क्षणभंगुर जीवन
कितने बहाने
कितने दलील
सब फ़िज़ूल
ठगाया जीवन।
सोचा समझा
सब बिखरा
आघात मिला
व्यर्थ जीवन।
उपाय नहीं
समझौता सही
नासमझ नहीं
यही जीवन।
सोच बदलो
जीवन समझो
अमर नहीं
क्षणभंगुर जीवन।
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
क्षणभंगुर जीवन
वृद्ध का दुःख
नौतपा दैत्य
यात्री सूरज
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यात्री सूरज
करके रोज़ यात्रा
थकता होगा
चलना ही है धर्म
कोई हो ऋतु
कहीं न पहुँचता,
उसके पाँव
ज़ख़्मी तो होते होंगे
कौन लगाये
मरहम व पट्टी
दर्द छुपाके
जीवन का सन्देश
रोज़ ही देता
पर कौन सुनता
जल-जल के
उजाला पसारता,
बिन बैटरी
रोबोट बना सूर्य
रात व दिन
चकरघिन्नी बन
मन न चाहे
चलता ही रहता,
हे यायावर!
एक दिन तो करो
ज़रा विश्राम
तुमसे ही तो जग
सोता-जागता
एक दिन लो तुम
सोने का मज़ा
फिर चल पड़ना
बिन ठहरे
हँसते व जलते,
घुमंतू सूर्य!
बात सुन रहा न
आ साथ बैठ
ज़रा तो गप्पे लड़ा
चाय भी पी ले
फिर तू निकलना
अपनी यात्रा पर।
-जेन्नी शबनम (18.10.2022)
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युद्ध जारी है
स्त्रियाँ
जश्न जारी है
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ज़िन्दगी की लकीर
किरदार
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सफ़र जारी है
होली
(होली पर 20 हाइकु)
तुम्हें जीत जाना है
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सपने जो मेरे हैं
सूरज किसका चाँद किसका
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इस पार या उस पार
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शब्दों का कब तक दूँ हिसाब
सवालों से घिरी मैं
अब नहीं चाहती जवाब
सिर पर लिए हुए सारे सवालों का उ
चुपचाप गुम हो जाना चाहती हूँ
संसार के इस पार या उस पार।
3.
रिश्ते बेजान हुए
कोई चाह अब शेष नहीं
टूटी-फूटी धड़कनें बेहाल हुईं
खण्ड-खण्ड में टूटा दिल, साँसें बेजार हुईं
सपनों के भँवर-जाल की सन्नाटों से बात हुईं
सब छूटा, सब बिखरा, जीने की ख़त्म राह हुई।
ज़िन्दगी
आग मुझे खल रही है
बच्चे
ज़िन्दगी बौनी
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