लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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मंगलवार, 2 जून 2026

803. यात्री सूरज (चोका- 20)

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यात्री   सूरज *** यात्री सूरज  करके रोज़ यात्रा  थकता होगा  चलना   ही   है   धर्म   कोई   हो   ऋतु कहीं   न   पहुँचता, उसके   पाँव ज़ख़्मी   ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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