लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
सन्नाटे के ख़त-138
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
सन्नाटे के ख़त-138
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, 31 दिसंबर 2020
704. मुट्ठी से फिसल गया
›
मुट्ठी से फिसल गया *** निःसन्देह बीता कल नहीं लौटेगा जो बिछड़ गया अब नहीं मिलेगा फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस शायद मिल जाए वापस जो ...
12 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें