लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

704. मुट्ठी से फिसल गया

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मुट्ठी से फिसल गया  *** निःसन्देह बीता कल नहीं लौटेगा    जो बिछड़ गया अब नहीं मिलेगा    फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस    शायद मिल जाए वापस    जो ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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