लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

रविवार, 20 जून 2021

728. ओ पापा!

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ओ पापा!  *******  ओ पापा!    तुम गए    साथ ले गए    मेरा आत्मबल    और छोड़ गए मेरे लिए    कँटीले-पथरीले रास्ते    जिसपर चलकर    मेरा पाँव ही...
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शुक्रवार, 18 जून 2021

727. एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है

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एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है ***  उम्र के सारे वसन्त वार दिए    रेगिस्तान में फूल खिला दिए    जद्दोजहद चलती रही एक अदद घर की    रिश्तों को सँव...
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सोमवार, 14 जून 2021

726. स्मृति (11 हाइकु)

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स्मृति  (11 हाइकु) *** 1.  स्मृति में तुम    जैसे फैला आकाश    सुवासित मैं।    2.  क्षणिक प्रेम    देता बड़ा आघात    रोता है मन।    3.  अधूरी...
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बुधवार, 9 जून 2021

725. पुनर्जीवित

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पुनर्जीवित  ***  मैं पुनर्जीवित होना चाहती हूँ    अपने मन का करना चाहती हूँ    छूटते सम्बन्ध, टूटते रिश्ते    वापस पाना चाहती हूँ    वह सब, ...
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शनिवार, 5 जून 2021

724. पर्यावरण (20 हाइकु)

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पर्यावरण (20 हाइकु)  ***  1.  द्रौपदी-धरा    दुश्शासन मानव    चीर हरण।    2.  पाँचाली-सी भू    कन्हैया भेजो वस्त्र!    धरा निर्वस्त्र।    3....
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शुक्रवार, 4 जून 2021

723. जीने का करो जतन

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जीने का करो जतन  *******  काँटों की तक़दीर में, नहीं होती कोई चुभन    दर्द है फूलों के हिस्से, मगर नहीं देते जलन।    शमा तो जलती है हर रात, ग़...
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सोमवार, 31 मई 2021

722. सिगरेट (5 कविता)

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सिगरेट   *** 1.  अदना-सी सिगरेट (नवधा-197) ***  क्यों कहते हो कि उसे छोड़ दूँ  अदना-सी, वह क्या बिगाड़ती है तुम्हारा? मैंने समय इसके साथ ही गु...
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मंगलवार, 25 मई 2021

721. इश्क़ (10 क्षणिका)

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इ श्क़  *******  1. इश्क़ एक सपना  ***  इश्क़ एक सपना    टूटकर जुड़ता    बेचैन करवटों में    हर बार नया  फिर से पलता    मगर रह जाता    सपना-स...
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मंगलवार, 18 मई 2021

720. अब डर नहीं लगता

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अब डर नहीं लगता  *******  अब डर नहीं लगता!    न हारने को कुछ शेष    न किसी जीत की चाह    फिर किस बात से डरना?    सब याद है    किस-किस ने प्य...
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शनिवार, 1 मई 2021

719. कोरोना (5 कविता)

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कोरोना  ***  1.  ओ कोरोना (कोरोना- नवधा-198)  *** ओ कोरोना!    है कैसा व्यापारी तू    लाशों का करता व्यापार तू    और कितना रुलाएगा    कब तक ...
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शनिवार, 24 अप्रैल 2021

718. पतझर का मौसम

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पतझर का मौसम  ***  पतझर का यह मौसम है    सूखे पत्तों की भाँति चूर-चूर होकर    हमारे अपनों को    एक झटके में वहाँ उड़ाकर ले जा रहा है    जहाँ ...
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रविवार, 18 अप्रैल 2021

717. प्रेम में होना

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प्रेम में होना    ***    प्रेम की पराकाष्ठा कहाँ तक    बदन के घेरों में या मन के फेरों में?    सुध-बुध बिसरा देना प्रेम है    या स्वयं का बो...
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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

716. ज़िन्दगी भी ढलती है

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ज़िन्दगी भी ढलती है  *******  पीड़ा धीरे-धीरे पिघल, आँसुओं में ढलती है    वक़्त की पाबन्दी है, ज़िन्दगी भी ढलती है ।    अजब व्यथा है, सुबह और श...
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सोमवार, 29 मार्च 2021

715. होली मइया (होली पर 21 हाइकु)

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होली मइया  (होली पर 21 हाइकु)  ***  1.  उन्मुक्त रंग    ऋतुराज बसन्त     फगुआ गाते।    2.  बन्धन मुक्त    भेदभाव से मुक्त,    होली सन्देश।  ...
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सोमवार, 22 मार्च 2021

714. झील (झील पर 30 हाइकु)

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झील  (झील पर 30 हाइकु)  ***    1.  अद्भुत छटा    आत्ममुग्ध है झील    ख़ुद में लीन।    2.  ता-ता थइया    थिरकती झील    वो अलबेली।    3.  अनवरत...
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गुरुवार, 18 मार्च 2021

713. अनाथ

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अनाथ  ***  काश! हवा या धुआँ बनकर    आसमान में जाती    चाँद की चाँदनी में उन तारों को ढूँढती    जो बचपन में मेरे पापा बन गए    और अब माँ भी उ...
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शुक्रवार, 12 मार्च 2021

712. रिश्ते (रिश्ते पर 20 सेदोका)

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रिश्ते   ***  1.  रिश्ते हैं फूल    भौतिकता ने छीने    रिश्तों के रंग-गन्ध     मुरझा गए,    नहीं कोई उपाय    कैसे लौटे सुगन्ध।    2.  रिश्ते...
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सोमवार, 8 मार्च 2021

711. अब नहीं हारेगी औरत

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अब नहीं हारेगी औरत *******  जीवन के हर जंग में हारती है औरत    ख़ुद से लड़ती-भिड़ती हारती है औरत    सुख समेटते-समेटते हारती है औरत    दुःख छुपा...
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बुधवार, 27 जनवरी 2021

710. भोर की वेला (भोर पर 7 हाइकु)

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भोर की वेला  ***  1.  माँ-सी जगाएँ    सुनहरी किरणें    भोर की वेला।    2.  पाखी की टोली    भोरे-भोरे निकली    कर्म निभाने।    3.  किरणें बोल...
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बुधवार, 20 जनवरी 2021

709. बात इतनी सी है

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बात इतनी सी है  *******  चले थे साथ बात इतनी सी है    जिए पर तन्हा बात इतनी सी है।    वे मसरूफ़ रहते तो बात न थी    मग़रूर हुए बात इतनी सी है।...
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सोमवार, 11 जनवरी 2021

708. आकुल (5 माहिया)

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आकुल  *******  1.  जीवन जब आकुल है    राह नहीं दिखती    मन होता व्याकुल है।    2.  हर बाट छलावा है    चलना ही होगा    पग-पग पर लावा है।    3...
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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

707. कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर

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कम्फर्ट ज़ोन से बाहर  ***  कम्फर्ट ज़ोन से बाहर    जोखिमों की लम्बी क़तार को    बच-बचाकर लाँघ जाना    क्या इतना आसान है    बिना लहूलुहान पार ...
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मंगलवार, 5 जनवरी 2021

706. कहानियाँ (5 क्षणिका)

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कहानियाँ   ******* 1. कहानी  *** कहानी में मैं मुझमें ही कहानी    कहता कौन सुनता कौन    पन्नों पर रच दी कहानी    और मैं बन गई इतिहास। 2. छोट...
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शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

705. नूतन वर्ष (10 हाइकु)

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नूतन वर्ष *** 1.  दसों दिशाएँ    करती हैं स्वागत    नूतन वर्ष।    2.  देकर दुःख    बीता पुराना साल    बेवफ़ा जैसे।    3.  आई द्वार पे    उम्म...
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

704. मुट्ठी से फिसल गया

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मुट्ठी से फिसल गया  *** निःसन्देह बीता कल नहीं लौटेगा    जो बिछड़ गया अब नहीं मिलेगा    फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस    शायद मिल जाए वापस    जो ...
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रविवार, 20 दिसंबर 2020

703. तकरार

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तकरार  ***  आत्मा और बदन में तकरार जारी है   बदन छोड़कर जाने को आत्मा उतावली है    पर बदन हार नहीं मान रहा    आत्मा को मुट्ठी से कसकर भींचे ...
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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

702. गंगा (20 हाइकु)

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 गंगा  *** 1.  चल पड़ी हूँ    सागर से मिलने    गंगा  के संग।    2.  जीवन  गंगा    सागर यों ज्यों क़ज़ा    अन्तिम सत्य।    3.  मुक्ति है देती  ...
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रविवार, 13 दिसंबर 2020

701. पत्थर या पानी

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पत्थर या पानी  ***   मेरे अस्तित्व का प्रश्न है   मैं पत्थर बन चुकी या पानी हूँ?     पत्थरों से घिरी, मैं जीवन भूल चुकी हूँ    शायद पत्थर बन...
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बुधवार, 2 दिसंबर 2020

700. स्त्री हूँ (10 क्षणिका)

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स्त्री हूँ  *******  1. स्त्री हूँ  ***  स्त्री हूँ, वजूद तलाशती    अपना एक कोना ढूँढती    अपनों का ताना-बाना जोड़ती    यायावरता मेरी पहचान ...
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बुधवार, 25 नवंबर 2020

699. दागते सवाल

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दागते सवाल  ***  यही तो कमाल है    सात समंदर पार किया, साथ समय को मात दी    फिर भी कहते हो-    हम साथ चलते नहीं हैं।    हर स्वप्न को बड़े जत...
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सोमवार, 23 नवंबर 2020

698. भटकना (क्षणिका)

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भटकना  *******  सारा दिन भटकती हूँ    हर एक चेहरे में अपनों को तलाशती हूँ    अंतत: हार जाती हूँ    दिन थक जाता है रात उदास हो जाती है    हर ...
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मंगलवार, 17 नवंबर 2020

697. वसीयत

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वसीयत    ***  ज़ीस्त के ज़ख़्मों की कहानी तुम्हें सुनाती हूँ    मेरी उदासियों की यही है वसीयत    तुम्हारे सिवा कौन इसको सँभाले    मेरी यह वसीयत...
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शनिवार, 14 नवंबर 2020

696. प्रकाश-पर्व (दीवाली पर 10 हाइकु)

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प्रकाश - पर्व *** 1. धूम- धड़ाका     चारों   ओर   उजाला     प्रकाश - पर्व ।    2. फूलों - सी   सजी     जगमग   करती     दीयों   की   लड़ी ।    ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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