लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 27 जून 2026

807. बनूँ गुलमोहर (8 सेदोका)

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बनूँ गुलमोहर  *** 1. ज़िन्दगी हँसी लिपटके रंगों से खिले फूल हसीन, मन चाहता ओढ़कर रंगीनी बनूँ गुलमोहर। 2. पसरा हुआ उदासी का मंज़र  रेगिस्तानी ...
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बुधवार, 17 जून 2026

806. क्षणभंगुर जीवन

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क्षणभंगुर जीवन  *** कितने बहाने कितने दलील सब फ़िज़ूल ठगाया जीवन।  सोचा समझा सब बिखरा आघात मिला व्यर्थ जीवन।  उपाय नहीं समझौता सही नासमझ नही...
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गुरुवार, 11 जून 2026

805. वृद्ध का दुःख (10 हाइकु)

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वृद्ध का दुःख  *** 1. वृद्ध की आस कोई तो हो पास बाँटें वे दुःख। 2. वृद्ध का दुःख मन में समाहित सोचके हित। 3. वृद्ध का कोना रिश्तों की राह ता...
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शुक्रवार, 5 जून 2026

804. नौतपा दैत्य (10 ताँका)

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नौतपा दैत्य *** 1. नौतपा दैत्य किसी को न छोड़ेगा बचके रहो घर में छुप जाओ पानी पी के भगाओ। 2. होगा बचना सूरज बना आग सब हैं डरे कैसे करें उपाय...
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मंगलवार, 2 जून 2026

803. यात्री सूरज (चोका- 20)

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यात्री   सूरज *** यात्री सूरज  करके रोज़ यात्रा  थकता होगा  चलना   ही   है   धर्म   कोई   हो   ऋतु कहीं   न   पहुँचता, उसके   पाँव ज़ख़्मी   ...
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मंगलवार, 26 मई 2026

802. प्रचण्ड गर्मी (10 हाइकु)

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प्रचण्ड गर्मी *** 1. प्रचण्ड गर्मी धरा उबल रही सूर्य अलाव। 2. तपती धरा हाहाकार है मचा सूर्य अंगारा। 3. लू के थपेड़े सूर्य आग उगले  सब झुलसे। ...
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शुक्रवार, 1 मई 2026

801. लाले-लाल

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लाले-लाल *** लग रही है बेलगाम बोली  राजपथ असहाय है आज़ादी पूर्व का एहसास हो रहा राजपथ बेचैन है चंद सरमायेदारों की क्रूरता से घिरा  राजपथ ज़ख...
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गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

800. युद्ध जारी है

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युद्ध जारी है  *** युद्ध जारी है विश्व संकट में है मिसाइल्स की आतिशबाज़ी गूँज रही है ध्वस्त हो रही हैं विशाल इमारतें नष्ट हो रहे हैं देश की ...
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रविवार, 8 मार्च 2026

799. स्त्रियाँ (10 हाइकु)

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स्त्रियाँ ***  1. स्त्रियों के हिस्से परख-आकलन यही चलन। 2. स्त्रियाँ हैं फूल दामन में हैं काँटें दुःख क्या बाँटे। 3. स्त्रियाँ-अंगार आजीवन च...
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बुधवार, 4 मार्च 2026

798. होली-त्योहार

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होली-त्योहार *** 1. रंगों के संग फागुन की बयार होली तैयार। 2. फूलों की क्यारी प्रकृति पिचकारी रंग खेलती। 3. सूखे गुलाल लज़ीज़ पकवान होली त्य...
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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

797. सफ़र का क़िस्सा

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सफ़र का क़िस्सा  *** मेरे सफ़र की हर शय ग़ुलाम है     मन के कफ़स में  हर लम्हा क़ैद है  तन की ज़रूरत कब बढ़ी-घटी मन से मन की बात कब कही यक़ीन की ...
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शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

796. पाँव तैयार नहीं

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पाँव तैयार नहीं *** राह सामने है, चलने को पाँव तैयार नहीं खड़े रहने, अड़े रहने को पाँव मददगार नहीं  पाँव ज़ख़्मी हो गए, अब वे ठहरे रहेंगे न ज़...
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रविवार, 16 नवंबर 2025

795. जश्न जारी है

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जश्न जारी है *** तिनके के लिए भी राह न बची उम्मीद के दरवाज़े बंद हो गए  खिड़की ने अपने पल्ले ठेलकर निश्चित किया कि प्रवेश निषिद्ध  रहे। दरवाज़...
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सोमवार, 21 जुलाई 2025

794. ज़िन्दगी की लकीर

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ज़िन्दगी की लकीर *** हथेली में सिर्फ़ सुख की लकीरें थीं कब किसने दुःख की लकीरें उकेर दीं जो ज़िन्दगी की लकीर से भी लम्बी हो गई, अब उम्मीद की...
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रविवार, 25 मई 2025

793. किरदार

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किरदार *** थक गई हूँ अपने किरदार से इस किरदार को बदलना होगा ढेरों शिकायत है वक़्त से कुछ तो उपाय करना होगा वक़्त न लौटता है, न थमता है मुझे ख़...
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मंगलवार, 6 मई 2025

792. सफ़र जारी है

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सफ़र जारी है *** बहुत कुछ छूट गया बहुत कुछ छोड़ दिया ज़िन्दगी न ठहरी, न थमी चलती रही, फिरती रही  न कोई राह दिखाने वाला  न कोई साथ निभाने वाल...
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गुरुवार, 20 मार्च 2025

791. गौरैया (9 हाइकु)

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गौरैया (हाइकु) 1. नन्ही-सी जान फुदक फुदकके नाच दिखाती। 2. प्यारी गौरैया बचपन की सखा मुझे भूली वो। 3. छोटी गौरैया चीं-चीं-चीं चहकके हमें लुभा...
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गुरुवार, 13 मार्च 2025

790. होली (होली पर 20 हाइकु)

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होली (होली पर 20 हाइकु) 1. भाँग पीकर पुआ-पूड़ी खाकर होली अघाई। 2. होली भौजाई लगाकर गुलाल ख़ूब लजाई। 3. धर्म व जाति भेद नहीं करती भोली है होल...
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शनिवार, 8 मार्च 2025

789. एक सवाल

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एक सवाल  *** भार्या होने का दण्ड  बार-बार भोगती रही अपमान का घूँट पीती रही और तुम सभी नज़रें झुकाए  कायर बने बैठे तमाशा देखते रहे तुम सभी के ...
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सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

788. प्रवासी पूत (20 हाइकु)

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प्रवासी पूत   ***  1. नीड़ की यादें  मन हुआ बेकल प्रवासी पूत।  2. देश को लौटा रोज़ी-रोटी की खोज प्रवासी बेटा।  3.   दुःख में बेटा विदेश की धर...
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मंगलवार, 7 जनवरी 2025

787. तुम्हें जीत जाना है

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तुम्हें जीत जाना है *** जीवन की हर रस्म निभाने का समय आ गया है उस चक्रव्यूह में समाने का समय आ गया है जिसमें जाने के रास्तों का पता नहीं न ब...
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बुधवार, 1 जनवरी 2025

786. नव वर्ष (20 हाइकु)

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नव वर्ष  *** 1. मन में आस- नव वर्ष की भोर हो पुनर्जन्म। 2. लेकर आशा नव वर्ष है आया शुभ सन्देश। 3. उँगली थामे नव वर्ष की भोर घूमने चली। 4. चह...
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गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

785. सपने जो मेरे हैं (5 माहिया)

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सपने जो मेरे हैं  *** 1.  सपने मेरे  *** सपने जो मेरे हैं  ख़्वाबों में पलते  होते ना पूरे हैं।   2.  अपने जब रूठे  *** सब अपने जब रूठे  जितन...
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मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

784. सूरज किसका चाँद किसका

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सूरज किसका चाँद किसका  *** हम चाँद हैं तुम्हारे   तुम सूरज हो हमारे  हम भी तनहा, तुम भी तनहा  संसार में हम दोनों तनहा  पर साथ-साथ हम चलते है...
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गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

783. पैरहन (5 क्षणिका)

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पैरहन ***  1. लकीर *** हथेली में सिर्फ़ सुख की लकीरें थीं कब किसने दुःख की लकीरें उकेर दीं जो ज़िन्दगी की लकीर से भी लम्बी हो गई अब उम्मीद क...
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बुधवार, 20 नवंबर 2024

782. ज़िन्दगी

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ज़िन्दगी 1.  ज़िन्दगी चली बिना सोचे-समझे किधर मुड़े? कौन बताए दिशा मंज़िल मिले जहाँ।  2.  मालूम नहीं  मिलती क्यों ज़िन्दगी बेइख़्तियार, डोर जिसने...
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शनिवार, 16 नवंबर 2024

781. आग मुझे खल रही है

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आग मुझे खल रही है  *** एक आग में तमाम उम्र  जलती, तपती, झुलसती रही आह निकले, पर सब्र किया ज़ख़्म दुःखे, पर हँस दिया आसमाँ से वर्षा की गुहार लग...
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शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

780. कुछ ताँका (28 ताँका)

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बच्चे  1. बच्चों के बिना  फीका है पकवान  सूना घर-संसार, लौटते ही बच्चों के  होता पर्व-त्योहार।     2.  तोतली बोली माँ-बाबा को पुकारे वो नौनि...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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