लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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गुरुवार, 1 जून 2017

547. मर गई गुड़िया

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मर गई गुड़िया   *******   गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया   ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया   ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िय...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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