लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

544. सुख-दुःख जुटाया है (क्षणिका)

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सुख-दुःख जुटाया है   *******   तिनका-तिनका जोड़कर सुख-दुःख जुटाया है   सुख कभी-कभी झाँककर    अपने होने का  एहसास कराता है    दु...
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सोमवार, 17 अप्रैल 2017

543. एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में (तुकांत)

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एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ******* तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में   एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ।     वक़्त के आइन...
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शनिवार, 1 अप्रैल 2017

542. विकल्प (क्षणिका)

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विकल्प   *******   मेरे पास कोई विकल्प नहीं   मैं हर किसी की विकल्प हूँ      कामवाली, सफ़ाईवाली, रसोईया छुट्टी पर  पशु को खिलाने...
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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

541. साथ-साथ

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साथ-साथ  *******   तुम्हारा साथ   जैसे बंजर ज़मीन में फूल खिलना   जैसे रेगिस्तान में जल का स्रोत फूटना।   अकसर सोचती हूँ   ...
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मंगलवार, 21 मार्च 2017

540. नीयत और नियति

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नीयत और नियति   ***   नीयत और नियति समझ से परे है एक झटके में सब बदल देती है   ज़िन्दगी अवाक्!    काँधे पर हाथ धरे चलते-चलते   पीठ में गहरी...
शनिवार, 18 मार्च 2017

539. रेगिस्तान

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रेगिस्तान *******   मुमकिन है यह उम्र   रेगिस्तान में ही चुक जाए   कोई न मिले उस जैसा   जो मेरी हथेलियों पर   चमकते सितारो...
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सोमवार, 13 मार्च 2017

538. जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)

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जागा फागुन  ***   1.   होली कहती-   खेलो रंग गुलाल   भूलो मलाल ।      2.   जागा फागुन   एक साल के बाद,   खिलखिला...
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बुधवार, 1 मार्च 2017

537. हवा बसन्ती (बसन्त ऋतु पर 10 हाइकु) पुस्तक 83,84

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हवा बसन्ती   *******   1.   हवा बसन्ती   लेकर चली आई   रंग-बहार ।      2.   पीली ओढ़नी   लगती है सोहणी   धरा ने ओढ़ी ।...
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सोमवार, 23 जनवरी 2017

536. मुआ ये जाड़ा (ठंड के हाइकु 10) पुस्तक 82, 83

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मुआ ये जाड़ा   ******* 1.   रज़ाई बोली-   जाता क्यों नहीं जाड़ा, अब मैं थकी ।      2.   फिर क्यों आया   सबको यूँ कँप...
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सोमवार, 16 जनवरी 2017

535. तुम भी न बस कमाल हो

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तुम भी न बस कमाल हो   *******   धत्त! तुम भी न बस कमाल हो!   न सोचते न विचारते   सीधे-सीधे कह देते   जो भी मन में आए   चा...
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रविवार, 1 जनवरी 2017

534. जीवन को साकार करें (क्षणिका)

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जीवन को साकार करें  *******   अति बुरी होती है   साँसों की हो या संयम की   विचलन की हो या विभोर की   प्रेम की हो या परित्याग...
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शनिवार, 10 दिसंबर 2016

533. जग में क्या रहता है (9 माहिया)

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जग में क्या रहता है   (9 माहिया) *******   1.   जीवन ये कहता है   काहे का झगड़ा   जग में क्या रहता है!   2.   तुम क...
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रविवार, 27 नवंबर 2016

532. मानव-नाग

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मानव-नाग     ***   सुनो!  अगर सुन सको     ओ मानव केंचुल में छुपे नाग!     डसने की आज़ादी मिल गई तुम्हें    पर जीत ही जाओगे  यह भ्रम क्यों? ...
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सोमवार, 14 नवंबर 2016

531. बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज

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बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज *******    बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज    क्यों चारों पहर ये जलता है,   दो पल चैन से सो लूँ मैं भी...
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शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

530. पुकार (क्षणिका)

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पुकार ******* हाँ! मुझे मालूम है   एक दिन तुम याद करोगे   मुझे पुकारोगे पर मैं नहीं आऊँगी   चाहकर भी न आ पाऊँ गी    इसलिए जब त...
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बुधवार, 14 सितंबर 2016

529. हिन्दी खिलेगी (हिन्दी दिवस पर 9 हाइकु)

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हिन्दी खिलेगी ***    1.    मन की बात    कह पाएँ सबसे    हिन्दी के साथ।    2.    हिन्दी रूठी है    अँग्रेज़ी मातृभाषा   ...
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शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

528. देर कर दी

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देर कर दी    *******    हाँ! देर कर दी मैंने    हर उस काम में जो मैं कर सकती थी    दूसरों की नज़रों में ख़ुद को ढालते-ढालते ...
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बुधवार, 31 अगस्त 2016

527. शबनम (तुकांत)

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शबनम    *******    रात चाँदनी में पिघलकर    यूँ मिटी शबनम    सहर को ये ख़बर नहीं थी    कब मिटी शबनम।     दर्द की मिट्टी ...
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बुधवार, 24 अगस्त 2016

526. प्रलय (क्षणिका)

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प्रलय    *******    नहीं मालूम कौन ले गया  रोटी और सपनों को    सिरहाने की नींद और तन के ठौर को    राह दिखाते ध्रुव तारे और दिन के उज...
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गुरुवार, 18 अगस्त 2016

525. चहकती है राखी (राखी पर 15 हाइकु) पुस्तक 80, 81

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चहकती है राखी    *******    1.    प्यारी  बहना     फूट-फूट के रोई    भैया न आया ।     2.    राखी है रोई    सुने न अफ...
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सोमवार, 15 अगस्त 2016

524. जय भारत (स्वतंत्रता दिवस पर 10 हाइकु) पुस्तक 79, 80

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जय भारत *******    1.    तिरंगा झूमा     देख जश्ने-आज़ादी,    जय भारत!    2.    मुट्ठी में झंडा    पाई-पाई माँगता   ...
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सोमवार, 8 अगस्त 2016

523. उसने फ़रमाया है (तुकांत)

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उसने फ़रमाया है    *******    ज़िल्लत का ज़हर कुछ यूँ वक़्त ने पिलाया है    जिस्म की सरहदों में ज़िन्दगी दफ़नाया है।  सेज पर बि...
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गुरुवार, 4 अगस्त 2016

522. चलो चलते हैं

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चलो चलते हैं ***   सुनो साथी!   चलो चलते हैं नदी के किनारे ठण्डी रेत पर पाँव को ज़रा ताज़गी दे वहीं ज़रा सुस्ताएँगे अपने-अपने ...
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मंगलवार, 2 अगस्त 2016

521. खिड़की मर गई है (क्षणिका)

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खिड़की मर गई है  *******   खिड़की बंद हो गई, वह बाहर नहीं झाँकती आसमान और ताज़ी हवा से नाता टूट गया   सूरज दिखता नही पेड़ पौधे ओट...
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गुरुवार, 28 जुलाई 2016

520. अजब ये दुनिया (चोका - 8)

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अजब ये दुनिया    ***   यह दुनिया   ज्यों अजायबघर अनोखे दृश्य   अद्भुत संकलन   विस्मयकारी   देख होते हैं स्तब्ध।    अज...
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गुरुवार, 21 जुलाई 2016

519. भरोसा (क्षणिका)

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भरोसा ******* ढेरों तकनीक हैं,  भरोसा जताने  और तोड़ने की सारी की सारी  इस्तेमाल में लाई जाती हैं   पर  भरोसा जताने या  तोड़ने के ल...
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गुरुवार, 7 जुलाई 2016

518. मैं स्त्री हूँ (पुस्तक 63)

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मैं स्त्री हूँ  *******   मैं स्त्री हूँ   मुझे ज़िंदा रखना उतना ही सहज है जितना सहज   मुझे गर्भ में मार दिया जाना   मेरा विक...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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