लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
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गुरुवार, 18 मार्च 2021
713. अनाथ
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अनाथ *** काश! हवा या धुआँ बनकर आसमान में जाती चाँद की चाँदनी में उन तारों को ढूँढती जो बचपन में मेरे पापा बन गए और अब माँ भी उ...
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