लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

421. ज़िन्दगी (21 हाइकु) पुस्तक 44-46

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ज़िन्दगी ******* 1. लम्हों की लड़ी एक-एक यूँ जुड़ी ज़िन्दगी ढली। 2. गुज़र गई जैसे साज़िश कोई तमाम उम्र। 3. ताकती रही जी...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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