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शनिवार, 10 अक्टूबर 2020
688. साथी (चार लाइन की भावाभिव्यक्तियाँ) (12 क्षणिका)
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साथी ******* 1. साथी *** मेरे साथी! तुम तब थे कहाँ ज़ख़्मों से जब हम थे घायल हुए इक तीर था निशाने पे लगा तन-मन मेरा जब ज़ख़्मी हु...
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