लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

476. उम्र के छाले (12 हाइकु)

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उम्र के छाले   *** 1. उम्र की भट्टी  अनुभव के भुट्टे  मैंने पकाए।  2. जग ने दिया  सुकरात-सा विष  मैंने जो पिया।  3. मैंने ...
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गुरुवार, 20 नवंबर 2014

475. इंकार है

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इंकार है  *******  तूने कहा    मैं चाँद हूँ    और ख़ुद को आफ़ताब कहा ।    रफ़्ता-रफ़्ता    मैं जलने लगी    और तू बेमियाद बुझने लग...
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सोमवार, 17 नवंबर 2014

474. कोई तो दिन होगा

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कोई तो दिन होगा ***  कोई तो दिन होगा  जब गीत आज़ादी के गाऊँगी  बीन बजाते भौंरे नाचेंगे  मैं पराग-सी बिखर जाऊँगी   आसमाँ में सूरज दमकेगा  मैं...
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शनिवार, 1 नवंबर 2014

473. तारों का बाग़ (दिवाली के 8 हाइकु) पुस्तक 66,67

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तारों का बाग़    ******* 1. तारों के गुच्छे  ज़मीं पे छितराए  मन लुभाए ।   2. बिजली जली   दीपों का दम टूटा   दीवाली सजी।  3. ता...
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सोमवार, 20 अक्टूबर 2014

472. कविता (कविता पर 20 हाइकु) पुस्तक 64-66

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कविता  ******* 1.  कण-कण में   कविता सँवरती   संस्कृति जीती।  2. अकथ्य भाव  कविता पनपती  खुलके जीती।   3. अक्सर रोती   ग़ै...
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शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

471. रंग-बेरंग

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रंग *** काजल थककर बोला- मुझसे अब और न होगा  नहीं छुपा सकता उसकी आँखों का सूनापन, बिंदिया सकुचा कर बोली- चुक गई मैं  उसे सँवारक...
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शनिवार, 27 सितंबर 2014

470. दूध-सी हैं लहरें (हाइगा लेखन का प्रथम प्रयास- 8 हाइगा)

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दूध-सी हैं लहरें  (हाइगा लेखन का प्रथम प्रयास- 8 हाइगा) *** 1.  सूरज झाँका  *** सूरज झाँका-  सागर की आँखों में  रूप सुहान...
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शनिवार, 20 सितंबर 2014

469. सागर तीरे (30 हाइकु)

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सागर तीरे  *** 1.  दम तोड़ती  भटकती लहरें  सागर तीरे।  2.  सफ़ेद रथ  बढ़ता बिना पथ  रेत में गुम।  3.  उमंग-भरी  लहरें मचल...
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शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

468. जीवन-बोध (शिक्षक दिवस पर 10 हाइकु) पुस्तक 60,61

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जीवन-बोध  ******* 1. गुरु से सीखा  बिन अँगुली थामे   जीवन-बोध ।    2. बढ़ता तरु,   माँ है प्रथम गुरु   पाकर ज्ञान ।    ...
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गुरुवार, 4 सितंबर 2014

467. गाँव (गाँव पर 20 हाइकु)

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गाँव    *** 1. माटी का तन   माटी में ही खिलता   जीवन जीता ।    2. गोबर-पुती  हर मौसम सहे  झोपड़ी तनी ।    3. अपनापन  बस यहीं...
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सोमवार, 1 सितंबर 2014

466. घर आ जा न (बारिश के 8 हाइकु) पुस्तक 57, 58

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घर आ जा न  ******* 1. बरसा नहीं  भटक-भटकके  थका बादल ।    2. घूँघट काढ़े   घटा में छुपकर   सूर्य शर्माए ।    3. ...
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मंगलवार, 26 अगस्त 2014

465. जी चाहता है (7 क्षणिकाएँ)

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जी चाहता है ******* 1. जी चाहता है   तुम्हारे साथ बीताई  सभी यादों को   धधकते चूल्हे में झोंक दूँ  और फिर पानी डाल दूँ   ताकि चि...
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

464. आज़ादी की बात

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आज़ादी की बात *** आज़ादी की बाबत पूछते हो  मानो सीने के ज़ख़्म कुरेदते हो  लौ ही नहीं जलती  तो  उजाले की लकीर कहाँ दिखेगी  अँधेरों की सरपरस्...
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शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

463. फ़ना हो जाऊँ (तुकांत)

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फ़ना हो जाऊँ ******* मन चाहे बस सो जाऊँ   तेरे सपनों में खो जाऊँ ।     सब तो छोड़ गए हैं तुमको    पर मैं कैसे बोलो जाऊँ ।   ...
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शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

462. चकरघिन्नी (क्षणिका)

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चकरघिन्नी *******  चकरघिन्नी-सी  घूमती-घूमती  ज़िन्दगी  जाने किधर चल पड़ती है सब कुछ वही,  वैसे ही  जैसे ठहरा हुआ-सा,  मेरे वक़्त-सा ...
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सोमवार, 7 जुलाई 2014

461. इम्म्युन

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इम्म्युन ******* पूरी की पूरी बदल चुकी हूँ अब तक ग़ैरों से छुपती थी अब ख़ुद से बचती हूँ अपने वजूद को अलमारी के उस दराज़ में रख द...
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मंगलवार, 1 जुलाई 2014

460. स्मृतियाँ शूल (10 हाइकु)

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स्मृतियाँ शूल  ******* 1. तय हुआ है- मौसम बदलेगा बर्फ़ जलेगी। 2. लेकर चली चींटियों की क़तार मीठा पहाड़। 3. तमाम रात धक...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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