लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

रविवार, 5 अगस्त 2018

581. अनछुई-सी नज़्म (क्षणिका)

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अनछुई-सी नज़्म    *******    कुछ कहो कि सन्नाटा भाग जाए    चुप्पियों को लाज आ जाए    अँधेरों की तक़दीर में भर दो रोशनाई से रंग...
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शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

580. प्रकृति (प्रकृति पर 12 सेदोका)

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प्रकृति     ***   1.    अपनी व्यथा    गुमसुम प्रकृति    किससे वो कहती    बेपरवाह    कौन समझे दर्द    सब स्वयं में व्...
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रविवार, 22 जुलाई 2018

579. तपता ये जीवन (10 ताँका)

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तपता ये जीवन  ***    1.    अँजुरी भर    सुख की छाँव मिली    वह भी छूटी    बच गया है अब    तपता ये जीवन।    2.    कि...
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बुधवार, 18 जुलाई 2018

578. उनकी निशानी (पुस्तक - 49)

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उनकी निशानी   *******   आज भी रखी हैं, बहुत सहेजकर   अतीत की कुछ यादें   कुछ निशानियाँ   कुछ सामान   टेबल, कुर्सी, पलंग, ब...
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मंगलवार, 10 जुलाई 2018

577. रंगरेज़ हमारा (चोका - 2)

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रंगरेज़ हमारा    ***   सुहानी संध्या    डूबने को सूरज    देखो नभ को  नारंगी रंग फैला    मानो सूरज    एक बड़ा संतरा,  ...
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गुरुवार, 5 जुलाई 2018

576. भाषा व भाव (चोका - 4)

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भाषा व भाव    ***   भाषा-भाव का    आपसी नाता ऐसे    शरीर-आत्मा    पूरक होते जैसे,    भाषा व भाव    ज्यों धरती-गगन    चाँ...
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शुक्रवार, 22 जून 2018

575. परवरिश

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परवरिश   ***   कहीं पथरीली, कहीं कँटीली   यथार्थ की ज़मीन बंजर होती है   जहाँ ख़्वाहिशों के फूल उगाना   न सहज होता है, न सरल   ...
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रविवार, 13 मई 2018

574. प्यारी-प्यारी माँ (माँ पर 10 हाइकु) पुस्तक 96, 97

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प्यारी-प्यारी माँ     *******    1.    माँ की ममता    नाप सके जो कोई    नहीं क्षमता।    2.    अम्मा के बोल    होते ह...
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मंगलवार, 1 मई 2018

573. ऐसा क्यों जीवन

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ऐसा क्यों जीवन     *** ये कैसा सहर है    ये कैसा सफ़र है    रात-सा अँधेरा, जीवन का सहर है    उदासी पसरा, जीवन का सफ़र है।     सुबह से शाम बीत...
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बुधवार, 18 अप्रैल 2018

572. विनती (क्षणिका)

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विनती    *******    समय की शिला पर    जाने किस घड़ी लिखी जीवन की इबारत मैंने    ताउम्र मैं व्याकुल रही और वक़्त तड़प गया    वक़्त को पक...
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गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

571. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (पुस्तक- 69)

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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ   *******    वो कहते हैं-    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।    मेरे भी सपने थे,  बेटी को पढ़ाने के    किसी राजकुम...
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शनिवार, 31 मार्च 2018

570. कैक्टस (पुस्तक - 71)

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कैक्टस   *******   एक कैक्टस मुझमें भी पनप गया है   जिसके काँटे चुभते हैं मुझको   और लहू टपकता है   चाहती हूँ,  हँसू खिलखिला...
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रविवार, 18 मार्च 2018

569. ज़िद्दी मन (क्षणिका)

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ज़िद्दी मन   *******   ज़िद्दी मन ज़िद करता है  जो नहीं मिलता वही चाहता है   तारों से भी दूर मंज़िल ढूँढता है   यायावर-सा भटकता है   ज़...
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गुरुवार, 8 मार्च 2018

568. पायदान (क्षणिका)

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पायदान   *******   सीढ़ी की पहली पायदान हूँ मैं   जिसपर चढ़कर  समय ने छलाँग मारी   और चढ़ गया आसमान पर   मैं ठिठककर तब से खड़ी   काल-चक्र...
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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

567. मरघट (क्षणिका)

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मरघट   *******   रिश्तों के मरघट में चिता है नातों की   जीवन के संग्राम में दौड़ है साँसों की   कब कौन बढ़े कब कौन थमे   कोल...
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गुरुवार, 18 जनवरी 2018

566. अँधेरा (क्षणिका)

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अँधेरा  *******    उम्र की माचिस में ख़ुशियों की तीलियाँ   एक रोज़ सारी जल गईं, डिबिया ख़ाली हो गई   मैं आधे पायदान पर खड़ी होकर   हर...
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रविवार, 7 जनवरी 2018

565. धरातल

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धरातल    ***   ग़ैरों की दास्ताँ क्यों सुनूँ?   अपनी राह क्यों न बनाऊँ?   जो पसन्द, बस वही क्यों न करूँ?   दूसरों के कहे से जीवन क्यों जीऊँ...
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गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

564. हाइकु काव्य (हाइकु पर 10 हाइकु) पुस्तक 95, 96

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हाइकु काव्य     *******   1.   मन के भाव   छटा जो बिखेरते   हाइकु होते।   2.   चंद अक्षर   सम्पूर्ण गाथा गहे   हाइकु प्यार...
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गुरुवार, 16 नवंबर 2017

563. यक़ीन (क्षणिका)

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यक़ीन *******     मुझे यक़ीन है   एक दिन बंद दरवाज़ों से निकलेगी  सुबह की किरणों का आवभगत करेगी  रात की चाँदनी में नहाएगी, कोई ...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 14 नवंबर 2017

562. फ़्लाइओवर

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फ़्लाइओवर   ***   एक उम्र नहीं, एक रिश्ता नहीं   कई किस्तों में, कई हिस्सों में   बीत जाता है जीवन   किसी फ़्लाइओवर के नीचे   प्लास्टिक के क...
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मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017

561. दीयों की पाँत (दिवाली के 10 हाइकु) पुस्तक- 94,95

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दीयों की पाँत  ***   1.   तम हरता   उजियारा फैलाता   मन का दीया ।      2.   जाग्रत हुई   रोशनी में नहाई   दिवाली-रात ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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