सोमवार, 17 मई 2010

143. अलविदा कहते हैं वो (तुकांत) / alvida kahte hain wo (tukaant)

अलविदा कहते हैं वो

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ज़मीन-ए-दिल में बसा, हमको रखते हैं वो
कभी पूछी  ख़ैरियत, कभी बस चल देते हैं वो

रूठे को मनाना, है अजब शौक उनको
हर बात पर ख़फ़ा, हमको करते हैं वो 

राहों ने टोका, पर भूल जाते हैं रास्ता
हमसे हमारा पता, हर रोज़ पूछते हैं वो 

आईना भी थक गया, याद करके उन्हें
पल-पल रूप कितने, जाने बदलते हैं वो 

हम कभी भी न मिले, ये मंज़ूर है उन्हें
ग़र मिले तो तमाम उम्र, माँगते हैं वो

उनका अंदाज़-ए-मोहब्बत, तो ज़रा देखिए
न हो तकरार हमसे, बेचैन रहते हैं वो

मुद्दतों इश्क़ का पैग़ाम, हमको भेजते रहे
इत्तिफ़ाकन जो मिल गए, बड़ा शर्माते हैं वो

साथ जीने की कसमें, हमको देते हैं रोज़
इश्क़ में मर जाने की कसम, खाते हैं वो 

उनकी आँखों में दिखती है, मेरी आशिकी
हुआ जो सामना, हमसे ही नज़रें चुराते हैं वो 

ताउम्र साथ चलेंगे, वो रोज़ कहते हैं 'शब'
जब भी मिले, हमको अलविदा कहते हैं वो 

- जेन्नी शबनम (16. 5. 2010)
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alvida kahte hain wo

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zameen-e-dil mein basa, humko rakhte hain wo
kabhi puchhi khairiyat, kabhi bas chal dete hain wo.

ruthe ko manaana, hai ajab shauk unko
har baat par khafa, humko karte hain wo.

raahon ne toka, par bhul jaate hain raasta
hamse hamara pata, har roz puchhte hain wo.

aaiina bhi thak gaya, yaad karke unhein
pal-pal roop kitne, jaane badalte hain wo.

hum kabhi bhi na mile, ye manzoor hai unhein
gar mile to tamaam umrr, maangte hain wo.

unka andaaz-e-mohabbat, to zara dekhiye
na ho takraar humse, bechain rahte hain wo.

muddaton ishq ka paighaam, humko bhejte rahe
ittifaakan jo mil gaye, bada sharmaate hain wo.

saath jine ki kasmein, humako dete hain roz
ishq mein mar jaane ki kasam, khaate hain wo.

unki aankhon men dikhti hai, meri aashiqi
hua jo saamna, humse hi nazarein churaate hain wo.

taaumrr saath chalenge, wo roz kahte hain 'shab'
jab bhi mile, hamako alavida kahte hain wo.

- Jenny Shabnam (16. 5. 2010)
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7 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi achhi rachna.......kuch aur likhne ki sthiti me nahi, bahut thakaan hai...

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  2. रूठे को मनाना, है अज़ब शौक उनको
    हर बात पर ख़फा, हमको करते हैं वो !
    Sach,yah rachna nihayat umda hai...mere alfaaz ghise pite lag rahe hain..par inheen ki mohtaji hai..

    जवाब देंहटाएं
  3. ज़मीन-ए-दिल में बसा, हमको रखते हैं वो
    कभी पूछी खैरियत, कभी बस चल देते हैं वो !

    maun ..jyadatar rahate ho vo

    रूठे को मनाना, है अज़ब शौक उनको
    हर बात पर ख़फा, हमको करते हैं वो !

    ati sanvedanshil hain unka man

    राहों ने टोका, पर भूल जाते हैं रास्ता
    हमसे हमारा पता, हर रोज़ पूछते हैं वो !

    lagataar sampark me rahane ke liye aatur hain unka man

    आईना भी थक गया, याद करके उन्हें
    पल पल रूप कितने, जाने बदलते हैं वो !

    prem ke anek rup

    हम कभी भी न मिले, ये मंज़ूर है उन्हें
    ग़र मिले तो तमाम उम्र, मांगते हैं वो !

    jidd hain hameshaa pas raho isliye kabhi
    milate nahi hain vo

    उनका अंदाज़-ए-मोहब्बत, तो ज़रा देखिये
    न हो तकरार हमसे, बेचैन रहते हैं वो !

    kabhi man se dukhi n ho .tum ..chahte hain vo

    मुद्दतों इश्क का पैगाम, हमको भेजते रहे
    इत्तेफ़ाकन जो मिल गये, बड़ा शर्माते हैं वो !

    sankoch hain pata nahi prem ka javab kya mile

    साथ जीने की कसमें, हमको देते हैं रोज़
    इश्क में मर जाने की कसम, खाते हैं वो !

    prem ki prakashthaa ..

    उनकी आँखों में दिखती है, मेरी आशिकी
    हुआ जो सामना, हमसे हीं नज़रें चुराते हैं वो !

    svabhaavik hain ...har koi apane prem ke bhav ko chhipana chahtaa hain


    ताउम्र साथ चलेंगे, वो रोज़ कहते हैं ''शब''
    जब भी मिले, हमको अलविदा कहते हैं वो !

    har premi apani premika se yahi kahata hain

    sanyog to khsanik hain hain
    viyog ..shaashvat hain



    1-jitana samajh me aayaa likh gayaa

    2- lekin ....jenny ji ....aapane vahi likhaa hain .........
    jo sach hain

    bahut bahut sarvottam rachana

    merii drishtii me

    thankx

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  4. Jenny jee aapke itni khubsurat rachna ke liye saadhuwaad!!

    aur saath me kishor jee ko bhi badhai.......itna anupam comment dene ke liye.......:)

    Jenny jee mere blog pe ek naya post hai, plz dekhen!!

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  5. बेनामीमई 21, 2010 8:35 pm

    "रूठे को मनाना, है अज़ब शौक उनको
    हर बात पर ख़फा, हमको करते हैं वो !
    ...
    उनका अंदाज़-ए-मोहब्बत, तो ज़रा देखिये
    न हो तकरार हमसे, बेचैन रहते हैं वो !"
    जी बहुत खूब - अंदाज अपना अपना

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  6. बेनामीमई 22, 2010 8:05 am

    aapki rachna bahut hi khubsurat ban padi hai...
    badhai....
    yun hi likhti rahein...
    aur haan meri nayi kavita ko bhi aapki pratikriya ka intzaar hai,,...
    dhanyawaad....

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