लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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शनिवार, 20 सितंबर 2014

469. सागर तीरे (30 हाइकु)

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सागर तीरे  *** 1.  दम तोड़ती  भटकती लहरें  सागर तीरे।  2.  सफ़ेद रथ  बढ़ता बिना पथ  रेत में गुम।  3.  उमंग-भरी  लहरें मचल...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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