लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

183. देव

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देव *** देव! देव! देव! तुम कहाँ हो, क्यों चले गए? एक क्षण को न ठिठके तुम्हारे पाँव अबोध शिशु पर क्या ममत्व न उमड़ा क्या इतनी भी सुध ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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