लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

716. ज़िन्दगी भी ढलती है

›
ज़िन्दगी भी ढलती है  *******  पीड़ा धीरे-धीरे पिघल, आँसुओं में ढलती है    वक़्त की पाबन्दी है, ज़िन्दगी भी ढलती है ।    अजब व्यथा है, सुबह और श...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 29 मार्च 2021

715. होली मइया (होली पर 21 हाइकु)

›
होली मइया  (होली पर 21 हाइकु)  ***  1.  उन्मुक्त रंग    ऋतुराज बसन्त     फगुआ गाते।    2.  बन्धन मुक्त    भेदभाव से मुक्त,    होली सन्देश।  ...
6 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 22 मार्च 2021

714. झील (झील पर 30 हाइकु)

›
झील  (झील पर 30 हाइकु)  ***    1.  अद्भुत छटा    आत्ममुग्ध है झील    ख़ुद में लीन।    2.  ता-ता थइया    थिरकती झील    वो अलबेली।    3.  अनवरत...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 18 मार्च 2021

713. अनाथ

›
अनाथ  ***  काश! हवा या धुआँ बनकर    आसमान में जाती    चाँद की चाँदनी में उन तारों को ढूँढती    जो बचपन में मेरे पापा बन गए    और अब माँ भी उ...
6 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 12 मार्च 2021

712. रिश्ते (रिश्ते पर 20 सेदोका)

›
रिश्ते   ***  1.  रिश्ते हैं फूल    भौतिकता ने छीने    रिश्तों के रंग-गन्ध     मुरझा गए,    नहीं कोई उपाय    कैसे लौटे सुगन्ध।    2.  रिश्ते...
8 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 8 मार्च 2021

711. अब नहीं हारेगी औरत

›
अब नहीं हारेगी औरत *******  जीवन के हर जंग में हारती है औरत    ख़ुद से लड़ती-भिड़ती हारती है औरत    सुख समेटते-समेटते हारती है औरत    दुःख छुपा...
19 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 27 जनवरी 2021

710. भोर की वेला (भोर पर 7 हाइकु)

›
भोर की वेला  ***  1.  माँ-सी जगाएँ    सुनहरी किरणें    भोर की वेला।    2.  पाखी की टोली    भोरे-भोरे निकली    कर्म निभाने।    3.  किरणें बोल...
12 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 20 जनवरी 2021

709. बात इतनी सी है

›
बात इतनी सी है  *******  चले थे साथ बात इतनी सी है    जिए पर तन्हा बात इतनी सी है।    वे मसरूफ़ रहते तो बात न थी    मग़रूर हुए बात इतनी सी है।...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 11 जनवरी 2021

708. आकुल (5 माहिया)

›
आकुल  *******  1.  जीवन जब आकुल है    राह नहीं दिखती    मन होता व्याकुल है।    2.  हर बाट छलावा है    चलना ही होगा    पग-पग पर लावा है।    3...
9 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 7 जनवरी 2021

707. कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर

›
कम्फर्ट ज़ोन से बाहर  ***  कम्फर्ट ज़ोन से बाहर    जोखिमों की लम्बी क़तार को    बच-बचाकर लाँघ जाना    क्या इतना आसान है    बिना लहूलुहान पार ...
8 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 5 जनवरी 2021

706. कहानियाँ (5 क्षणिका)

›
कहानियाँ   ******* 1. कहानी  *** कहानी में मैं मुझमें ही कहानी    कहता कौन सुनता कौन    पन्नों पर रच दी कहानी    और मैं बन गई इतिहास। 2. छोट...
8 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

705. नूतन वर्ष (10 हाइकु)

›
नूतन वर्ष *** 1.  दसों दिशाएँ    करती हैं स्वागत    नूतन वर्ष।    2.  देकर दुःख    बीता पुराना साल    बेवफ़ा जैसे।    3.  आई द्वार पे    उम्म...
10 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

704. मुट्ठी से फिसल गया

›
मुट्ठी से फिसल गया  *** निःसन्देह बीता कल नहीं लौटेगा    जो बिछड़ गया अब नहीं मिलेगा    फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस    शायद मिल जाए वापस    जो ...
12 टिप्‍पणियां:
रविवार, 20 दिसंबर 2020

703. तकरार

›
तकरार  ***  आत्मा और बदन में तकरार जारी है   बदन छोड़कर जाने को आत्मा उतावली है    पर बदन हार नहीं मान रहा    आत्मा को मुट्ठी से कसकर भींचे ...
18 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

702. गंगा (20 हाइकु)

›
 गंगा  *** 1.  चल पड़ी हूँ    सागर से मिलने    गंगा  के संग।    2.  जीवन  गंगा    सागर यों ज्यों क़ज़ा    अन्तिम सत्य।    3.  मुक्ति है देती  ...
15 टिप्‍पणियां:
रविवार, 13 दिसंबर 2020

701. पत्थर या पानी

›
पत्थर या पानी  ***   मेरे अस्तित्व का प्रश्न है   मैं पत्थर बन चुकी या पानी हूँ?     पत्थरों से घिरी, मैं जीवन भूल चुकी हूँ    शायद पत्थर बन...
12 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 2 दिसंबर 2020

700. स्त्री हूँ (10 क्षणिका)

›
स्त्री हूँ  *******  1. स्त्री हूँ  ***  स्त्री हूँ, वजूद तलाशती    अपना एक कोना ढूँढती    अपनों का ताना-बाना जोड़ती    यायावरता मेरी पहचान ...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 25 नवंबर 2020

699. दागते सवाल

›
दागते सवाल  ***  यही तो कमाल है    सात समंदर पार किया, साथ समय को मात दी    फिर भी कहते हो-    हम साथ चलते नहीं हैं।    हर स्वप्न को बड़े जत...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 23 नवंबर 2020

698. भटकना (क्षणिका)

›
भटकना  *******  सारा दिन भटकती हूँ    हर एक चेहरे में अपनों को तलाशती हूँ    अंतत: हार जाती हूँ    दिन थक जाता है रात उदास हो जाती है    हर ...
11 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 17 नवंबर 2020

697. वसीयत

›
वसीयत    ***  ज़ीस्त के ज़ख़्मों की कहानी तुम्हें सुनाती हूँ    मेरी उदासियों की यही है वसीयत    तुम्हारे सिवा कौन इसको सँभाले    मेरी यह वसीयत...
12 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 14 नवंबर 2020

696. प्रकाश-पर्व (दीवाली पर 10 हाइकु)

›
प्रकाश - पर्व *** 1. धूम- धड़ाका     चारों   ओर   उजाला     प्रकाश - पर्व ।    2. फूलों - सी   सजी     जगमग   करती     दीयों   की   लड़ी ।    ...
4 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 10 नवंबर 2020

695. जिया करो (तुकांत)

›
जिया करो  *******  सपनों के गाँव में, तुम रहा करो    किस्त-किस्त में न, तुम जिया करो ।        संभावनाओं भरा, ये शहर है    ज़रा आँखें खुली, तु...
10 टिप्‍पणियां:
रविवार, 8 नवंबर 2020

694. हम (11 हाइकु) प्रवासी मन - 119, 120

›
हम  *******  1.  चाहता मन-    काश   पंख   जो   होते    उड़ते हम ।       2.  जल   के   स्रोत    कण - कण   से   फूटे    प्यासे हैं हम ।       ...
10 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 3 नवंबर 2020

693. कपट

›
कपट  *** हाँ कपट ही तो है    सत्य से भागना, सत्य न कहना, पलायन करना    पर यह भी सच है, सत्य की राह में    बखेड़ों के मेले हैं, झमेलों के रेले...
5 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

692. दड़बा

›
दड़बा  ***  ऐ लड़कियों!    तुम सब जाओ, अपने-अपने दड़बे में    अपने-अपने परों को सँभालो    एक दूसरे को अपनी-अपनी चोंच से  लहूलुहान करो।     कटन...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

691. देहाती

›
देहाती  ***  फ़िक्रमन्द हूँ उन सभी के लिए    जिन्होंने सूरज को हथेली में नहीं थामा    चाँद के माथे को नहीं चूमा    वर्षा में भीग-भीगकर न नाचा...
9 टिप्‍पणियां:
रविवार, 18 अक्टूबर 2020

690. चलते ही रहना (चोका - 14)

›
चलते ही रहना  ***  जीवन जैसे    अनसुलझी हुई    कोई पहेली    उलझाती है जैसे    भूलभूलैया,    क़दम-क़दम पे    पसरे काँटें    लहूलुहान पाँव    मन...
11 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

689. इकिगाई

›
इकिगाई  ***  ज़िन्दगी चल रही थी, जिधर राह मिली, मुड़ रही थी    कहाँ जाना है, क्या पाना है, कुछ भी करके बस जीना है    न कोई पड़ाव, न कोई मंज़ि...
7 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

688. साथी (चार लाइन की भावाभिव्यक्तियाँ) (12 क्षणिका)

›
साथी  *******  1.  साथी  *** मेरे साथी! तुम तब थे कहाँ    ज़ख़्मों से जब हम थे घायल हुए    इक तीर था निशाने पे लगा    तन-मन मेरा जब ज़ख़्मी हु...
10 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

687. बापू हमारे (बापू पर 10 हाइकु)

›
बापू   हमारे   *******  1. एक   सिपाही     अंग्रेज़ो   पर   भारी ,    मिला   स्वराज। 2. देश   की   शान     जन - जन   के   प्यारे     बापू   ह...
2 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.