लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

468. जीवन-बोध (शिक्षक दिवस पर 10 हाइकु) पुस्तक 60,61

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जीवन-बोध  ******* 1. गुरु से सीखा  बिन अँगुली थामे   जीवन-बोध ।    2. बढ़ता तरु,   माँ है प्रथम गुरु   पाकर ज्ञान ।    ...
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गुरुवार, 4 सितंबर 2014

467. गाँव (गाँव पर 20 हाइकु)

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गाँव    *** 1. माटी का तन   माटी में ही खिलता   जीवन जीता ।    2. गोबर-पुती  हर मौसम सहे  झोपड़ी तनी ।    3. अपनापन  बस यहीं...
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सोमवार, 1 सितंबर 2014

466. घर आ जा न (बारिश के 8 हाइकु) पुस्तक 57, 58

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घर आ जा न  ******* 1. बरसा नहीं  भटक-भटकके  थका बादल ।    2. घूँघट काढ़े   घटा में छुपकर   सूर्य शर्माए ।    3. ...
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मंगलवार, 26 अगस्त 2014

465. जी चाहता है (7 क्षणिकाएँ)

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जी चाहता है ******* 1. जी चाहता है   तुम्हारे साथ बीताई  सभी यादों को   धधकते चूल्हे में झोंक दूँ  और फिर पानी डाल दूँ   ताकि चि...
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

464. आज़ादी की बात

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आज़ादी की बात *** आज़ादी की बाबत पूछते हो  मानो सीने के ज़ख़्म कुरेदते हो  लौ ही नहीं जलती  तो  उजाले की लकीर कहाँ दिखेगी  अँधेरों की सरपरस्...
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शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

463. फ़ना हो जाऊँ (तुकांत)

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फ़ना हो जाऊँ ******* मन चाहे बस सो जाऊँ   तेरे सपनों में खो जाऊँ ।     सब तो छोड़ गए हैं तुमको    पर मैं कैसे बोलो जाऊँ ।   ...
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शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

462. चकरघिन्नी (क्षणिका)

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चकरघिन्नी *******  चकरघिन्नी-सी  घूमती-घूमती  ज़िन्दगी  जाने किधर चल पड़ती है सब कुछ वही,  वैसे ही  जैसे ठहरा हुआ-सा,  मेरे वक़्त-सा ...
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सोमवार, 7 जुलाई 2014

461. इम्म्युन

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इम्म्युन ******* पूरी की पूरी बदल चुकी हूँ अब तक ग़ैरों से छुपती थी अब ख़ुद से बचती हूँ अपने वजूद को अलमारी के उस दराज़ में रख द...
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मंगलवार, 1 जुलाई 2014

460. स्मृतियाँ शूल (10 हाइकु)

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स्मृतियाँ शूल  ******* 1. तय हुआ है- मौसम बदलेगा बर्फ़ जलेगी। 2. लेकर चली चींटियों की क़तार मीठा पहाड़। 3. तमाम रात धक...
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शुक्रवार, 27 जून 2014

459. कैनवस

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कैनवस *** एक कैनवस कोरा-सा    जिस पर भरे मैंने अरमानों के रंग   पिरो दिए अपनी कामनाओं के बूटे   रोप दिए अपनी ख़्वाहिशों के पंख   और चाहा कि ...
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रविवार, 25 मई 2014

458. हादसा

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हादसा ******* हमारा मिलना  हर बार एक हादसे में तब्दील हो जाता है  हादसा, जिससे दूसरों का कुछ नहीं बिगड़ता  सिर्फ़ हमारा-तुम्हारा...
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मंगलवार, 20 मई 2014

457. दुआ के बोल (दुआ पर 5 हाइकु) पुस्तक 56

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दुआ के बोल ******* 1.  फूले व फले बगिया जीवन की   जन-जन की ।  2. दुआ के बोल  ब्रह्माण्ड में गूँजते  तभी लगते ।     ...
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मंगलवार, 13 मई 2014

456. पैसा (15 हाइकु) पुस्तक 54-56

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पैसा   ******* 1. पैसे  ने छीने रिश्ते नए पुराने पैसा  बेदिल। 2. पैसा  गरजा ग़ैर बने अपने रिश्ता बरसा। 3. पैसे  की वर्षा भा...
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रविवार, 11 मई 2014

455. अवसाद के क्षण

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अवसाद के क्षण *** अवसाद के क्षण  वैसे ही लुढ़क जाते हैं  जैसे कड़क धूप के बाद शाम ढलती है जैसे अमावास के बाद चाँदनी खिलती है  जैसे...
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गुरुवार, 1 मई 2014

454. शासक (पुस्तक -78)

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शासक ******* इतनी क्रूरता,  कैसे उपजती है तुममें? कैसे रच देते हो, इतनी आसानी से चक्रव्यूह  जहाँ तिलमिलाती हैं, विवशताएँ और ग...
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सोमवार, 28 अप्रैल 2014

453. गुमसुम ये हवा (स्त्री पर 7 हाइकु) पुस्तक 54

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गुमसुम ये हवा  ******* 1. गाती है गीत गुमसुम ये हवा नारी की व्यथा ।  2. रोज़ सोचती बदलेगी क़िस्मत हारी औरत ।  3. ख़ूब हँसती ख़ुद ...
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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

452. बहुरुपिया (5 ताँका)

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बहुरुपिया  *** 1. हवाई यात्रा करता ही रहता मेरा सपना न पहुँचा ही कहीं न रुकता ही कभी।  2. बहुरुपिया कई रूप दिखाए सच छ...
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रविवार, 20 अप्रैल 2014

451. मतलब

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मतलब ******* छोटे-छोटे दुःख सुनना न मुझे पसंद है न तुम्हें यूँ तुमने कभी मना नहीं किया कि न बताऊँ  पर जिस अनमने भाव से सब सु...
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गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

450. चाँद-चाँदनी (चाँद पर 7 हाइकु) पुस्तक 53,54

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चाँद-चाँदनी ******* 1. तप करता श्मशान में रात को अघोरी चाँद ।  ! 2. चाँद न आया इंतज़ार करती रात परेशाँ ।  3. वादा...
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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

449. समय-रथ (समय पर 4 हाइकु) पुस्तक 53

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समय-रथ  ******* 1. रोके न रुके  अपनी चाल चले  समय-रथ ।  2. न देख पीछे  सब अपने छूटे यही है सच ।  3.   नहीं फू...
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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

448. पात झरे यूँ (पतझर पर 10 हाइकु) पुस्तक 52,53

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पात झरे यूँ  ******* 1. पात झरे यूँ  तितर-बितर  ज्यूँ  चाँदनी गिरे। 2. पतझर ने   छीन लिए लिबास गाछ उदास । 3. शैतान...
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मंगलवार, 18 मार्च 2014

447. कुछ ख़त

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कुछ ख़त ******* मुद्दतों बाद तेरा ख़त मिला जिसपर तुम्हारा पता नहीं रोशनाई ज़रा-ज़रा पसरी हुई  हर्फ़ ज़रा-ज़रा भटके हुए तुमने प्या...
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446. फगुआ रंग (होली पर 7 हाइकु) पुस्तक 51, 52

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फगुआ रंग  ******* 1. फगुआ रंग मन हुआ मलंग गाए तरंग। 2. चटख रंग अंग-अंग में लगे मन बहके । 3. हवाएँ झूमी    आसमा...
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शनिवार, 8 मार्च 2014

445. किसे लानत भेजूँ

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किसे लानत भेजूँ ******* किस एहसास को जीऊँ आज? ख़ुद को बधाई दूँ  या लानत भेजूँ उन सबको  जो औरत होने पर गुमान करती हैं   और सबसे छुपकर हर रोज़...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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