लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
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सोमवार, 31 जनवरी 2011
211. तय था (पुस्तक- 28)
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तय था *** तय था प्रेम का बिरवा लगाएँगे फूल खिलेंगे और सुगंध से भर देंगे एक दूजे का दामन हम । तय तो था अंजुरी में भर, खुशिया लुटाए...
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