लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

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गुरुवार, 28 जुलाई 2022

745. अब्र (6 क्षणिका)

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अब्र  (6 क्षणिका) *******  1. अब्र    ज़माने के हलाहल पीकर    जलती-पिघलती मेरी आँखों से    अब्र की नज़रें आ मिली    न कुछ कहा, न कुछ पूछा    ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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