लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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शनिवार, 1 मई 2021

719. कोरोना (5 कविता)

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कोरोना  ***  1.  ओ कोरोना (कोरोना- नवधा-198)  *** ओ कोरोना!    है कैसा व्यापारी तू    लाशों का करता व्यापार तू    और कितना रुलाएगा    कब तक ...
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रविवार, 18 अप्रैल 2021

717. प्रेम में होना

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प्रेम में होना    ***    प्रेम की पराकाष्ठा कहाँ तक    बदन के घेरों में या मन के फेरों में?    सुध-बुध बिसरा देना प्रेम है    या स्वयं का बो...
11 टिप्‍पणियां:
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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