Sunday, September 17, 2017

559. कैसी ज़िन्दगी? (10 ताँका)

कैसी ज़िन्दगी?  
(10 ताँका)  

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1.  
हाल बेहाल  
मन में है मलाल  
कैसी ज़िन्दगी?  
जहाँ धूप न छाँव  
न तो अपना गाँव!  

2.  
ज़िन्दगी होती  
हरसिंगार फूल,  
रात खिलती  
सुबह झर जाती,  
ज़िन्दगी फूल होती!  

3.  
बोझिल मन  
भीड़ भरा जंगल  
ज़िन्दगी गुम,  
है छटपटाहट  
सर्वत्र कोलाहल!

4.  
दीवार गूँगी  
सारा भेद जानती,  
कैसे सुनाती?  
ज़िन्दगी है तमाशा  
दीवार जाने भाषा!

5.  
कैसी पहेली?  
ज़िन्दगी बीत रही  
बिना सहेली,  
कभी-कभी डरती  
ख़ामोशियाँ डरातीं !  

6.  
चलती रही  
उबड-खाबड़ में  
हठी ज़िन्दगी,  
ख़ुद में ही उलझी  
निराली ये ज़िन्दगी!  

7.  
फुफकारती  
नाग बन डराती  
बाधाएँ सभी,  
मगर रूकी नहीं,  
डरी नहीं, ज़िन्दगी!  

8.  
थम भी जाओ,  
ज़िन्दगी झुँझलाती  
और कितना?  
कोई मंज़िल नहीं  
फिर सफ़र कैसा?  

9.  
कैसा ये फ़र्ज़   
निभाती है ज़िन्दगी  
साँसों का क़र्ज़,  
गुस्साती है ज़िन्दगी  
जाने कैसा है मर्ज़!  

10.  
चीख़ती रही  
बिलबिलाती रही  
ज़िन्दगी ख़त्म,  
लहू बिखरा पड़ा  
बलि पे जश्न मना!  

- जेन्नी शबनम (17. 9. 2017)  

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Friday, September 8, 2017

558. हिसाब-किताब के रिश्ते

हिसाब-किताब के रिश्ते  

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दिल की बातों में ये हिसाब-किताब के रिश्ते  
परखते रहे कसौटी पर बेकाम के रिश्ते!

वक़्त के छलावे में जो ज़िन्दगी ने चाह की  
कतरा-कतरा बिखर गए मखमल-से ये रिश्ते!  

दर्द की दीवारों पे हसीन लम्हे टँके थे  
गुलाब संग काँटों के ये बेमेल-से रिश्ते!  

लड़खड़ा कर गिरते फिर थम-थम के उठते रहे  
जैसे समंदर की लहरें व साहिल के रिश्ते!  

नाम की ख्वाहिश ने जाने ये क्या कराया  
गुमनाम सही पर क्यों बदनाम हुए ये रिश्ते!  

चाँदी के तारों से सिले जज़्बात के रिश्ते  
सुबह की ओस व आसमां के आँसू के रिश्ते!  

किराए के मकां में रह के घर को हैं तरसे  
अपनों की आस में 'शब' ने ही निभाए रिश्ते!  


- जेन्नी शबनम (8. 9. 2017)  

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Friday, September 1, 2017

557. सूरज की पार्टी (11 बाल हाइकु)

सूरज की पार्टी  
(11 बाल हाइकु)  

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1.  
आम है आया  
सूरज की पार्टी में  
जश्न मनाया!  

2.  
फलों का राजा  
शान से मुस्कुराता  
रंग बिरंगा!  

3.  
चुभती गर्मी  
तरबूज़ का रस  
हरता गर्मी!  

4.  
खीरा-ककड़ी  
लत्तर पे लटके  
गर्मी के दोस्त!  

5.  
आम व लीची  
कौन हैं ज़्यादा मीठे  
करते रार!  

6.  
मुस्कुराता है  
कँटीला अनानास  
बहुत ख़ास!  

7.  
पानी से भरा  
कठोर नारियल  
बुझाता प्यास!  

8.  
पेड़ से गिरा  
जामुन तरो ताज़ा  
गर्मी का दोस्त!  

9.  
मानो हो गेंद  
पीला-सा ख़रबूज़  
लुढ़का जाता!  

10.  
धम्म से कूदा
अँखियाँ मटकाता  
आम का जोड़ा!  

11.  
आम की टोली  
झुरमुट में छुपी  
गप्पें हाँकती!

- जेन्नी शबनम (27. 8. 2017)  

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Sunday, August 27, 2017

556. बादल राजा (बरसात पर 10 हाइकु)

बादल राजा 
(बरसात पर 10 हाइकु)  

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1.  
ओ मेघ राजा  
अब तो बरस जा  
भगा दे गर्मी!  

2.  
बदली रानी  
झूम-झूम बरसी  
नाचती गाती!  

3.  
हे वर्षा रानी  
क्यों करे मनमानी  
बरसा पानी!  

4.  
नहीं बरसा  
दहाड़ता गरजा,  
बादल शेर!  

5.  
काला बदरा  
मारा-मारा फिरता  
ठौर न पाता!  

6.  
मेघ गरजा  
रवि भाग के छुपा  
डर जो गया!  

7.  
खिली धरती,  
रिमझिम बरसा  
बदरी काली!  

8.  
ली अँगड़ाई  
सावन घटा छाई  
धरा मुस्काई!  

9.  
बरसा नहीं  
मेघ को ग़ुस्सा आया,  
क्रूर प्रकृति!  

10.  
सुन्दर छवि  
आकाश पे उभरा  
मेघों ने रचा!  

- जेन्नी शबनम (27. 8. 2017)  

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Tuesday, August 15, 2017

555. कैसी आज़ादी पाई (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)

कैसी आज़ादी पाई  
(स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  

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1.  
मन है क़ैदी,  
कैसी आज़ादी पाई?  
नहीं है भायी!  

2.  
मन ग़ुलाम  
सर्वत्र कोहराम,  
देश आज़ाद!  

3.  
मरता बच्चा  
मज़दूर किसान,  
कैसी आज़ादी?  

4.  
हूक उठती,  
अपने ही देश में  
हम ग़ुलाम!  

- जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  

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Wednesday, August 9, 2017

554. सँवार लूँ...

सँवार लूँ...  

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मन चाहता है  
एक बोरी सपनों के बीज  
मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ  
मनचाहे सपने उगा  
ज़िन्दगी सँवार लूँ।  

- जेन्नी शबनम (9. 8. 2017) 

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Monday, August 7, 2017

553. रिश्तों की डोर (राखी पर 10 हाइकु)

रिश्तों की डोर  
(राखी पर 10 हाइकु)  

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1.  
हो गए दूर  
संबंध अनमोल  
बिके जो मोल!  

2.  
रक्षा का वादा  
याद दिलाए राखी  
बहन-भाई!  

3.  
नाता पक्का-सा  
भाई की कलाई में  
सूत कच्चा-सा!  

4.  
पवित्र धागा  
सिखाता है मर्यादा  
जोड़ता नाता!  

5.  
अपनापन  
अब भी है दिखता  
राखी का दिन!  

6.  
रिश्तों की डोर  
खोलती दरवाज़ा  
नेह का नाता!  

7.  
भाई-बहन  
भरोसे का बंधन  
अभिनंदन!  

8.  
खूब खिलती  
चमचमाती राखी  
रक्षाबंधन!  

9.  
त्योहार आया  
भईया परदेशी  
बहना रोती!  

10.  
रक्षक भाई  
बहना है पराई  
राखी बुलाई!  

- जेन्नी शबनम (7. 8. 2017)

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Monday, July 17, 2017

552. मुल्कों की रीत है...

मुल्कों की रीत है...  

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कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है
नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है!

मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है
गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  

ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  
दहशत की ये धुन बजाते, दानव का यह संगीत है!  

संग लड़े जंगे-आज़ादी, भाई-चारा याद नहीं  
एक-दूसरे को मार-मिटाना, बची इतनी प्रीत है!  

हर इंसान में दौड़ता लाल लहू, कैसे करें फर्क  
यहाँ अपना पराया कोई नहीं, 'शब' का सब मीत है!  

-जेन्नी शबनम (17. 7. 2017)  

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Friday, July 7, 2017

551. उदासी...

उदासी...  

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ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते  
ज़बरन साँसों की आवाजाही  
काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!  

- जेन्नी शबनम (7. 7. 2017)  

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Saturday, July 1, 2017

550. ज़िद (क्षणिका)

ज़िद...  

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एक मासूम सी ज़िद है -  
सूरज तुम छुप जाओ  
चाँद तुम जागते रहना  
मेरे सपनों को आज  
ज़मीं पर है उतरना!  

- जेन्नी शबनम (1. 7. 2017)

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