लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
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गुरुवार, 24 मई 2012
346. कभी न मानूँ (पुस्तक - 48)
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कभी न मानूँ ******* जी चाहता है, विद्रोह कर दूँ अबकी जो रूठूँ, कभी न मानूँ मनाता तो यूँ भी नहीं कोई फिर भी बार-बार रूठती हू...
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