लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

688. साथी (चार लाइन की भावाभिव्यक्तियाँ) (12 क्षणिका)

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साथी  *******  1.  साथी  *** मेरे साथी! तुम तब थे कहाँ    ज़ख़्मों से जब हम थे घायल हुए    इक तीर था निशाने पे लगा    तन-मन मेरा जब ज़ख़्मी हु...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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