लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 3 जुलाई 2010

151. तलाशो डगर ख़ुद जलकर (तुकांत) / talaasho dagar khud jalkar (tukaant)

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तलाशो डगर ख़ुद जलकर ******* सोचो सदा, तुम समझकर करो दोस्ती, ज़रा सँभलकर ।   न टूटे कभी, ख़ुद पे यक़ीन क़दम बढ़ाओ, तुम थमकर ।   अँधिय...
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गुरुवार, 1 जुलाई 2010

150. जवाब नहीं है मेरे पास / jawaab nahin hai mere paas

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जवाब नहीं है मेरे पास ******* आज फिर वो सवाल, बरबस याद आ गया वर्षों पहले तुमने, हठात् जो मुझसे किया था वही सवाल आज फिर, बेहिचक किया ह...
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रविवार, 20 जून 2010

149. बाबा आओ देखो! तुम्हारी बिटिया रोती है / baba aao dekho! tumhaari bitiya rotee hai (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 33)

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बाबा आओ देखो! तुम्हारी बिटिया रोती है  ******* मन में अब भी कहीं, एक नन्ही-सी बच्ची पलती है जाने क्या-क्या सपने बुनती, दूर आसमान को ताकती है...
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शनिवार, 19 जून 2010

148. सर्द मौसम की ठंडी मैं छाँव हूँ (तुकांत) / sard mousam ki thandi main chhaanv hoon (tukaant)

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सर्द मौसम की ठंडी मैं छाँव हूँ ******* सर्द मौसम की ठंडी मैं छाँव हूँ कोई ठहर न सके वो मैं पड़ाव हूँ ।   दुनिया है सागर की क्रूर लहर...
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बुधवार, 9 जून 2010

147. मेरी वफ़ा क्यों बातिल हुई (तुकांत) / meri wafa kyon baatil hui (tukaant)

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मेरी वफ़ा क्यों बातिल हुई ******* न दख़ल दिया, न दाख़िल हुई फिर मेरी वफ़ा, क्यों बातिल हुई ।   हर ज़ुल्म का इल्ज़ाम मुझपर मज़लूम भी...
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बुधवार, 2 जून 2010

146. अपना न कोई ज़िक्र की (तुकांत) / apna na koi zikra ki (tukaant)

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अपना न कोई ज़िक्र की ******* चाँदनी है मगर, रात जैसे हिज्र की ढल तो जाएगी, बात नहीं फ़िक्र की ।   छाया घना कोहरा, सबब क्या बताएँ बा...
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सोमवार, 31 मई 2010

145. बँटे हुए तुम / bante hue tum

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बँटे हुए तुम ******* क्या कभी भी सोचा या जाना तुमने क्यों दूर हो गई ख़ुद ही मैं तुमसे, एक-एक लम्हा जो साथ जिए थे न पूछो, बड़ा दर्द द...
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शनिवार, 22 मई 2010

144. रूख़सत पे कैसा ग़म (तुकांत) / rukhsat pe kaisa gham (tukaant)

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रूख़सत पे कैसा ग़म ******* रूख़सत पे कैसा ग़म नहीं अपना, वैसा ग़म ।   यक़ीन की बस्ती लूटी बदक़िस्मती, जैसा ग़म  फ़िक्र नहीं पर नाता ह...
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सोमवार, 17 मई 2010

143. अलविदा कहते हैं वो (तुकांत) / alvida kahte hain wo (tukaant)

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अलविदा कहते हैं वो ******* ज़मीन-ए-दिल में बसा, हमको रखते हैं वो कभी पूछी  ख़ैरियत, कभी बस चल देते हैं वो । रूठे को मनाना, है अजब श...
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मंगलवार, 11 मई 2010

142. सोई नहीं मर गई है रात (तुकांत) / soi nahin mar gai hai raat (tukaant)

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सोई नहीं मर गई है रात ******* भटककर बहुत, थक गई है रात आगोश में अपने ही, सोई है रात ।   किसी ने थपकी दे, सुलाया कभी वह नींद कहीं, छ...
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रविवार, 9 मई 2010

141. माँ की अन्तःपीड़ा / maa kee antah peeda (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 51)

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(यह रचना मैं तब लिखी थी जब मेरे पिता की मृत्यु के 20 साल पूरे हुए थे और   उस समय मेरी उम्र उतनी ही थी जितनी पिता की मृत्यु के समय मेरी माँ ...
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बुधवार, 5 मई 2010

140. मेरी यायावरी क्यों / meri yaayaavari kyon

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मेरी यायावरी क्यों ******* तुम्हारी गंध की तलाश में भटकती रही रेत के समंदर में पहरों तलाशती रही कभी आसमान तक गई कभी धरती से पूछी कभ...
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रविवार, 2 मई 2010

139. थोड़ा आराम चाहिए (क्षणिका) / thoda aaraam chaahiye (kshanika)

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थोड़ा आराम चाहिए ******* मेरे अल्फ़ाज़ को, मेरे जज़्बात को समझो तुम भी और ज़माना भी फ़क़त एहसास चाहिए, थोड़े लम्हात चाहिए क्या-क्या न ...
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रविवार, 25 अप्रैल 2010

138. 'शब' नहीं होगी (क्षणिका) / 'shab' nahin hogi (kshanika)

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'शब' नहीं होगी  ******* एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात भी होगी पर वो रात नहीं होगी एक दिन ऐसा होगा, रोज़ रात तो होगी पर रात की वो...
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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

137. ज़मींदोज़ हो गये कुछ अनकहे जज़्बात / zameendoz ho gaye kuchh ankahe jazbaat

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ज़मींदोज़ हो गए कुछ अनकहे जज़्बात ******* तुमने तो कह दिया, उस दिन मिले जब चोरी से, पहले दिन न आना लेकर आँसू, मेरे पास और न लाना, को...
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सोमवार, 19 अप्रैल 2010

136. ज़बह (मनोज-बबली हत्याकांड) / Zabah (Manoj-Babli hatyaakand)

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['मनोज-बबली हत्याकांड' में करनाल अदालत द्वारा (31.3.2010) ऐतिहासिक फ़ैसला (33 महीना, 41 गवाह, 76 पेशी के बाद) 5 अपराधी को सज़ा-ए-मौत...
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मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

135. होश न लेना (क्षणिका) / hosh na lena (kshanika)

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होश न लेना  ******* हर हँसी में एक व्यथा हर व्यथा की अपनी कथा अनगिनत राज़ दफ़न सीने में असंख्य वेदनाएँ ज़ब्त मन में डरती हूँ होश खो...
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सोमवार, 12 अप्रैल 2010

134. बेअसर (क्षणिका) / beasar (kshanika)

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बेअसर  ******* न पथराया मन, न बेजान हुआ तन न हो सकी अब तक मैं बेअसर  होता है मुझमें अब भी असर मेरे जीवित होने का प्रमाण है गोया जीवन जी...
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शनिवार, 10 अप्रैल 2010

133. मैं नज़्म बनती रही (तुकांत) / main nazm banti rahi (tukaant)

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मैं नज़्म बनती रही ******* ज़िन्दगी ढलती रही, मैं नज़्म बनती रही उनकी ख़्वाहिश पर, मैं ग़ज़ल बनती रही ।   रोज़ नयी सूरत कहाँ से लाऊँ...
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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

132. अब इन्तिज़ार नहीं / ab intizaar nahin

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'अब इन्तिज़ार है' ( कविता नं.- 131) की दूसरी कड़ी... अब इन्तिज़ार नहीं *** ज्यों मौसम ने करवट बदली लौट आए सब पखेरू प्रवासी दे...
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बुधवार, 31 मार्च 2010

131. अब इन्तिज़ार है / ab intizaar hai

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अब इन्तिज़ार है *** क्यों है ये संवादहीनता या है संवेदनहीनता पर जज़्बात तो अब भी वही जाने क्यों मुखरित होते नहीं ।   बेवक़्त खिंचा आ...
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सोमवार, 29 मार्च 2010

130. निशानी / nishaani (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 45)

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निशानी ******* वक़्त के सीने पर हम अपनी कहानी लिख जाएँगे किसी की यादों में हम अपनी निशानी छोड़ जाएँगे याद करोगे तो होठों की ख़ामोश...
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शुक्रवार, 26 मार्च 2010

129. हमसाया मिल गया (तुकांत) / humsaaya mil gaya (tukaant)

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हमसाया मिल गया ******* ख़्यालों में एक अजनबी, ले मेरा दिल गया सूरत तो न दिखी मगर, हमसाया मिल गया ।   उसकी तलब में अजब-सी मनहूसी छा ग...
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रविवार, 21 मार्च 2010

128. सपना मँगाती है (तुकांत) / sapna mangaati hai (tukaant)

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सपना मँगाती है ******* कुछ यादें सिमटी मुस्काती हैं कुछ बातें अनकही शर्माती हैं । ओ मीत पूछना कली से तुम क्यों ख़ुशबू पर यूँ इतराती ...
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127. धूप के बूटे / dhoop ke boote

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धूप के बूटे *** सफ़ेद चादर पर सुनहरे धूप के कुछ बूटे टँके थे जाने कौन-सी पीड़ा थी क्यों धूप के बूटे ठिठके थे? नहीं मालूम ये परी-दे...
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सोमवार, 8 मार्च 2010

126. नाइंसाफी क्यों / naainsaafi kyon

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नाइंसाफी क्यों ******* ख़ुदा से रूबरू पूछा मैंने - मर्द और औरत का ईजाद किया तुमने ख़ुद पत्थर में बसते हो क्या पत्थर की कठोरता नहीं ज...
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शुक्रवार, 5 मार्च 2010

125. क्या तुम दे सकोगे जवाब / kya tum de sakoge jawaab

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क्या तुम दे सकोगे जवाब ******* किससे माँगूँ मेरे रिसते आँसुओं का हिसाब मेरी काली रातों और धुँधले दिन का हिसाब कौन देगा मेरी अकथ्य अंत...
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मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

124. दिन को सुला दिया (क्षणिका) / din ko sula diya (kshanika)

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दिन को सुला दिया ******* रात बोली- दिन बीत रहा, क्यों मुझको जगा दिया? सकुचाया सा दिन बोला- मुझको नींद ने बुला लिया, उनींदी रात फिर बैठी ...
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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

123. लोग इश्क करते नहीं हैं (तुकांत) / Log ishq karte nahin hain (tukaant)

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लोग इश्क करते नहीं हैं ******* अँधियारे से कैसे लड़ें, चिराग जलते नहीं हैं होती जहाँ रोशनी, वो दरवाज़े खुलते नहीं हैं ।     अपनी बदह...
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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

122. सच हो सकता नहीं (तुकांत) / sach ho sakta nahin (tukaant)

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सच हो सकता नहीं ******* सत्य जो कभी सच हो सकता नहीं काफ़िला ख़्वाबों का, पर रुकता नहीं ।     ज़िन्दगी चाहती है एक हसीन लम्हा क्यों ...
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मंगलवार, 26 जनवरी 2010

121. इमरोज़ से (तुकांत) / Imroz se (tukaant)

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इमरोज़ से ******* इमरोज़ से अक्सर, मैं अपने जवाब पूछती रही हूँ शायद उनके तजुर्बों में, ज़िन्दगी तलाशती रही हूँ ।     इश्क़ क्या और ज़...
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शनिवार, 23 जनवरी 2010

120. एक भ्रम चाहिए / ek bhram chaahiye

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एक भ्रम चाहिए *** मैं अभागन जान न सकी तुमको तुमने ही कब सुध ली हमारी नहीं सोचा कैसे रह रही होऊँगी  छोड़ दिया इस असार संसार में स्वय...
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बुधवार, 20 जनवरी 2010

119. क़र्ज़ चुकता कर लेने दे (तुकांत) / karz chukta kar lene de (tukaant)

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क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ******* जाने फिर वक़्त इतनी मोहलत दे कि न दे होश में हूँ अभी सब क़र्ज़ चुकता कर लेने दे ।   इल्म ही कहाँ कि ...
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मंगलवार, 19 जनवरी 2010

118. ओशो / Osho

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ओशो ******* ओ ओशो! न तुम मेरे गुरु, न तुम मेरे ख़ुदा हो तुम मेरे सखा, जैसे कोई मेरा अपना ।     तुम कहते हो - पहले ख़ुद को पहचानो, ...
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सोमवार, 18 जनवरी 2010

117. ताजमहल वीराना भी देखना (तुकांत) / tajmahal veeraana bhi dekhna (tukaant)

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ताजमहल वीराना भी देखना ******* फ़ुर्सत में इक रोज़ कभी ये ज़माना भी देखना इक शाहजहाँ का ताजमहल वीराना भी देखना ।   न कहना यूँ चुपके से...
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रविवार, 17 जनवरी 2010

116. मेरा मन / mera mann

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मेरा मन ******* हर राह पर बैठा एक साया जाने किसको ढूँढ़ता है मन रोशनी मिली ही कब थी कभी क्यों अँधियारों से डरता है मन ।     अंतहीन...
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गुरुवार, 14 जनवरी 2010

115. दिल में चाँद इक उतरता है कोई (तुकांत) / dil mein chaand ik utarta hai koi (tukaant)

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दिल में चाँद इक उतरता है कोई ******* हर्फ़-हर्फ़ ज़िन्दगी लिखता है कोई ख़्वाब हसीन रोज़ बुनता है कोई ।   उसकी ज़िन्दगी में शामिल नहीं ...
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सोमवार, 11 जनवरी 2010

114. मेरी उपलब्धि / meri uplabdhi

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मेरी उपलब्धि ******* सब कहते मेरी उपलब्धियों की फ़ेहरिस्त बड़ी लम्बी है ।   अक्सर सोचती हूँ क्या होती है उपलब्धि? क्या है मेरी उपल...
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रविवार, 10 जनवरी 2010

113. याद तुम्हें ज़रा नहीं (तुकांत) / yaad tumhein zaraa nahin (tukaant)

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याद तुम्हें ज़रा नहीं ******* एक शाम हो सिर्फ़ मेरी, चाह है कोई ख़ता नहीं इश्क़ की कहानी तुमने कही, याद तुम्हें ज़रा नहीं ।     अमावास...
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112. सूरज को पा लूँ / sooraj ko paa loon

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सूरज को पा लूँ ******* चाँद को पाने की ख़्वाहिश तो फिर भी है मुमकिन, सूरज को चाहे कि पा लूँ तो अंजाम जाने क्या हो ।     दूर जो है स...
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

111. ख़ुशबयानी कहो (अनुबन्ध/तुकान्त) / khushbayaani kaho (Anubandh/Tukaant)

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ख़ुशबयानी कहो *** ख़ुशनुमा यादें आज कोई पुरानी कहो क्षितिज में हो उत्सव बात रूहानी कहो ।     सतरंगी किरणों-सी हो सबकी सुबह दुनिया न...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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