लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

558. हिसाब-किताब के रिश्ते (तुकांत)

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हिसाब-किताब के रिश्ते   *******   दिल की बातों में ये हिसाब-किताब के रिश्ते   परखते रहे कसौटी पर बेकाम के रिश्ते ।   वक़्त के छ...
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शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

557. सूरज की पार्टी (11 बाल हाइकु) पुस्तक 93,94

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सूरज की पार्टी   ******* 1.   आम है आया   सूरज की पार्टी में   जश्न मनाया ।      2.   फलों का राजा   शान से मुस्कुरात...
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रविवार, 27 अगस्त 2017

556. बादल राजा (बरसात पर 10 हाइकु) पुस्तक 92, 93

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बादल राजा    *******   1.   ओ मेघ राजा   अब तो बरस जा   भगा दे गर्मी ।      2.   बदली रानी   झूम-झूम बरसी   ना...
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मंगलवार, 15 अगस्त 2017

555. कैसी आज़ादी पाई (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु) पुस्तक - 91, 92

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कैसी आज़ादी पाई   *******   1.   मन है क़ैदी,   कैसी आज़ादी पाई?   नहीं है भायी ।      2.   मन ग़ुलाम   सर्वत्र कोहर...
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बुधवार, 9 अगस्त 2017

554. सँवार लूँ (क्षणिका)

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सँवार लूँ *******   मन चाहता है   एक बोरी सपनों के बीज   मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ   मनचाहे सपने उगा  ज़िन्दगी सँवार लूँ। ...
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सोमवार, 7 अगस्त 2017

553. रिश्तों की डोर (राखी पर 10 हाइकु) पुस्तक - 90, 91

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रिश्तों की डोर   *******   1.   हो गए दूर   सम्बन्ध अनमोल   बिके जो मोल ।     2.   रक्षा का वादा   याद दिलाए राखी...
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सोमवार, 17 जुलाई 2017

552. मुल्कों की रीत है (तुकांत)

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मुल्कों की रीत है   ******* कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है ।  मज़हब व भ...
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शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

551. उदासी (क्षणिका)

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उदासी   *******   ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते   ज़बरन साँसों की आवाजाही   काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!   - जेन्नी शबनम (7....
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शनिवार, 1 जुलाई 2017

550. ज़िद (क्षणिका)

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ज़िद *******   एक मासूम सी ज़िद है-   सूरज तुम छुप जाओ   चाँद तुम जागते रहना   मेरे सपनों को आज   ज़मीं पर है उतरना।  -...
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शुक्रवार, 30 जून 2017

549. धरा बनी अलाव (गर्मी के 10 हाइकु)

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धरा बनी अलाव   ***   1.   दोषी है कौन?   धरा बनी अलाव,   हमारा कर्म ।      2.   आग उगल   रवि गर्व से बोला-   स...
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रविवार, 25 जून 2017

548. फ़ौजी-किसान (19 हाइकु)

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फ़ौजी-किसान   ***   1.   कर्म पे डटा   कभी नहीं थकता   फ़ौजी-किसान ।      2.   किसान हारे   ख़ुदकुशी करते,   बेबस सा...
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गुरुवार, 1 जून 2017

547. मर गई गुड़िया

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मर गई गुड़िया   *******   गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया   ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया   ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िय...
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शनिवार, 13 मई 2017

546. तहज़ीब (क्षणिका)

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तहज़ीब *******   तहज़ीब सीखते-सीखते   तमीज़ से हँसने का शऊर आ गया   तमीज़ से रोने का हुनर आ गया   न आया तो तहज़ीब और तमीज़ से  ...
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गुरुवार, 11 मई 2017

545. हमारी माटी (गाँव पर 20 हाइकु)

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हमारी माटी     ***   1.   किरणें आईं    खेतों को यूँ जगाती    जैसे हो माई।   2.   सूरज जागा   पेड़-पौधे मुस्काए   ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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