लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

639. सवाल (5 क्षणिका)

›
सवाल  *******    1.  कुछ सवाल ***   कुछ सवाल ठहर जाते हैं मन में  माकूल जवाब मालूम है  मगर कहने की हिमाकत नहीं होती  कुछ सव...
3 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 16 नवंबर 2019

638. धरोहर

›
धरोहर  *******  मेरी धरोहरों में कई ऐसी चीज़ें हैं    जो मुझे बयान करती हैं, मेरी पहचान करती हैं    कुछ पुस्तकें, जिनमें लेखकों के हस्ताक्ष...
2 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 7 नवंबर 2019

637. महज़ नाम (क्षणिका)

›
महज़ नाम  *******    सोचती थी, किसी के आँचल में हर वेदना मिट जाती है    पर भाव बदल जाते हैं, तो संवेदना मिट जाती है    न किसी प्यार ...
4 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 6 नवंबर 2019

636. रेगिस्तान (क्षणिका)

›
रेगिस्तान  *******     आँखें अब रेगिस्तान बन गई हैं  यहाँ न सपने उगते हैं न बारिश होती है  धूल-भरी आँधियों से  रेत पे गढ़े वे सारे हर...
4 टिप्‍पणियां:
रविवार, 27 अक्टूबर 2019

635. दिवाली (दिवाली पर 7 हाइकु) पुस्तक - 112

›
दिवाली  (दिवाली पर 7 हाइकु)    *******    1.    सुख समृद्धि    हर घर पहुँचे    दीये कहते।    2.    मन से देता    स...
3 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019

634. दंगा

›
दंगा   ***    किसी ने कहा ये हिन्दू मरा    कोई कहे ये मुसलमान था    अपने-अपने दड़बे में क़ैद     बँटा सारा हिन्दुस्तान था ।  ...
2 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

633. चाँद (चाँद पर 10 हाइकु) पुस्तक 111,112

›
चाँद  *******    1.    बिछ जो गई    रोशनी की चादर    चाँद है खुश।    2.    सबका प्यारा    कई रिश्तों में दिखा    द...
1 टिप्पणी:
सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

632. रिश्ते (रिश्ते पर 10 हाइकु) पुस्तक - 110,111

›
रिश्ते *******  1.    कौन समझे    मन की संवेदना    रिश्ते जो टूटे।    2.    नहीं अपना    कौन किससे कहे    मन की व्यथ...
5 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

631. जीवन की गंध (क्षणिका)

›
जीवन की गंध    *******    यहाँ भी कोई नहीं, वहाँ भी कोई नहीं  नितान्त अकेले तय करना है  तमाम राहों को पार करना है पाप-पुण्य, स...
4 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

630. जादुई नगरी

›
जादुई नगरी *******  तुम प्रेम नगर के राजा हो    मैं परी देश की हूँ रानी    पँखों पर तुम्हें बिठाकर मैं    ले जाऊँ सपनो की नगरी।...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 30 सितंबर 2019

629. साँझ (साँझ पर 10 हाइकु) पुस्तक - 109,110

›
साँझ  *******    1.    साँझ पसरी    ''लौट आ मेरे चिड़े!''    अम्मा कहती।    2.    साँझ की वेला    अप...
5 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 26 सितंबर 2019

628. गुम सवाल (क्षणिका)

›
गुम सवाल    ******    ज़िन्दगी जब भी सवालों में उलझी    मिल न पाया कोई माकूल जवाब    फिर ठठाकर हँस पड़ी    और गुम कर दिया सवा...
3 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 19 सितंबर 2019

627. तमाशा

›
तमाशा  ***   सच को झूठ, झूठ को सच कहती है दुनिया    इसी सच-झूठ के दरमियान रहती है दुनिया    ख़ून के नाते हों या क़िस्मत के नाते   ...
2 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 14 सितंबर 2019

626. क्षणिक बहार

›
क्षणिक बहार    ***    आज वह ख़ूब चहक रही है    मन-ही-मन में बहक रही है  साल भर से वह, जो कच्ची थी  उसका दिन है, तो पक रही है। ...
मंगलवार, 3 सितंबर 2019

625. परम्परा (क्षणिका)

›
परम्परा    *******    मन के अवसाद को    चूड़ियों की खनक, बिन्दी के आकार    होठों की लाली और मुस्कुराहट में दफ़नाकर  खिलखिलाकर ...
2 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 31 अगस्त 2019

624. कश

›
कश    *******    "मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया    हर फ़िक्र को धुँए में उड़ाता चला गया"  रफी साहब ने गा दिया  देवानं...
6 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 27 अगस्त 2019

623. अकेले हम (5 हाइकु) पुस्तक 108,109

›
अकेले हम *******    1. ज़िन्दगी यही    चलना होगा तन्हा    अकेले हम।    2. राहें ख़ामोश    सन्नाटा है पसरा    अकेले...
2 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 20 अगस्त 2019

622. औरत (10 क्षणिका)

›
औरत  ******* 1. औरत  ***    एक चुटकी नमक    एक चुटकी सिन्दूर    एक चुटकी ज़हर    मुझे औरत करते रहे    ज़िन्दगी भर।    2...
7 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 1 अगस्त 2019

621. उधार

›
उधार  ***  कुछ रंग जो मेरे हिस्से में नहीं थे  मैंने उधार लिए मौसम से    पर न जाने क्यों    ये बेपरवाह मौसम मुझसे लड़ रहा है  ...
2 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 18 जुलाई 2019

620. जीवन-युद्ध

›
जीवन-युद्ध     ***    यादों के गलियारे से गुज़रते हुए    मुमकिन है यादों को धकेलते हुए    जीवन के पार तो आ गई     पर राहों में पड़ी छोटी-छो...
4 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 15 जुलाई 2019

619. हे वर्षा रानी (10 ताँका)

›
हे वर्षा रानी     ***    1. तपती धरा    तन भी तप उठा    बदरा छाए    घूम-घूम गरजे    मन का भौंरा नाचे।    2.    कूकी...
7 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 4 जुलाई 2019

618. जीवन-पथ (चोका - 12)

›
जीवन-पथ     ***    जीवन-पथ    उबड़-खाबड़-से  टेढ़े-मेढ़े-से    गिरते-पड़ते भी    होता चलना,    पथ कँटीले सही    पथरीले भी  ...
2 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 1 जुलाई 2019

617. सरमाया (क्षणिका)

›
सरमाया    *******    ये कैसा दौर आया है,  पहर-पहर भरमाया है    कुछ माँगूँ तो ईमान मरे,  न माँगूँ तो ख़्वाब मरे    क़िस्मत से धक्का...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 17 जून 2019

616. कड़ी

›
कड़ी    ******* अतीत की एक कड़ी    मैं ख़ुद हूँ    मन के कोने में, सबकी नज़रों से छुपाकर    अपने पिता को जीवित रखा है    जब-जब...
5 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 7 जून 2019

615. नहीं आता (अनुबन्ध/तुकान्त)

›
नहीं आता    *******    ग़ज़ल नहीं कहती    यूँ कि मुझे कहना नहीं आता    चाहती तो हूँ मगर    मन का भेद खोलना नहीं आता।    बसर त...
5 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 1 जून 2019

614. नज़रबंद

›
नज़रबंद    *******    ज़िन्दगी मुझसे भागती रही    मैं दौड़ती रही, पीछा करती रही    एक दिन आख़िर वो पकड़ में आई    ख़ुद ही जैसे मेर...
6 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 1 मई 2019

613. अधिकार और कर्त्तव्य

›
अधिकार और कर्त्तव्य     ***    अधिकार है तुम्हें    कर सकते हो  हर वह काम  जो जायज़ नहीं है    पर हमें इजाज़त नहीं कि हम प्रतिरोध करें  कर्त...
6 टिप्‍पणियां:
रविवार, 31 मार्च 2019

612. प्रकृति (20 हाइकु) पुस्तक 106-109

›
प्रकृति      *******    1.    प्यार मिलता    तभी खिलखिलाता    प्रकृति-शिशु।    2.    अद्भुत लीला    प्रकृति प्राण देती...
7 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 28 मार्च 2019

611. जीवन मेरा (चोका - 11)

›
जीवन मेरा     ***    मेरे हिस्से में    ये कैसा सफ़र है    रात व दिन    चलना जीवन है,    थक जो गए    कहीं ठौर न मिला    ...
2 टिप्‍पणियां:
रविवार, 24 मार्च 2019

610. परम्परा

›
परम्परा    *******       मैं उदासी नहीं चाहती थी    मैं तो खिलखिलाना चाहती थी    आज़ाद पंक्षियों-सा उड़ना चाहती थी    हर रोज़ ...
8 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 21 मार्च 2019

609. रंगों की होली (10 हाइकु) पुस्तक - 105, 106

›
रंगों की होली      *******    1.    रंगो की होली    गाँठ मन की खोली    प्रीत बरसी।    2.    पावन होली    मन है सतरंगी ...
7 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 19 मार्च 2019

608. स्वीकार (क्षणिका)

›
स्वीकार    *******    मैं अपने आप से मिलना नहीं चाहती    जानती हूँ ख़ुद से मिलूँगी तो    जी नहीं पाऊँगी    जीवित रहने के लिए   ...
4 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 8 मार्च 2019

607. पानी और स्त्री

›
पानी और स्त्री  *******    बचपन में पढ़ा-    पानी होता है रंगहीन गंधहीन    जिसे जहाँ रखा उस साँचे में ढला     ख़ूब गर्म किया भाप...
4 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

606. आँख (आँख पर 20 हाइकु) पुस्तक - 103-105

›
आँख     *******    1.    पट खोलती    दुनिया निहारती    आँखें झरोखा।    2.    आँखों की भाषा    गर समझ सको    मन को...
10 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.