लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
नवधा-198
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शनिवार, 1 मई 2021
719. कोरोना (5 कविता)
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कोरोना *** 1. ओ कोरोना (कोरोना- नवधा-198) *** ओ कोरोना! है कैसा व्यापारी तू लाशों का करता व्यापार तू और कितना रुलाएगा कब तक ...
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रविवार, 18 अप्रैल 2021
717. प्रेम में होना
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प्रेम में होना *** प्रेम की पराकाष्ठा कहाँ तक बदन के घेरों में या मन के फेरों में? सुध-बुध बिसरा देना प्रेम है या स्वयं का बो...
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