लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 23 जनवरी 2010

120. एक भ्रम चाहिए / ek bhram chaahiye

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एक भ्रम चाहिए *** मैं अभागन जान न सकी तुमको तुमने ही कब सुध ली हमारी नहीं सोचा कैसे रह रही होऊँगी  छोड़ दिया इस असार संसार में स्वय...
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बुधवार, 20 जनवरी 2010

119. क़र्ज़ चुकता कर लेने दे (तुकांत) / karz chukta kar lene de (tukaant)

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क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ******* जाने फिर वक़्त इतनी मोहलत दे कि न दे होश में हूँ अभी सब क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ।   इल्म ही कहाँ कि ...
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मंगलवार, 19 जनवरी 2010

118. ओशो / Osho

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ओशो ******* ओ ओशो! न तुम मेरे गुरु, न तुम मेरे ख़ुदा हो तुम मेरे सखा, जैसे कोई मेरा अपना ।     तुम कहते हो - पहले ख़ुद को पहचानो, ...
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सोमवार, 18 जनवरी 2010

117. ताजमहल वीराना भी देखना (तुकांत) / tajmahal veeraana bhi dekhna (tukaant)

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ताजमहल वीराना भी देखना ******* फ़ुर्सत में इक रोज़ कभी ये ज़माना भी देखना इक शाहजहाँ का ताजमहल वीराना भी देखना ।   न कहना यूँ चुपके से...
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रविवार, 17 जनवरी 2010

116. मेरा मन / mera mann

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मेरा मन ******* हर राह पर बैठा एक साया जाने किसको ढूँढ़ता है मन रोशनी मिली ही कब थी कभी क्यों अँधियारों से डरता है मन ।     अंतहीन...
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गुरुवार, 14 जनवरी 2010

115. दिल में चाँद इक उतरता है कोई (तुकांत) / dil mein chaand ik utarta hai koi (tukaant)

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दिल में चाँद इक उतरता है कोई ******* हर्फ़-हर्फ़ ज़िन्दगी लिखता है कोई ख़्वाब हसीन रोज़ बुनता है कोई ।   उसकी ज़िन्दगी में शामिल नहीं ...
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सोमवार, 11 जनवरी 2010

114. मेरी उपलब्धि / meri uplabdhi

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मेरी उपलब्धि ******* सब कहते मेरी उपलब्धियों की फ़ेहरिस्त बड़ी लम्बी है ।   अक्सर सोचती हूँ क्या होती है उपलब्धि? क्या है मेरी उपल...
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रविवार, 10 जनवरी 2010

113. याद तुम्हें ज़रा नहीं (तुकांत) / yaad tumhein zaraa nahin (tukaant)

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याद तुम्हें ज़रा नहीं ******* एक शाम हो सिर्फ़ मेरी, चाह है कोई ख़ता नहीं इश्क़ की कहानी तुमने कही, याद तुम्हें ज़रा नहीं ।     अमावास...
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112. सूरज को पा लूँ / sooraj ko paa loon

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सूरज को पा लूँ ******* चाँद को पाने की ख़्वाहिश तो फिर भी है मुमकिन, सूरज को चाहे कि पा लूँ तो अंजाम जाने क्या हो ।     दूर जो है स...
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

111. ख़ुशबयानी कहो (अनुबन्ध/तुकान्त) / khushbayaani kaho (Anubandh/Tukaant)

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ख़ुशबयानी कहो *** ख़ुशनुमा यादें आज कोई पुरानी कहो क्षितिज में हो उत्सव बात रूहानी कहो ।     सतरंगी किरणों-सी हो सबकी सुबह दुनिया न...
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मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

110. तड़पाते क्यों हो (अनुबन्ध/तुकान्त) / Tadpaate kyon ho (Anubandh/Tukaant)

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तड़पाते क्यों हो *** बेइन्तिहा इश्क़ मुझसे जतलाते क्यों हो मेरी आशिक़ी ग़ैरों को बतलाते क्यों हो? अनसुलझे सवालों से घिरी है ज़िन्दगी औ...
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सोमवार, 21 दिसंबर 2009

109. क्यों मैं ही थी हारी / kyon main hi thee haari

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क्यों मैं ही थी हारी ******* सताता है वो पल, जब साँसे महक उठी थी कभी हौसला तो टूट चूका, जाने अब हो किसकी बारी,   सिसक-सिसककर सपने रोत...
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शनिवार, 19 दिसंबर 2009

108. दुआ मेरी अता कर / dua meri ataa kar

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दुआ मेरी अता कर ******* अक्सर सोचती रही हूँ अपनी मात पर क्यों हर दोस्त मुझको दग़ा दे जाता है, इतनी ज़ालिम क्यों हो गई है ये दुनिया क्...
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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

107. क्यों दिख रही ज़िन्दगी / kyon dikh rahi zindagi

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क्यों दिख रही ज़िन्दगी ******* मेरे सफ़र की दास्तान न पूछ, ऐ हमदर्द कम्बख्त! हर बार ज़िन्दगी छूट जाती है, पुरज़ोर जब भी पकड़ती हूँ, प...
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बुधवार, 9 दिसंबर 2009

106. मेरा वक़्त : तुम्हारा वक़्त / mera waqt : tumhaara waqt

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मेरा वक़्त : तुम्हारा वक़्त ******* वक़्त की कमी जीना भूला देती है वक़्त की कमी जीना सीखा देती है ।     देखो न, पल भर में सब कुछ बदल ...
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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

105. मेरा अल्लाह मेरा राम (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mera Allah Mera Ram (Anubandh/Tukaant)

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मेरा अल्लाह मेरा राम *** आँतें सिकुड़ी भूख से, मासूम जानो की बढ़ती क़तार तुम कहते हो, हम हैं लाचार, देता अल्लाह देता राम । दुनिया एक छ...
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मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

104. राह मुकम्मल करनी है (अनुबन्ध/तुकान्त) / Raah mukammal karni hai (Anubandh/Tukaant)

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राह मुकम्मल करनी है *** साथी छूटे कि राहें भूलें, ये ज़िन्दगी तो चलनी है मन हारे कि तन हारे, हर राह मुकम्मल करनी है ।   आँखों के साग...
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सोमवार, 30 नवंबर 2009

103. रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल / rumaani waadiyon mein safed baadal

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रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल ******* मन की कलियाँ कुछ कच्ची हुई सपनों की गलियाँ कुछ लम्बी हुई, एक फ़रिश्ता मुझे बादल तक लाया पुष्पक...
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बुधवार, 25 नवंबर 2009

102. मुझे जीना नहीं आता (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mujhe jeena nahin aata (Anubandh/Tukaant)

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मुझे जीना नहीं आता ***       मुझे जीना नहीं आता, मुझे रहना नहीं आता     दुनिया के रिवाजों पे मुझे चलना नहीं आता ।   ज़माने के दुःखों ...
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सोमवार, 23 नवंबर 2009

101. वदीयत दर्द का / vadeeyat dard ka

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वदीयत दर्द का ******* रूह लिपटी रही जिस्म से ऐसे दो अजनबी मिल रहे हों जैसे, पता पूछा मेरे ज़ीस्त से उसने और जुदा हो गया सजदा करके ।  ...
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शनिवार, 21 नवंबर 2009

100. मैं / main (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 111)

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मैं ******* मैं, मैं, सिर्फ़ मैं, सर्वत्र मैं...! एक रूह मैं, एक इंसान मैं, एक हैवान मैं, एक ख्व़ाब मैं, एक जज़्बात मैं, एक ख़्वाबगाह...
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गुरुवार, 19 नवंबर 2009

99. वक़्त को इतनी बेसब्री क्यों / waqt ko itni besabri kyon

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वक़्त को इतनी बेसब्री क्यों ******* कुछ लम्हे चुराकर दे दो न ठहर ज़रा हम भी जी लें न, जब देखो छीन जाता हमसे वक़्त की इतनी सख़्ती क्यो...
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रविवार, 15 नवंबर 2009

98. वह अमरूद का पेड़ / Wah Amruud ka Ped (पुस्तक - लम्हों का सफ़र पेज - 35)

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वह अमरूद का पेड़ *** घर के सामने अमरूद का पेड़ आज भी वहीं पर स्थित है बिछुड़े हुए अपनों की आस लगाए घर को सूनी आँखों से निहारता वक़्त के ...
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गुरुवार, 12 नवंबर 2009

97. इन्सानियत मरती है (अनुबन्ध/तुकान्त) / Insaaniyat martee hai (Anubandh/Tukaant) (पुस्तक- नवधा)

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इन्सानियत मरती है ******* गुनहगारों को आजकल राहत मिलती है बेगुनाही सज़ा और ज़िल्लत से घिरती है ।   किसी की मासूमियत का कैसे हो फ़ैसला  ...
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बुधवार, 11 नवंबर 2009

96. नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं (अनुबन्ध/तुकान्त) / Naam tumhara kabhi liya nahin (Anubandh/Tukaant) (पुस्तक- नवधा)

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नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं *** उँगली के पोरों से मन में, नाम कभी लिखा नहीं शून्य में न जा ठहरे, नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं ।   आस्था ...
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95. वर्जित फल / varjit phal (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 110)

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वर्जित फल ******* ख़ुदा का वर्जित फल इश्क़ था जो कभी दो प्राणी ने, उत्सुकता में खाया था, वो अनजानी गलती उनकी, इश्क़ की बुनियाद थी जिसस...
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रविवार, 8 नवंबर 2009

94. तुम कहाँ गए (तुकांत) / tum kahaan gaye (tukaant)

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तुम कहाँ गए ******* एक साँझ घिर आयी है मन पर मेरी सुबह लेकर तुम कहाँ गए? एक फूल खिला एक दीप जला सब बुझाकर तुम कहाँ गए? बीता रात क...
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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

93. नज़्म तुम्हारी बनते हैं / nazm tumhaari bante hain

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नज़्म तुम्हारी बनते हैं ******* चलो ऐसा कुछ करते हैं एक दर्द अपना रोज़ कहते हैं तुम सुनते जाना मेरा अफ़साना एक नज़्म तुम्हारी हम रोज़...
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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2009

92. ये बस मेरा मन है / ye bas mera mann hai (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 46)

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ये बस मेरा मन है ******* ज़िन्दगी के अर्थ मिलते नहीं खो से गए हैं जैसे सब कहीं ब्रह्माण्ड की असीम शून्यता में, अधर में लटके हैं शब्द...
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91. पैग़ाम चाँद को सुना जाना (तुकांत) / paighaam chaand ko suna jaanaa (tukaant)

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पैग़ाम चाँद को सुना जाना ******* चाँद खिले तो छत पर आ जाना, महूरत हमें भी बता जाना पैग़ाम हम चाँद से पूछेंगे, अपना पैग़ाम चाँद को सुना जा...
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रविवार, 25 अक्टूबर 2009

90. भागलपुर दंगा (24-26.10.1989) / Bhagalpur danga (24-26.10.1989)

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(1989 में बिहार में साम्प्रदायिक दंगा हुआ ।  भागलपुर शहर में कई दिनों तक क़त्ले-आम जारी रहा, कई मोहल्ले उजड़ गए, कई गाँवों के नामोनिशान मिट ग...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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