लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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सोमवार, 31 जनवरी 2011

211. तय था (पुस्तक- 28)

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तय था *** तय था प्रेम का बिरवा लगाएँगे फूल खिलेंगे और सुगंध से भर देंगे एक दूजे का दामन हम । तय तो था अंजुरी में भर, खुशिया लुटाए...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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