लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 30 जून 2017

549. धरा बनी अलाव (गर्मी के 10 हाइकु)

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धरा बनी अलाव   ***   1.   दोषी है कौन?   धरा बनी अलाव,   हमारा कर्म ।      2.   आग उगल   रवि गर्व से बोला-   स...
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रविवार, 25 जून 2017

548. फ़ौजी-किसान (19 हाइकु)

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फ़ौजी-किसान   ***   1.   कर्म पे डटा   कभी नहीं थकता   फ़ौजी-किसान ।      2.   किसान हारे   ख़ुदकुशी करते,   बेबस सा...
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गुरुवार, 1 जून 2017

547. मर गई गुड़िया

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मर गई गुड़िया   *******   गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया   ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया   ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िय...
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शनिवार, 13 मई 2017

546. तहज़ीब (क्षणिका)

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तहज़ीब *******   तहज़ीब सीखते-सीखते   तमीज़ से हँसने का शऊर आ गया   तमीज़ से रोने का हुनर आ गया   न आया तो तहज़ीब और तमीज़ से  ...
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गुरुवार, 11 मई 2017

545. हमारी माटी (गाँव पर 20 हाइकु)

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हमारी माटी     ***   1.   किरणें आईं    खेतों को यूँ जगाती    जैसे हो माई।   2.   सूरज जागा   पेड़-पौधे मुस्काए   ...
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सोमवार, 24 अप्रैल 2017

544. सुख-दुःख जुटाया है (क्षणिका)

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सुख-दुःख जुटाया है   *******   तिनका-तिनका जोड़कर सुख-दुःख जुटाया है   सुख कभी-कभी झाँककर    अपने होने का  एहसास कराता है    दु...
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सोमवार, 17 अप्रैल 2017

543. एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में (तुकांत)

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एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ******* तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में   एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ।     वक़्त के आइन...
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शनिवार, 1 अप्रैल 2017

542. विकल्प (क्षणिका)

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विकल्प   *******   मेरे पास कोई विकल्प नहीं   मैं हर किसी की विकल्प हूँ      कामवाली, सफ़ाईवाली, रसोईया छुट्टी पर  पशु को खिलाने...
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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

541. साथ-साथ

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साथ-साथ  *******   तुम्हारा साथ   जैसे बंजर ज़मीन में फूल खिलना   जैसे रेगिस्तान में जल का स्रोत फूटना।   अकसर सोचती हूँ   ...
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मंगलवार, 21 मार्च 2017

540. नीयत और नियति

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नीयत और नियति   ***   नीयत और नियति समझ से परे है एक झटके में सब बदल देती है   ज़िन्दगी अवाक्!    काँधे पर हाथ धरे चलते-चलते   पीठ में गहरी...
शनिवार, 18 मार्च 2017

539. रेगिस्तान

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रेगिस्तान *******   मुमकिन है यह उम्र   रेगिस्तान में ही चुक जाए   कोई न मिले उस जैसा   जो मेरी हथेलियों पर   चमकते सितारो...
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सोमवार, 13 मार्च 2017

538. जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)

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जागा फागुन  ***   1.   होली कहती-   खेलो रंग गुलाल   भूलो मलाल ।      2.   जागा फागुन   एक साल के बाद,   खिलखिला...
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बुधवार, 1 मार्च 2017

537. हवा बसन्ती (बसन्त ऋतु पर 10 हाइकु) पुस्तक 83,84

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हवा बसन्ती   *******   1.   हवा बसन्ती   लेकर चली आई   रंग-बहार ।      2.   पीली ओढ़नी   लगती है सोहणी   धरा ने ओढ़ी ।...
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सोमवार, 23 जनवरी 2017

536. मुआ ये जाड़ा (ठंड के हाइकु 10) पुस्तक 82, 83

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मुआ ये जाड़ा   ******* 1.   रज़ाई बोली-   जाता क्यों नहीं जाड़ा, अब मैं थकी ।      2.   फिर क्यों आया   सबको यूँ कँप...
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सोमवार, 16 जनवरी 2017

535. तुम भी न बस कमाल हो

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तुम भी न बस कमाल हो   *******   धत्त! तुम भी न बस कमाल हो!   न सोचते न विचारते   सीधे-सीधे कह देते   जो भी मन में आए   चा...
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रविवार, 1 जनवरी 2017

534. जीवन को साकार करें (क्षणिका)

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जीवन को साकार करें  *******   अति बुरी होती है   साँसों की हो या संयम की   विचलन की हो या विभोर की   प्रेम की हो या परित्याग...
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शनिवार, 10 दिसंबर 2016

533. जग में क्या रहता है (9 माहिया)

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जग में क्या रहता है   (9 माहिया) *******   1.   जीवन ये कहता है   काहे का झगड़ा   जग में क्या रहता है!   2.   तुम क...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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