लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 8 मार्च 2014

445. किसे लानत भेजूँ

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किसे लानत भेजूँ ******* किस एहसास को जीऊँ आज? ख़ुद को बधाई दूँ  या लानत भेजूँ उन सबको  जो औरत होने पर गुमान करती हैं   और सबसे छुपकर हर रोज़...
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रविवार, 2 मार्च 2014

444. थम ही जा

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थम ही जा ******* जैसे-जैसै मन सिकुड़ता गया जिस्म और ज़रुरतें भी सिकुड़ती गईं ऐसा नहीं कि कोई चाह नहीं पर हर चाह को समेटना,  रीत ...
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शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

443. बेपरवाह मौसम

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बेपरवाह मौसम *******  कुछ मौसम    जाने कितने बेपरवाह हुआ करते हैं    बिना हाल पूछे, चुपके से गुज़र जाते हैं    भले ही मैं उसकी ज़र...
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गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

442. वसंत ऋतु (वसंत ऋतु पर 4 हाइकु) पुस्तक - 51

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वसंत ऋतु ******* 1. हवा बसंती  उड़ाकर ले गई  सोच ठिठुरी ।    2.   बसंती फूल  चहुँ ओर हैं खिले  ऋतु ने दिए ।   3.   ...
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मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

441. हे श्वेताम्बरा (सरस्वती पूजा पर 3 हाइकु) पुस्तक - 50

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हे श्वेताम्बरा   ******* 1. ज्ञान विवेक, हे श्वेताम्बरा आओ जगत को दो ।  2. पीली धरती अगवानी करती माँ शारदा की ।  3...
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गुरुवार, 30 जनवरी 2014

440. तेज़ाब की नदी (पुस्तक 102)

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तेज़ाब की नदी ******* मैं तेज़ाब की एक नदी हूँ  पल-पल में सौ-सौ बार  ख़ुद ही जली हूँ अपनी आँखों से, अनवरत बहती हुई अपना ही लहू...
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शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

439. निर्लज्जता

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निर्लज्जता ******* स्वीकार है मुझे  मेरी निर्लज्जता आज दिखाया है  भरी भीड़ को मैंने अपने वो सारे अंग जिसे छुपाया था  जन्म से अब...
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बुधवार, 22 जनवरी 2014

438. उफ़! माया

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उफ़! माया ******* "मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है...  मेरा वो सामान लौटा दो...!" 'इजाज़त' की 'माया'...
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सोमवार, 20 जनवरी 2014

437. पूर्ण विराम (क्षणिका)

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पूर्ण विराम ******* एक पूरा वजूद, धीमे-धीमे जलकर  राख़ में बदलके चेतावनी देता-  यही है अंत, सबका अंत मुफ़लिसी में जियो या करोड़ो...
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मंगलवार, 14 जनवरी 2014

436. पूरा का पूरा (क्षणिका)

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पूरा का पूरा  ******* तेरे अधूरेपन को  अपना पूरा दे आई यूँ लगा  मानो दुनिया पा गई पर अब जाना  तेरा आधा भी  तेरा नहीं था   फिर तू...
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मंगलवार, 7 जनवरी 2014

435. जजमेंटल

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जजमेंटल ******* गुज़रे हो तुम सभी इसी दौर से कभी फिर नई नस्लों के लिए नई फ़सलों के लिए क्योंकर  एकपक्षीय हो जाते हो क्यो...
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शनिवार, 4 जनवरी 2014

434. आँचल में मौसम

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आँचल में मौसम ******* तमाम रास्ते बिखरे पत्ते सूखे चरमराते हुए  अपने अंत की कहानी कह रहे थे   मुर्झाए फूल अपनी शाख से गिरकर ...
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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

433. ये साल नया (नव वर्ष पर 6 हाइकु) पुस्तक 50

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ये साल नया ******* 1. सौग़ात लाया झोली में भरकर, ये साल नया । 2. अतीत छुपा, नए साल का देख पिटारा नया । 3. फिर से ख...
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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

432. अतीत के जो पन्ने (चोका - 6)

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अतीत के जो पन्ने    *** याद दिलाए  अतीत के जो पन्ने   फड़फड़ाए खट्टी-मीठी-सी यादें पन्नों से झरे   इधर-उधर को बिखर गए ...
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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

431. मन (10 हाइकु) पुस्तक 49,50

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मन  ******* 1. मन में बसी धूप सीली-सीली-सी ठंडी-ठंडी सी। 2. भटका मन सवालों का जंगल सब है मौन। 3. शाख से टूटे उदा...
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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

430. प्रीत (7 हाइकु) पुस्तक - 48, 49

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प्रीत *******  1. प्रीत की डोरी ख़ुद ही थी जो बाँधी ख़ुद ही तोड़ी। 2. प्रीत रुलाए मन को भरमाए पर टूटे न। 3 . प्रीत की राह...
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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

429. फिर आता नहीं

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फिर आता नहीं ******  जाने कब आएगा,  मेरा वक़्त    जब पंख मेरे और परवाज़ मेरी    दुनिया की सारी सौग़ात मेरी    फूलों की खुशबू, तारों...
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बुधवार, 11 दिसंबर 2013

428. ज़िन्दगी की उम्र (पुस्तक - 97)

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ज़िन्दगी की उम्र ******* लौट आने की ज़िद,  अब न करो यही मुनासिब है,  क्योंकि कुछ रास्ते वापसी के लिए बनते ही नहीं हैं,   इन राह...
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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

427. ज़िन्दगी लिख रही हूँ

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ज़िन्दगी लिख रही हूँ ******* लकड़ी के कोयले से  आसमान पर ज़िन्दगी लिख रही हूँ  उन सबकी  जिनके पास शब्द तो हैं  पर लिखने की आज़ा...
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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

426. जी उठे इन्सानियत

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जी उठे इन्सानियत *** कभी तफ़्सील से करेंगे,  रूमानी ज़ीस्त के चर्चे अभी तो चल रही है  नाज़ुक, लहूलुहान हवा डगमगाती,  थरथराती,  घबराती इसे सँभा...
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गुरुवार, 21 नवंबर 2013

425. साँसों की लय (चोका - 5)

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साँसों की लय   *** साँसें ज़िन्दगी  निरन्तर चलती  ज़िंदा होने का    मानो फ़र्ज़ निभाती,  साँसों की लय  है हिचकोले खाती     ब...
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शनिवार, 16 नवंबर 2013

424. जन्म-नक्षत्र

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जन्म-नक्षत्र ******* सारे नक्षत्र अपनी-अपनी जगह आसमान में देदीप्यमान थे कहीं संकट के कोई चिह्न नहीं ग्रहों की दशा विपरीत नहीं...
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सोमवार, 11 नवंबर 2013

423. खिड़कियाँ

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खिड़कियाँ  ***  अभेद दीवारों से झाँकती    कभी बंद, कभी खुलती    जाने क्या-क्या सोचती है खिड़की    शहर का हाल,  मोहल्ले का सरोकार...
4 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 2 नवंबर 2013

422. दीप-दीपाली (दीपावली पर 18 हाइकु) पुस्तक 46-48

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दीप-दीपाली  ******* 1. उतरे नीचे नक्षत्र आसमाँ के ज़मीन पर । 2. लौटे प्रवासी त्योहार का मौसम सजी दीवाली । 3. राम प्रवासी ...
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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

421. ज़िन्दगी (21 हाइकु) पुस्तक 44-46

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ज़िन्दगी ******* 1. लम्हों की लड़ी एक-एक यूँ जुड़ी ज़िन्दगी ढली। 2. गुज़र गई जैसे साज़िश कोई तमाम उम्र। 3. ताकती रही जी...
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सोमवार, 30 सितंबर 2013

420. क्या बिगड़ जाएगा

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क्या बिगड़ जाएगा *** गहराती शाम के साथ   मन में धुक-धुकी समा जाती है  सब ठीक तो होगा न  कोई मुसीबत तो न आई होगी  कहीं कुछ ग़...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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