लम्हों का सफ़र
मन की अभिव्यक्ति का सफ़र
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गुरुवार, 28 जुलाई 2022
745. अब्र (6 क्षणिका)
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अब्र (6 क्षणिका) ******* 1. अब्र ज़माने के हलाहल पीकर जलती-पिघलती मेरी आँखों से अब्र की नज़रें आ मिली न कुछ कहा, न कुछ पूछा ...
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