लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

597. बातें (क्षणिका)

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बातें  *******    रात के अँधेरे में  ढेरों बातें करती हूँ  जानती हूँ मेरे साथ  तुम कहीं नहीं थे, तुम कभी नहीं थे  पर सोचती रहती ह...
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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

596. दुःख (दुःख पर 10 हाइकु)

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दुःख (10 हाइकु)    *** 1.    दुःख का पारा  सातवें आसमाँ पे    मन झुलसा ।      2.    दुःख का लड्डु    रोज़-रोज़ यूँ खाना...
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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

595. अर्थ ढूँढ़ता (10 हाइकु) पुस्तक -99, 100

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अर्थ ढूँढ़ता  *******    1.    मन सोचता-    जीवन होता है क्या?    अर्थ ढूँढता।    2.    बसंत आया    रिश्तों में रंग ...
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गुरुवार, 22 नवंबर 2018

594. रूठना (क्षणिका)

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रूठना    *******    जब भी रूठी    खो देने के भय से ख़ुद ही मान गई    रूठने की आदत तो बिदाई के वक्त    खोंइचा से निकाल नइहर छोड...
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शनिवार, 17 नवंबर 2018

593. लौट जाऊँगी

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लौट जाऊँगी   *******    कब कहाँ खो आई ख़ुद को    कब से तलाश रही हूँ ख़ुद को    बात-बात पर कभी रूठती थी    अब रूठूँ तो मनाएगा...
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बुधवार, 7 नवंबर 2018

592. रंगीली दिवाली (दिवाली पर 10 हाइकु) पुस्तक 98,99

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रंगीली दिवाली ******* 1. छबीला दीया ये रंगीली दीवाली बिखेरे छटा।  2. साँझ के दीप अँधेरे से लड़ते वीर सिपाही। 3....
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बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

591. चाँद की पूरनमासी

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चाँद की पूरनमासी ***  चाँद तेरे रूप में अब किसको निहारूँ?    वह जो बचपन में दूर का खिलौना था    या सफ़ेद बालों वाली बुढ़िया  जो चरखे से रूई ...
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रविवार, 14 अक्टूबर 2018

590. वर्षा (5 ताँका)

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वर्षा     ***    1.    वर्षा की बूँदें    उछलती-गिरती    ठौर न पातीं     मौसम बरसाती    माटी को तलाशती।    2.    ...
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सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

589. अनुभूतियाँ (क्षणिका)

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अनुभूतियाँ    *******    कुछ अनुभूतियाँ, आकाश के माथे का चुम्बन है    कुछ अनुभूतियाँ, सूरज की ऊर्जा का आलिंगन है    हर चाहना हर ...
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मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

588. नमन बापू (चोका - 9)

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नमन बापू     ***    जन्म तुम्हारा    सौभाग्य है हमारा    तुमने दिया    जग को नया ज्ञान    हारे-पिछड़े    थे वक़्त के जो मार...
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शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

587. मीठी-सी बोली (हिन्दी दिवस पर 10 हाइकु)

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मीठी-सी बोली  ***    1.    मीठी-सी   बोली    मातृभाषा हमारी    ज्यों   मिश्री   घुली ।      2.    हिन्दी   है   रोती ...
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सोमवार, 10 सितंबर 2018

586. चाँद रोज़ जलता है (तुकांत)

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चाँद रोज़ जलता है    *******    तूने ज़ख़्म दिया तूने कूरेदा है    अब मत कहना क़हर कैसा दिखता है।    राख में चिंगारी तूने ही द...
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शनिवार, 1 सितंबर 2018

585. फ़ॉर्मूला (पुस्तक 65)

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फ़ॉर्मूला    *******    मत पूछो ऐसे सवाल    जिसके जवाब से तुम अपरिचित हो    तुम स्त्री-से नहीं हो    समझ न सकोगे  स्त्री के ज...
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मंगलवार, 28 अगस्त 2018

584. कम्फर्ट ज़ोन

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कम्फर्ट ज़ोन     ***    कम्फ़र्ट ज़ोन के अन्दर     तमाम सुविधाओं के बीच    तमाम विडम्बनाओं के बीच    सुख का मुखौटा ओढ़े    शनैः-शनैः बीत जाता ह...
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शनिवार, 18 अगस्त 2018

583. खिड़की स्तब्ध है

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खिड़की स्तब्ध है *******    खिड़की,   महज़   एक   खिड़की   नहीं    वह एक एहसास है, संभावना है    भीतर   और   बाहर   के   बीच  ...
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बुधवार, 15 अगस्त 2018

582. सिंहनाद करो

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सिंहनाद करो     ***    व्यर्थ लगता है    शब्दों में समेटकर  हिम्मत में लपेटकर  अपनी संवेदनाओं को  अभिव्यक्त करना।    हम जिसे अपनी आज़ादी कहत...
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रविवार, 5 अगस्त 2018

581. अनछुई-सी नज़्म (क्षणिका)

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अनछुई-सी नज़्म    *******    कुछ कहो कि सन्नाटा भाग जाए    चुप्पियों को लाज आ जाए    अँधेरों की तक़दीर में भर दो रोशनाई से रंग...
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शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

580. प्रकृति (प्रकृति पर 12 सेदोका)

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प्रकृति     ***   1.    अपनी व्यथा    गुमसुम प्रकृति    किससे वो कहती    बेपरवाह    कौन समझे दर्द    सब स्वयं में व्...
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रविवार, 22 जुलाई 2018

579. तपता ये जीवन (10 ताँका)

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तपता ये जीवन  ***    1.    अँजुरी भर    सुख की छाँव मिली    वह भी छूटी    बच गया है अब    तपता ये जीवन।    2.    कि...
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बुधवार, 18 जुलाई 2018

578. उनकी निशानी (पुस्तक - 49)

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उनकी निशानी   *******   आज भी रखी हैं, बहुत सहेजकर   अतीत की कुछ यादें   कुछ निशानियाँ   कुछ सामान   टेबल, कुर्सी, पलंग, ब...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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