लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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गुरुवार, 19 मार्च 2009

38. हम अब भी जीते हैं (तुकान्त)

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हम अब भी जीते हैं ******* इश्क़ की हद, पूछते हैं आप बारहा हमसे क्या पता, हम तो हर सरहदों के पार जीते हैं ।     इश्क़ की रस्म से अनजान,...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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