लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 27 जून 2014

459. कैनवस

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कैनवस *** एक कैनवस कोरा-सा    जिस पर भरे मैंने अरमानों के रंग   पिरो दिए अपनी कामनाओं के बूटे   रोप दिए अपनी ख़्वाहिशों के पंख   और चाहा कि ...
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रविवार, 25 मई 2014

458. हादसा

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हादसा ******* हमारा मिलना  हर बार एक हादसे में तब्दील हो जाता है  हादसा, जिससे दूसरों का कुछ नहीं बिगड़ता  सिर्फ़ हमारा-तुम्हारा...
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मंगलवार, 20 मई 2014

457. दुआ के बोल (दुआ पर 5 हाइकु) पुस्तक 56

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दुआ के बोल ******* 1.  फूले व फले बगिया जीवन की   जन-जन की ।  2. दुआ के बोल  ब्रह्माण्ड में गूँजते  तभी लगते ।     ...
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मंगलवार, 13 मई 2014

456. पैसा (15 हाइकु) पुस्तक 54-56

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पैसा   ******* 1. पैसे  ने छीने रिश्ते नए पुराने पैसा  बेदिल। 2. पैसा  गरजा ग़ैर बने अपने रिश्ता बरसा। 3. पैसे  की वर्षा भा...
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रविवार, 11 मई 2014

455. अवसाद के क्षण

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अवसाद के क्षण *** अवसाद के क्षण  वैसे ही लुढ़क जाते हैं  जैसे कड़क धूप के बाद शाम ढलती है जैसे अमावास के बाद चाँदनी खिलती है  जैसे...
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गुरुवार, 1 मई 2014

454. शासक (पुस्तक -78)

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शासक ******* इतनी क्रूरता,  कैसे उपजती है तुममें? कैसे रच देते हो, इतनी आसानी से चक्रव्यूह  जहाँ तिलमिलाती हैं, विवशताएँ और ग...
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सोमवार, 28 अप्रैल 2014

453. गुमसुम ये हवा (स्त्री पर 7 हाइकु) पुस्तक 54

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गुमसुम ये हवा  ******* 1. गाती है गीत गुमसुम ये हवा नारी की व्यथा ।  2. रोज़ सोचती बदलेगी क़िस्मत हारी औरत ।  3. ख़ूब हँसती ख़ुद ...
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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

452. बहुरुपिया (5 ताँका)

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बहुरुपिया  *** 1. हवाई यात्रा करता ही रहता मेरा सपना न पहुँचा ही कहीं न रुकता ही कभी।  2. बहुरुपिया कई रूप दिखाए सच छ...
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रविवार, 20 अप्रैल 2014

451. मतलब

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मतलब ******* छोटे-छोटे दुःख सुनना न मुझे पसंद है न तुम्हें यूँ तुमने कभी मना नहीं किया कि न बताऊँ  पर जिस अनमने भाव से सब सु...
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गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

450. चाँद-चाँदनी (चाँद पर 7 हाइकु) पुस्तक 53,54

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चाँद-चाँदनी ******* 1. तप करता श्मशान में रात को अघोरी चाँद ।  ! 2. चाँद न आया इंतज़ार करती रात परेशाँ ।  3. वादा...
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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

449. समय-रथ (समय पर 4 हाइकु) पुस्तक 53

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समय-रथ  ******* 1. रोके न रुके  अपनी चाल चले  समय-रथ ।  2. न देख पीछे  सब अपने छूटे यही है सच ।  3.   नहीं फू...
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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

448. पात झरे यूँ (पतझर पर 10 हाइकु) पुस्तक 52,53

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पात झरे यूँ  ******* 1. पात झरे यूँ  तितर-बितर  ज्यूँ  चाँदनी गिरे। 2. पतझर ने   छीन लिए लिबास गाछ उदास । 3. शैतान...
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मंगलवार, 18 मार्च 2014

447. कुछ ख़त

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कुछ ख़त ******* मुद्दतों बाद तेरा ख़त मिला जिसपर तुम्हारा पता नहीं रोशनाई ज़रा-ज़रा पसरी हुई  हर्फ़ ज़रा-ज़रा भटके हुए तुमने प्या...
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446. फगुआ रंग (होली पर 7 हाइकु) पुस्तक 51, 52

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फगुआ रंग  ******* 1. फगुआ रंग मन हुआ मलंग गाए तरंग। 2. चटख रंग अंग-अंग में लगे मन बहके । 3. हवाएँ झूमी    आसमा...
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शनिवार, 8 मार्च 2014

445. किसे लानत भेजूँ

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किसे लानत भेजूँ ******* किस एहसास को जीऊँ आज? ख़ुद को बधाई दूँ  या लानत भेजूँ उन सबको  जो औरत होने पर गुमान करती हैं   और सबसे छुपकर हर रोज़...
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रविवार, 2 मार्च 2014

444. थम ही जा

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थम ही जा ******* जैसे-जैसै मन सिकुड़ता गया जिस्म और ज़रुरतें भी सिकुड़ती गईं ऐसा नहीं कि कोई चाह नहीं पर हर चाह को समेटना,  रीत ...
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शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

443. बेपरवाह मौसम

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बेपरवाह मौसम *******  कुछ मौसम    जाने कितने बेपरवाह हुआ करते हैं    बिना हाल पूछे, चुपके से गुज़र जाते हैं    भले ही मैं उसकी ज़र...
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गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

442. वसंत ऋतु (वसंत ऋतु पर 4 हाइकु) पुस्तक - 51

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वसंत ऋतु ******* 1. हवा बसंती  उड़ाकर ले गई  सोच ठिठुरी ।    2.   बसंती फूल  चहुँ ओर हैं खिले  ऋतु ने दिए ।   3.   ...
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मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

441. हे श्वेताम्बरा (सरस्वती पूजा पर 3 हाइकु) पुस्तक - 50

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हे श्वेताम्बरा   ******* 1. ज्ञान विवेक, हे श्वेताम्बरा आओ जगत को दो ।  2. पीली धरती अगवानी करती माँ शारदा की ।  3...
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गुरुवार, 30 जनवरी 2014

440. तेज़ाब की नदी (पुस्तक 102)

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तेज़ाब की नदी ******* मैं तेज़ाब की एक नदी हूँ  पल-पल में सौ-सौ बार  ख़ुद ही जली हूँ अपनी आँखों से, अनवरत बहती हुई अपना ही लहू...
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शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

439. निर्लज्जता

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निर्लज्जता ******* स्वीकार है मुझे  मेरी निर्लज्जता आज दिखाया है  भरी भीड़ को मैंने अपने वो सारे अंग जिसे छुपाया था  जन्म से अब...
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बुधवार, 22 जनवरी 2014

438. उफ़! माया

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उफ़! माया ******* "मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है...  मेरा वो सामान लौटा दो...!" 'इजाज़त' की 'माया'...
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सोमवार, 20 जनवरी 2014

437. पूर्ण विराम (क्षणिका)

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पूर्ण विराम ******* एक पूरा वजूद, धीमे-धीमे जलकर  राख़ में बदलके चेतावनी देता-  यही है अंत, सबका अंत मुफ़लिसी में जियो या करोड़ो...
15 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 14 जनवरी 2014

436. पूरा का पूरा (क्षणिका)

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पूरा का पूरा  ******* तेरे अधूरेपन को  अपना पूरा दे आई यूँ लगा  मानो दुनिया पा गई पर अब जाना  तेरा आधा भी  तेरा नहीं था   फिर तू...
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मंगलवार, 7 जनवरी 2014

435. जजमेंटल

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जजमेंटल ******* गुज़रे हो तुम सभी इसी दौर से कभी फिर नई नस्लों के लिए नई फ़सलों के लिए क्योंकर  एकपक्षीय हो जाते हो क्यो...
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शनिवार, 4 जनवरी 2014

434. आँचल में मौसम

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आँचल में मौसम ******* तमाम रास्ते बिखरे पत्ते सूखे चरमराते हुए  अपने अंत की कहानी कह रहे थे   मुर्झाए फूल अपनी शाख से गिरकर ...
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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

433. ये साल नया (नव वर्ष पर 6 हाइकु) पुस्तक 50

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ये साल नया ******* 1. सौग़ात लाया झोली में भरकर, ये साल नया । 2. अतीत छुपा, नए साल का देख पिटारा नया । 3. फिर से ख...
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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

432. अतीत के जो पन्ने (चोका - 6)

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अतीत के जो पन्ने    *** याद दिलाए  अतीत के जो पन्ने   फड़फड़ाए खट्टी-मीठी-सी यादें पन्नों से झरे   इधर-उधर को बिखर गए ...
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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

431. मन (10 हाइकु) पुस्तक 49,50

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मन  ******* 1. मन में बसी धूप सीली-सीली-सी ठंडी-ठंडी सी। 2. भटका मन सवालों का जंगल सब है मौन। 3. शाख से टूटे उदा...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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