लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

सोमवार, 5 जून 2023

759. पर्यावरण (10 हाइकु)

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पर्यावरण 1. भटक रहे  जंगल-मरुस्थल  जीव व जन्तु।     2. जंगल   मिटा बना   है   मरुस्थल   आँखें   हैं   नम। 3. कब   उजड़े   काँप   रहे   जंगल ...
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गुरुवार, 9 मार्च 2023

758. होली (9 हाइकु)

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होली (9 हाइकु) *** 1. वासन्ती पर्व    बन्धनों से हों मुक्त    देती है सीख।  2. मन झूमता    रंग की है बौछार    मिलते यार।  3. हँसी-मज़ाक    ये...
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सोमवार, 30 जनवरी 2023

757. मम्मी (मम्मी की दूसरी पुण्यतिथि)

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मम्मी  *** जीवन का दस्तूर सबको निभाना होता है मरने तक जीना होता है। तुम जीवन जीती रही संघर्षों से विचलित होती रही बच्चों के भविष्य के सपने त...
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सोमवार, 23 जनवरी 2023

756. पुल

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पुल  *** पुल तो ध्वस्त हो गया    जिससे दोनों पाटों को जोड़कर    पार कर जाते थे अथाह खाई।      हाँ, एक पतली सी डोरी छोड़ दी थी    शायद किसी म...
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मंगलवार, 3 जनवरी 2023

755. नार्सिसिस्ट

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नार्सिसिस्ट   ***       उसका प्यार, उसकी नफ़रत    उसका आरोप, उसका प्रत्यारोप    उसकी प्रताड़ना, शिकायत    उसकी दया, क्षमा    उसका परिहास, उप...
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बुधवार, 16 नवंबर 2022

754. मेरा पर्स : मेरी ज़िन्दगी

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मेरा पर्स : मेरी ज़िन्दगी   *** मेरा पर्स मानो भानुमति का पिटारा है उसमें मेरी ज़रूरत की सभी चीज़ें हैं।    अनुकूल-प्रतिकूल स्थितियों में सब क...
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

753. ज़िन्दगी नहीं है (तुकान्त)

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ज़िन्दगी नहीं है  *******  बहुत कुछ था जो अब नहीं है    कुछ है पर ज़िन्दगी नहीं है।     कश्मकश में उलझकर क्या कहें    जो कुछ भी था अब नहीं है।...
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शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2022

752. सपने हों पूरे / गर तू आ जाता (6 माहिया)

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सपने हों पूरे *** 1. मन में जो आस खिली  जीवन में मेरे  अब जाकर प्रीत मिली।    2. थी अभिलाषा ये मन में  सपने हों पूरे  सारे इस जीवन में।   - ...
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रविवार, 2 अक्टूबर 2022

751. चौथा बन्दर

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चौथा बन्दर ***  बापू के तीनों बन्दर    सालों-साल मुझमें जीते रहे    मेरे आँसू तो नहीं माँगे, मेरा लहू पीते रहे    फिर भी मैंने उनका अनुकरण औ...
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शनिवार, 24 सितंबर 2022

750. मृत्यु सत्य है (मृत्यु पर 50 हाइकु)

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मृत्यु सत्य है (मृत्यु पर 50 हाइकु) ***  1.  मृत्यु सत्य है    बेख़बर नहीं हैं      दिल रोता है।    2.  शाश्वत आत्मा    अपनों का बिछोह    रोत...
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बुधवार, 14 सितंबर 2022

749. हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)

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हमारी मातृभाषा (6 हाइकु) *** 1.  बिलख रही     मातृभाषा बेचारी    पा अपमान।   2.  हमारी भाषा    बनी जो राजभाषा    है मातृभाषा।   3.  अपनी भाष...
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रविवार, 11 सितंबर 2022

748. हे गंगा माई (5 ताँका) (बज्जिका भाषा)

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हे गंगा माई  *** 1.  हे गंगा माई    केहू न है हमर    कौना से कहू    सुख-दुःख अपन    कैसे कटे उमर।    2.  हे गंगा माई    मन बड़ा बिकल    देख क...
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सोमवार, 15 अगस्त 2022

747. आज़ादी का अमृत महोत्सव

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आज़ादी का अमृत महोत्सव  ***  नहीं चलना ऐसे    जब किसी की परछाईं पीछा करे    नहीं देखना उसे    जो तुम्हारी नज़रों की तलाश को ख़ुद तक रोके    नह...
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गुरुवार, 4 अगस्त 2022

746. चिन्तन (12 क्षणिका)

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चिन्तन  *** 1.  चिन्तन  *** समय, सच और स्वप्न आपस में सब गड्डमड्ड हो रहे हैं भूल रही हूँ, समय के किस पहर में हूँ कब यथार्थ, कब स्वप्न में हू...
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गुरुवार, 28 जुलाई 2022

745. अब्र (6 क्षणिका)

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अब्र  (6 क्षणिका) *******  1. अब्र    ज़माने के हलाहल पीकर    जलती-पिघलती मेरी आँखों से    अब्र की नज़रें आ मिली    न कुछ कहा, न कुछ पूछा    ...
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सोमवार, 4 जुलाई 2022

744. भोर (40 हाइकु)

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भोर  *** 1. भोर होते ही हड़बड़ाके जागी, धूप आलसी। 2. आँखें मींचता भोरे-भोरे सूरज जगाने आया। 3. घूमता रहा सूरज निशाचर भोर में लौटा। 4. हाल पू...
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शनिवार, 18 जून 2022

743. साढ़े-सात सदी

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साढ़े-सात सदी  ***  बाबा जी ने चिन्तित होकर कहा    शनि की दूसरी साढ़ेसाती चल रही है    फलाँ ग्रह, इस घर से उस घर को देख रहा है    फलाँ घर मे...
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गुरुवार, 5 मई 2022

742. मन (मन पर 20 हाइकु)

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मन   (मन पर 20 हाइकु )  *** 1.  जीवन-मृत्यु    निरन्तर का खेल    मन हो, न हो।    2.  डटके खड़ा    गुलमोहर मन    कोई मौसम।    3.  काटता मन   ...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2022

741. दुलारी होली (होली पर 15 हाइकु)

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दुलारी होली ***  1.  दे गया दग़ा     रंगों का ये मौसम,    मन है कोरा।    2.  छूके गुज़रा    कर अठखेलियाँ    मौसमी-रंग।    3.  होली आई    मन न...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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