रविवार, 25 अप्रैल 2010

138. 'शब' नहीं होगी (क्षणिका) / 'shab' nahin hogi (kshanika)

'शब' नहीं होगी 

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एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात भी होगी
पर वो रात नहीं होगी
एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात तो होगी
पर रात की वो नमी नहीं होगी
एक दिन ऐसा होगा, ख़ाली-ख़ाली-सी ज़िन्दगी होगी
पर कोई कमी नहीं होगी
एक दिन ऐसा होगा, दुनिया वैसी ही होगी
पर ये नज़्म नहीं होगी
एक दिन ऐसा होगा, खुशनुमा सुबह तो होगी
पर ये 'शब' नहीं होगी

- जेन्नी शबनम (24. 4. 2010)
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'shab' nahin hogi

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ek din aisa hoga, roz raat bhi hogi
par wo raat nahin hogi
ek din aisa hoga, roz raat to hogi
par raat ki wo nami nahin hogi
ek din aisa hoga, khaali-khaali-si zindagi hogi
par koi kami nahin hogi
ek din aisa hoga, duniya waisi hi hogi
par ye nazm nahin hogi
ek din aisa hoga, khushnuma subah to hogi
par ye 'shab' nahin hogi.

- Jenny Shabnam (24. 4. 2010)
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9 टिप्‍पणियां:

  1. "ख़ाली ख़ाली सी ज़िन्दगी होगी
    पर कोई कमी नहीं होगी,
    एक दिन ऐसा होगा
    दुनिया वैसी हीं होगी
    पर ये नज़्म नहीं होगी,
    एक दिन ऐसा होगा
    खुशनुमा सुबह तो होगी
    पर ये ''शब'' नहीं होगी !

    sunder abhivyakti ..badhai "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  2. सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  3. ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

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  4. par ye din aisa hai, jab ham sab bhi hain........aur ye "shab" bhi hai.......aur ham sab ko ye "shab" ki kavita ka besabri se intzaar bhi hai.........:)

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  5. पर रात की वो नमी नहीं होगी,
    एक दिन ऐसा होगा ... kya likhti hain jenny ji, bahut hi gahri, spasht khyaalon se bharee rachna

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  6. वाह !! लाजवाब रचना ......

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  7. बहुत अच्छी रचना है जो जीवन के उत्थान पतन की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है ।
    आज कर ले बात
    भौरे से कली
    क्या पता मधुमास
    कल आए न आए ।

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