लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

सोमवार, 11 जनवरी 2021

708. आकुल (5 माहिया)

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आकुल  *******  1.  जीवन जब आकुल है    राह नहीं दिखती    मन होता व्याकुल है।    2.  हर बाट छलावा है    चलना ही होगा    पग-पग पर लावा है।    3...
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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

707. कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर

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कम्फर्ट ज़ोन से बाहर  ***  कम्फर्ट ज़ोन से बाहर    जोखिमों की लम्बी क़तार को    बच-बचाकर लाँघ जाना    क्या इतना आसान है    बिना लहूलुहान पार ...
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मंगलवार, 5 जनवरी 2021

706. कहानियाँ (5 क्षणिका)

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कहानियाँ   ******* 1. कहानी  *** कहानी में मैं मुझमें ही कहानी    कहता कौन सुनता कौन    पन्नों पर रच दी कहानी    और मैं बन गई इतिहास। 2. छोट...
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शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

705. नूतन वर्ष (10 हाइकु)

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नूतन वर्ष *** 1.  दसों दिशाएँ    करती हैं स्वागत    नूतन वर्ष।    2.  देकर दुःख    बीता पुराना साल    बेवफ़ा जैसे।    3.  आई द्वार पे    उम्म...
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

704. मुट्ठी से फिसल गया

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मुट्ठी से फिसल गया  *** निःसन्देह बीता कल नहीं लौटेगा    जो बिछड़ गया अब नहीं मिलेगा    फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस    शायद मिल जाए वापस    जो ...
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रविवार, 20 दिसंबर 2020

703. तकरार

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तकरार  ***  आत्मा और बदन में तकरार जारी है   बदन छोड़कर जाने को आत्मा उतावली है    पर बदन हार नहीं मान रहा    आत्मा को मुट्ठी से कसकर भींचे ...
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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

702. गंगा (20 हाइकु)

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 गंगा  *** 1.  चल पड़ी हूँ    सागर से मिलने    गंगा  के संग।    2.  जीवन  गंगा    सागर यों ज्यों क़ज़ा    अन्तिम सत्य।    3.  मुक्ति है देती  ...
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रविवार, 13 दिसंबर 2020

701. पत्थर या पानी

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पत्थर या पानी  ***   मेरे अस्तित्व का प्रश्न है   मैं पत्थर बन चुकी या पानी हूँ?     पत्थरों से घिरी, मैं जीवन भूल चुकी हूँ    शायद पत्थर बन...
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बुधवार, 2 दिसंबर 2020

700. स्त्री हूँ (10 क्षणिका)

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स्त्री हूँ  *******  1. स्त्री हूँ  ***  स्त्री हूँ, वजूद तलाशती    अपना एक कोना ढूँढती    अपनों का ताना-बाना जोड़ती    यायावरता मेरी पहचान ...
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बुधवार, 25 नवंबर 2020

699. दागते सवाल

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दागते सवाल  ***  यही तो कमाल है    सात समंदर पार किया, साथ समय को मात दी    फिर भी कहते हो-    हम साथ चलते नहीं हैं।    हर स्वप्न को बड़े जत...
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सोमवार, 23 नवंबर 2020

698. भटकना (क्षणिका)

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भटकना  *******  सारा दिन भटकती हूँ    हर एक चेहरे में अपनों को तलाशती हूँ    अंतत: हार जाती हूँ    दिन थक जाता है रात उदास हो जाती है    हर ...
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मंगलवार, 17 नवंबर 2020

697. वसीयत

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वसीयत    ***  ज़ीस्त के ज़ख़्मों की कहानी तुम्हें सुनाती हूँ    मेरी उदासियों की यही है वसीयत    तुम्हारे सिवा कौन इसको सँभाले    मेरी यह वसीयत...
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शनिवार, 14 नवंबर 2020

696. प्रकाश-पर्व (दीवाली पर 10 हाइकु)

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प्रकाश - पर्व *** 1. धूम- धड़ाका     चारों   ओर   उजाला     प्रकाश - पर्व ।    2. फूलों - सी   सजी     जगमग   करती     दीयों   की   लड़ी ।    ...
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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

695. जिया करो (तुकांत)

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जिया करो  *******  सपनों के गाँव में, तुम रहा करो    किस्त-किस्त में न, तुम जिया करो ।        संभावनाओं भरा, ये शहर है    ज़रा आँखें खुली, तु...
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रविवार, 8 नवंबर 2020

694. हम (11 हाइकु) प्रवासी मन - 119, 120

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हम  *******  1.  चाहता मन-    काश   पंख   जो   होते    उड़ते हम ।       2.  जल   के   स्रोत    कण - कण   से   फूटे    प्यासे हैं हम ।       ...
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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

693. कपट

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कपट  *** हाँ कपट ही तो है    सत्य से भागना, सत्य न कहना, पलायन करना    पर यह भी सच है, सत्य की राह में    बखेड़ों के मेले हैं, झमेलों के रेले...
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शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

692. दड़बा

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दड़बा  ***  ऐ लड़कियों!    तुम सब जाओ, अपने-अपने दड़बे में    अपने-अपने परों को सँभालो    एक दूसरे को अपनी-अपनी चोंच से  लहूलुहान करो।     कटन...
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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

691. देहाती

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देहाती  ***  फ़िक्रमन्द हूँ उन सभी के लिए    जिन्होंने सूरज को हथेली में नहीं थामा    चाँद के माथे को नहीं चूमा    वर्षा में भीग-भीगकर न नाचा...
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रविवार, 18 अक्टूबर 2020

690. चलते ही रहना (चोका - 14)

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चलते ही रहना  ***  जीवन जैसे    अनसुलझी हुई    कोई पहेली    उलझाती है जैसे    भूलभूलैया,    क़दम-क़दम पे    पसरे काँटें    लहूलुहान पाँव    मन...
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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

689. इकिगाई

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इकिगाई  ***  ज़िन्दगी चल रही थी, जिधर राह मिली, मुड़ रही थी    कहाँ जाना है, क्या पाना है, कुछ भी करके बस जीना है    न कोई पड़ाव, न कोई मंज़ि...
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शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

688. साथी (चार लाइन की भावाभिव्यक्तियाँ) (12 क्षणिका)

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साथी  *******  1.  साथी  *** मेरे साथी! तुम तब थे कहाँ    ज़ख़्मों से जब हम थे घायल हुए    इक तीर था निशाने पे लगा    तन-मन मेरा जब ज़ख़्मी हु...
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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

687. बापू हमारे (बापू पर 10 हाइकु)

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बापू   हमारे   *******  1. एक   सिपाही     अंग्रेज़ो   पर   भारी ,    मिला   स्वराज। 2. देश   की   शान     जन - जन   के   प्यारे     बापू   ह...
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सोमवार, 21 सितंबर 2020

686. अल्ज़ाइमर

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अल्ज़ाइमर  ***  सड़क पर से गुज़रती हुई    जाने मैं किधर खो गई     घर, रास्ता, मंज़िल सब अनचीन्हा-सा है   मैं बदल गई हूँ या दुनिया बदल गई है।   ...
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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

685. यादें, न आओ (यादें पर 10 हाइकु)

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 यादें, न आओ *** 1.  मीठी-सी बात    पहली मुलाक़ात    आई है याद ।    2.  दुःखों का सर्प    यादों में जाके बैठा    डंक म...
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बुधवार, 9 सितंबर 2020

684. बारहमासी

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बारहमासी ***  रग-रग में दौड़ा मौसम    रहा न मन अनाड़ी    मौसम का है खेल सब    हम ठहरे इसके खिलाड़ी।    आँखों में भदवा लगा    ...
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गुरुवार, 3 सितंबर 2020

683. परी

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परी *******  दुश्वारियों से जी घबराए    जाने क़यामत कब आ जाए    मेरे सारे राज़, तुम छुपा लो जग से    मेरा उजड़ा मन, बसा लो मन में। ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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