लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

रविवार, 2 मई 2010

139. थोड़ा आराम चाहिए (क्षणिका) / thoda aaraam chaahiye (kshanika)

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थोड़ा आराम चाहिए ******* मेरे अल्फ़ाज़ को, मेरे जज़्बात को समझो तुम भी और ज़माना भी फ़क़त एहसास चाहिए, थोड़े लम्हात चाहिए क्या-क्या न ...
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रविवार, 25 अप्रैल 2010

138. 'शब' नहीं होगी (क्षणिका) / 'shab' nahin hogi (kshanika)

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'शब' नहीं होगी  ******* एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात भी होगी पर वो रात नहीं होगी एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात तो होगी पर रात की वो...
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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

137. ज़मींदोज़ हो गये कुछ अनकहे जज़्बात / zameendoz ho gaye kuchh ankahe jazbaat

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ज़मींदोज़ हो गए कुछ अनकहे जज़्बात ******* तुमने तो कह दिया, उस दिन मिले जब चोरी से, पहले दिन न आना लेकर आँसू, मेरे पास और न लाना, को...
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सोमवार, 19 अप्रैल 2010

136. ज़बह (मनोज-बबली हत्याकांड) / Zabah (Manoj-Babli hatyaakand)

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['मनोज-बबली हत्याकांड' में करनाल अदालत द्वारा (31.3.2010) ऐतिहासिक फ़ैसला (33 महीना, 41 गवाह, 76 पेशी के बाद) 5 अपराधी को सज़ा-ए-मौत...
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मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

135. होश न लेना (क्षणिका) / hosh na lena (kshanika)

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होश न लेना  ******* हर हँसी में एक व्यथा हर व्यथा की अपनी कथा अनगिनत राज़ दफ़न सीने में असंख्य वेदनाएँ ज़ब्त मन में डरती हूँ होश खो...
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सोमवार, 12 अप्रैल 2010

134. बेअसर (क्षणिका) / beasar (kshanika)

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बेअसर  ******* न पथराया मन, न बेजान हुआ तन न हो सकी अब तक मैं बेअसर  होता है मुझमें अब भी असर मेरे जीवित होने का प्रमाण है गोया जीवन जी...
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शनिवार, 10 अप्रैल 2010

133. मैं नज़्म बनती रही (तुकांत) / main nazm banti rahi (tukaant)

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मैं नज़्म बनती रही ******* ज़िन्दगी ढलती रही, मैं नज़्म बनती रही उनकी ख़्वाहिश पर, मैं ग़ज़ल बनती रही ।   रोज़ नयी सूरत कहाँ से लाऊँ...
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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

132. अब इन्तिज़ार नहीं / ab intizaar nahin

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'अब इन्तिज़ार है' ( कविता नं.- 131) की दूसरी कड़ी... अब इन्तिज़ार नहीं *** ज्यों मौसम ने करवट बदली लौट आए सब पखेरू प्रवासी दे...
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बुधवार, 31 मार्च 2010

131. अब इन्तिज़ार है / ab intizaar hai

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अब इन्तिज़ार है *** क्यों है ये संवादहीनता या है संवेदनहीनता पर जज़्बात तो अब भी वही जाने क्यों मुखरित होते नहीं ।   बेवक़्त खिंचा आ...
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सोमवार, 29 मार्च 2010

130. निशानी / nishaani (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 45)

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निशानी ******* वक़्त के सीने पर हम अपनी कहानी लिख जाएँगे किसी की यादों में हम अपनी निशानी छोड़ जाएँगे याद करोगे तो होठों की ख़ामोश...
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शुक्रवार, 26 मार्च 2010

129. हमसाया मिल गया (तुकांत) / humsaaya mil gaya (tukaant)

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हमसाया मिल गया ******* ख़्यालों में एक अजनबी, ले मेरा दिल गया सूरत तो न दिखी मगर, हमसाया मिल गया ।   उसकी तलब में अजब-सी मनहूसी छा ग...
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रविवार, 21 मार्च 2010

128. सपना मँगाती है (तुकांत) / sapna mangaati hai (tukaant)

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सपना मँगाती है ******* कुछ यादें सिमटी मुस्काती हैं कुछ बातें अनकही शर्माती हैं । ओ मीत पूछना कली से तुम क्यों ख़ुशबू पर यूँ इतराती ...
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127. धूप के बूटे / dhoop ke boote

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धूप के बूटे *** सफ़ेद चादर पर सुनहरे धूप के कुछ बूटे टँके थे जाने कौन-सी पीड़ा थी क्यों धूप के बूटे ठिठके थे? नहीं मालूम ये परी-दे...
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सोमवार, 8 मार्च 2010

126. नाइंसाफी क्यों / naainsaafi kyon

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नाइंसाफी क्यों ******* ख़ुदा से रूबरू पूछा मैंने - मर्द और औरत का ईजाद किया तुमने ख़ुद पत्थर में बसते हो क्या पत्थर की कठोरता नहीं ज...
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शुक्रवार, 5 मार्च 2010

125. क्या तुम दे सकोगे जवाब / kya tum de sakoge jawaab

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क्या तुम दे सकोगे जवाब ******* किससे माँगूँ मेरे रिसते आँसुओं का हिसाब मेरी काली रातों और धुँधले दिन का हिसाब कौन देगा मेरी अकथ्य अंत...
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मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

124. दिन को सुला दिया (क्षणिका) / din ko sula diya (kshanika)

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दिन को सुला दिया ******* रात बोली- दिन बीत रहा, क्यों मुझको जगा दिया? सकुचाया सा दिन बोला- मुझको नींद ने बुला लिया, उनींदी रात फिर बैठी ...
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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

123. लोग इश्क करते नहीं हैं (तुकांत) / Log ishq karte nahin hain (tukaant)

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लोग इश्क करते नहीं हैं ******* अँधियारे से कैसे लड़ें, चिराग जलते नहीं हैं होती जहाँ रोशनी, वो दरवाज़े खुलते नहीं हैं ।     अपनी बदह...
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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

122. सच हो सकता नहीं (तुकांत) / sach ho sakta nahin (tukaant)

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सच हो सकता नहीं ******* सत्य जो कभी सच हो सकता नहीं काफ़िला ख़्वाबों का, पर रुकता नहीं ।     ज़िन्दगी चाहती है एक हसीन लम्हा क्यों ...
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मंगलवार, 26 जनवरी 2010

121. इमरोज़ से (तुकांत) / Imroz se (tukaant)

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इमरोज़ से ******* इमरोज़ से अक्सर, मैं अपने जवाब पूछती रही हूँ शायद उनके तजुर्बों में, ज़िन्दगी तलाशती रही हूँ ।     इश्क़ क्या और ज़...
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शनिवार, 23 जनवरी 2010

120. एक भ्रम चाहिए / ek bhram chaahiye

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एक भ्रम चाहिए *** मैं अभागन जान न सकी तुमको तुमने ही कब सुध ली हमारी नहीं सोचा कैसे रह रही होऊँगी  छोड़ दिया इस असार संसार में स्वय...
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बुधवार, 20 जनवरी 2010

119. क़र्ज़ चुकता कर लेने दे (तुकांत) / karz chukta kar lene de (tukaant)

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क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ******* जाने फिर वक़्त इतनी मोहलत दे कि न दे होश में हूँ अभी सब क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ।   इल्म ही कहाँ कि ...
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मंगलवार, 19 जनवरी 2010

118. ओशो / Osho

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ओशो ******* ओ ओशो! न तुम मेरे गुरु, न तुम मेरे ख़ुदा हो तुम मेरे सखा, जैसे कोई मेरा अपना ।     तुम कहते हो - पहले ख़ुद को पहचानो, ...
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सोमवार, 18 जनवरी 2010

117. ताजमहल वीराना भी देखना (तुकांत) / tajmahal veeraana bhi dekhna (tukaant)

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ताजमहल वीराना भी देखना ******* फ़ुर्सत में इक रोज़ कभी ये ज़माना भी देखना इक शाहजहाँ का ताजमहल वीराना भी देखना ।   न कहना यूँ चुपके से...
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रविवार, 17 जनवरी 2010

116. मेरा मन / mera mann

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मेरा मन ******* हर राह पर बैठा एक साया जाने किसको ढूँढ़ता है मन रोशनी मिली ही कब थी कभी क्यों अँधियारों से डरता है मन ।     अंतहीन...
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गुरुवार, 14 जनवरी 2010

115. दिल में चाँद इक उतरता है कोई (तुकांत) / dil mein chaand ik utarta hai koi (tukaant)

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दिल में चाँद इक उतरता है कोई ******* हर्फ़-हर्फ़ ज़िन्दगी लिखता है कोई ख़्वाब हसीन रोज़ बुनता है कोई ।   उसकी ज़िन्दगी में शामिल नहीं ...
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सोमवार, 11 जनवरी 2010

114. मेरी उपलब्धि / meri uplabdhi

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मेरी उपलब्धि ******* सब कहते मेरी उपलब्धियों की फ़ेहरिस्त बड़ी लम्बी है ।   अक्सर सोचती हूँ क्या होती है उपलब्धि? क्या है मेरी उपल...
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रविवार, 10 जनवरी 2010

113. याद तुम्हें ज़रा नहीं (तुकांत) / yaad tumhein zaraa nahin (tukaant)

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याद तुम्हें ज़रा नहीं ******* एक शाम हो सिर्फ़ मेरी, चाह है कोई ख़ता नहीं इश्क़ की कहानी तुमने कही, याद तुम्हें ज़रा नहीं ।     अमावास...
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112. सूरज को पा लूँ / sooraj ko paa loon

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सूरज को पा लूँ ******* चाँद को पाने की ख़्वाहिश तो फिर भी है मुमकिन, सूरज को चाहे कि पा लूँ तो अंजाम जाने क्या हो ।     दूर जो है स...
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

111. ख़ुशबयानी कहो (अनुबन्ध/तुकान्त) / khushbayaani kaho (Anubandh/Tukaant)

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ख़ुशबयानी कहो *** ख़ुशनुमा यादें आज कोई पुरानी कहो क्षितिज में हो उत्सव बात रूहानी कहो ।     सतरंगी किरणों-सी हो सबकी सुबह दुनिया न...
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मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

110. तड़पाते क्यों हो (अनुबन्ध/तुकान्त) / Tadpaate kyon ho (Anubandh/Tukaant)

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तड़पाते क्यों हो *** बेइन्तिहा इश्क़ मुझसे जतलाते क्यों हो मेरी आशिक़ी ग़ैरों को बतलाते क्यों हो? अनसुलझे सवालों से घिरी है ज़िन्दगी औ...
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सोमवार, 21 दिसंबर 2009

109. क्यों मैं ही थी हारी / kyon main hi thee haari

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क्यों मैं ही थी हारी ******* सताता है वो पल, जब साँसे महक उठी थी कभी हौसला तो टूट चूका, जाने अब हो किसकी बारी,   सिसक-सिसककर सपने रोत...
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शनिवार, 19 दिसंबर 2009

108. दुआ मेरी अता कर / dua meri ataa kar

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दुआ मेरी अता कर ******* अक्सर सोचती रही हूँ अपनी मात पर क्यों हर दोस्त मुझको दग़ा दे जाता है, इतनी ज़ालिम क्यों हो गई है ये दुनिया क्...
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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

107. क्यों दिख रही ज़िन्दगी / kyon dikh rahi zindagi

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क्यों दिख रही ज़िन्दगी ******* मेरे सफ़र की दास्तान न पूछ, ऐ हमदर्द कम्बख्त! हर बार ज़िन्दगी छूट जाती है, पुरज़ोर जब भी पकड़ती हूँ, प...
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बुधवार, 9 दिसंबर 2009

106. मेरा वक़्त : तुम्हारा वक़्त / mera waqt : tumhaara waqt

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मेरा वक़्त : तुम्हारा वक़्त ******* वक़्त की कमी जीना भूला देती है वक़्त की कमी जीना सीखा देती है ।     देखो न, पल भर में सब कुछ बदल ...
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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

105. मेरा अल्लाह मेरा राम (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mera Allah Mera Ram (Anubandh/Tukaant)

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मेरा अल्लाह मेरा राम *** आँतें सिकुड़ी भूख से, मासूम जानो की बढ़ती क़तार तुम कहते हो, हम हैं लाचार, देता अल्लाह देता राम । दुनिया एक छ...
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मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

104. राह मुकम्मल करनी है (अनुबन्ध/तुकान्त) / Raah mukammal karni hai (Anubandh/Tukaant)

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राह मुकम्मल करनी है *** साथी छूटे कि राहें भूलें, ये ज़िन्दगी तो चलनी है मन हारे कि तन हारे, हर राह मुकम्मल करनी है ।   आँखों के साग...
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सोमवार, 30 नवंबर 2009

103. रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल / rumaani waadiyon mein safed baadal

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रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल ******* मन की कलियाँ कुछ कच्ची हुई सपनों की गलियाँ कुछ लम्बी हुई, एक फ़रिश्ता मुझे बादल तक लाया पुष्पक...
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बुधवार, 25 नवंबर 2009

102. मुझे जीना नहीं आता (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mujhe jeena nahin aata (Anubandh/Tukaant)

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मुझे जीना नहीं आता ***       मुझे जीना नहीं आता, मुझे रहना नहीं आता     दुनिया के रिवाजों पे मुझे चलना नहीं आता ।   ज़माने के दुःखों ...
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सोमवार, 23 नवंबर 2009

101. वदीयत दर्द का / vadeeyat dard ka

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वदीयत दर्द का ******* रूह लिपटी रही जिस्म से ऐसे दो अजनबी मिल रहे हों जैसे, पता पूछा मेरे ज़ीस्त से उसने और जुदा हो गया सजदा करके ।  ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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