहने देना उचित है 
जवाब आँधियाँ बन सकती हैं। 

2. 
खुद से एक सवाल है - 
कौन हूँ मैं? 
क्या एक नाम? 
या कुछ और भी? 

3. 
सवालों का सिलसिला 
तमाम उम्र पीछा करता रहा 
इनमें उलझकर 
मन लहूलुहान हुआ 
पाँव भी छिले चलते-चलते 
आखिरी साँस ही आखिरी सवाल होंगे। 

4. 
कुछ सवाल समुद्र की लहरें हैं 
उठती गिरती 
अनवरत तेज कदमों से चलती हैं 
काले नाग-सी फुफकारती हैं 
दिल की धड़कनें बढ़ाती हैं 
मगर कभी रूकती नहीं 
बेहद डराती हैं। 

5. 
सवालों की उम्र 
कभी छोटी क्यों नहीं होती 
क्यों ज़िन्दगी के बराबर होती है 
जवाब न मिले तो चुपचाप मर क्यों नहीं जाते 
सवालों को भी ऐसी ही खत्म हो जाना चाहिए 
जैसे साँसे थम जाए तो उम्र खत्म होती है। 

- जेन्नी शबनम (2. 12. 2019)   

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शनिवार, 16 नवंबर 2019

639. धरोहर

धरोहर   

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मेरी धरोहरों में कई ऐसी चीज़ें हैं   
जो मुझे बयान करती हैं   
मेरी पहचान करती हैं   
कुछ पुस्तकें जिनमें लेखकों के हस्ताक्षर   
और मेरे लिए कुछ संदेश है   
कुछ यादगार कपड़े जिसे मैंने   
किसी ख़ास वक़्त पर लिए या पहने हैं   
कुछ छोटी-छोटी परची जिनपर   
मेरे बच्चों की आड़ी तिरछी लकीरों में   
मेरा बचपन छुपा हुआ है   
अनलिखे में गुज़रा कल लिखा हुआ है   
कुछ नाते जिसे किस्मत ने छीने   
उनकी यादों का दिल में ठिकाना है   
कुछ अपनों का छल भी है   
जिससे मेरा सीना छलनी है   
कुछ रिश्ते जो मेरे साथ तब भी होते हैं   
जब हार कर मेरा दम टूटने को होता है   
साँसों से हाथ छूटने को होता है   
कुछ वक़्त जब मैंने जीभर कर जिया है   
बहुत शिद्दत से प्रेम किया है   
यूँ तब भी अँधेरों का राज था   
पर ख़ुद पर यक़ीन किया था   
ये धरोहरें मेरे साथ विदा होंगी जब कजा आएगी   
मेरे बाद न इनका संरक्षक होगा   
न कोई इनका ख़्वाहिशमंद होगा   
मेरे सिवा किसी को इन से मुहब्बत नहीं होगी   
मेरी किसी धरोहर की वसीयत नहीं होगी   
मेरी धरोहरें मेरी हैं बस मेरी   
मेरे साथ ही विदा होंगी।   

- जेन्नी शबनम (16. 11. 2019)   

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गुरुवार, 7 नवंबर 2019

638. महज़ नाम

महज़ नाम 

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कभी लगता था कि किसी के आँचल में   
हर वेदना मिट जाती है   
मगर भाव बदल जाते हैं   
जब संवेदना मिट जाती है   
न किसी प्यार का ना अधिकार का नाम है   
माँ संबंध नहीं   
महज पुकार का एक नाम है   
तासीर खो चुका है   
बेकार का नाम है   
माँ संबंध नहीं   
महज पुकार का एक नाम है!   

- जेन्नी शबनम (7. 11. 2019)   

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बुधवार, 6 नवंबर 2019

637. रेगिस्तान

रेगिस्तान 

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आँखें अब रेगिस्तान बन गई हैं 
यहाँ अब न सपने उगते हैं न बारिश होती है 
धूलभरी आँधियाँ चल रही हैं 
रेत पे गढ़े वे सारे हर्फ मिट गए हैं 
जिन्हें सदियों पहले 
किसी ऋषि ने लिख दिया था कि 
कभी कोई दुष्यंत सब विस्मृत कर दे तो 
शंकुतला यहाँ आकर सारा अतीत याद दिलाए 
पर अब कोई स्रोत शेष न रहा 
जो जीवन को वापस बुलाए 
कौन किसे अब क्या याद दिलाए ! 

- जेन्नी शबनम (6. 11. 2019)
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रविवार, 27 अक्तूबर 2019

636. दिवाली (दिवाली पर 7 हाइकु)

दिवाली 
(दिवाली पर 7 हाइकु)   

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1.   
सुख समृद्धि   
हर घर पहुँचे   
दीये कहते।   

2.   
मन से देता   
सकारात्मक ऊर्जा   
माटी का दीया।   

3.   
दीयों की जोत   
दसों दिशा उर्जित   
मन हर्षित।   

4.   
अमा की रात   
जगमगाते दीप   
ज्यों हो पूर्णिमा !   

5.   
धरा ने ओढ़ा   
रोशनी का लिहाफ़   
जलते दीये।   

6.   
दिवाली दिन   
सजावट घर-घर   
फैला उजास।   

7.   
बंदनवार   
स्वागत व सत्कार   
लक्ष्मी प्रसन्न।   

- जेन्नी शबनम (26. 10. 2010)   

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गुरुवार, 24 अक्तूबर 2019

635. दंगा

दंगा...   

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किसी ने कहा ये हिन्दु मरा   
कोई कहे ये मुसलमान था   
अपने-अपने दड़बे में कैद   
बँटा सारा हिन्दुस्तान था !   

थरथराते जिस्मों के टुकड़े 
मगर जिह्वा पे रहीम-ओ-राम था   
कोई लाल लहू कोई हरा लहू   
रंगा सारा हिन्दुस्तान था !   

घूँघट और बुर्क़ा उघड़ा   
कटा जिस्म कहाँ बेजान था   
नौनिहालों के शव पर   
रोया सारा हिन्दुस्तान था !   

दसों दिशाओं में चीख़ पुकार   
ख़ौफ़ से काँपा आसमान था   
दहशत और अमानवीयता से   
डरा सारा हिन्दुस्तान था !   

मंदिर बने कि मस्ज़िद गिरे   
अवाम नहीं सत्ता का ये खेल था   
मंदिर-मस्जिद के झगड़े में   
मरा सारा हिन्दुस्तान था !   

- जेन्नी शबनम (24. 10. 2019)   
(भागलपुर दंगा के 30 साल होने पर)
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शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2019

634. चाँद (चाँद पर 10 हाइकु)

चाँद (चाँद पर 10 हाइकु)   

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1.   
बिछ जो गई   
रोशनी की चादर   
चाँद है खुश।   

2.   
सबका प्यारा   
कई रिश्तों में दिखा   
दुलारा चाँद।   

3.   
सह न सका   
सूरज की तपिश   
चाँद जा छुपा।   

4.   
धुँधला दिखा   
प्रदूषण से हारा   
पूर्णिमा चाँद।   

5.   
चंदा ओ चंदा   
घर का संदेशा ला   
याद सताती।   

6.   
रौशन जहाँ   
शबाब पर चाँद   
पूनम रात।   

7.   
चाँदनी गिरी   
अमृत है बरसा   
पूर्णिमा रात।   

8.   
पूनो की रात   
चंदा ने खूब किया   
अमृत वर्षा।   

9.   
मुख मलिन   
प्रकाश प्रदूषण   
तन्हा है चाँद।   

10.   
दिख न पाया   
बिजली भरमार   
चाँद का मुख।   

- जेन्नी शबनम (18. 10. 2019)   

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सोमवार, 14 अक्तूबर 2019

633. रिश्ते (रिश्ते पर 10 हाइकु)

रिश्ते
(रिश्ते पर 10 हाइकु) 

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1.   
कौन समझे   
मन की संवेदना   
रिश्ते जो टूटे।   

2.   
नहीं अपना   
कौन किससे कहे   
मन की व्यथा।   

3.   
दीमक लगी   
अंदर से खोखले   
सारे ही रिश्ते।   

4.   
कोई न सुने   
कारूणिक पुकार   
रिश्ते मृतक।   

5.   
मन है टूटा   
रिश्तों के दाँव-पेंच   
नहीं सुलझे।   

6.   
धोखे ही धोखे   
रिश्तों के बाज़ार में   
मुफ़्त में मिले।   

7.   
नसीब यही   
आसमान से गिरे   
धोखे थे रिश्ते।   

8.   
शिकस्त देते   
अपनों की खाल में   
फरेबी रिश्ते।   

9.   
जाल में फाँसे   
बहेलिए-से रिश्ते   
कत्ल ही करें।   

10.   
झूठ-फरेब   
कैसे करें विश्वास   
छलावा रिश्ते।   

- जेन्नी शबनम (1. 10. 2019)   

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गुरुवार, 10 अक्तूबर 2019

632. जीवन की गंध

जीवन की गंध   

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यहाँ भी कोई नहीं   
वहाँ भी कोई नहीं 
नितान्त अकेले तय करना है 
तमाम राहों को पार करना है, 
पाप और पुण्य, सुख और दुख 
मन की अवस्था, तन की व्यवस्था 
समझना ही होगा 
सँभालना ही होगा   
यह जीवन और जीवन की गंध। 

- जेन्नी शबनम (10. 10. 2019)   

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बुधवार, 9 अक्तूबर 2019

631. जादुई नगरी

जादुई नगरी   

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तुम प्रेम नगर के राजा हो   
मैं परी देश की हूँ रानी   
पँखों पर तुम्हें बिठा कर मैं   
ले जाऊँ सपनो की नगरी।   

मन चाहे तोड़ो जितना   
फूलों की है मीलों क्यारी   
कभी शेष नहीं होती है   
फूलों की यह फूलवारी।   

झुलाएँ तुम्हे अपना झूला   
लता पुष्पों से बने ये झूले   
बासंती बयार है इठलाती   
धरा गगन तक जाएँ झूले।   

कल-कल बहता मीठा झरना   
पाँव पखारे और भींगे तन मन   
मन की प्यास बुझाता है यह   
बिना उलाहना रहता है मगन।   

जादुई नगरी में फैली शाँति   
आओ यहीं बस जाएँ हम   
हर चाहत को पूरी कर लें   
जीवन को दें विश्राम हम।   

उत्सव की छटा है बिखरी   
रोम-रोम हुआ है सावन   
आओ मुट्ठी में भर लें हम   
मौसम-सा यह सुन्दर जीवन।   

- जेन्नी शबनम (9. 10. 2019)   

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