लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 2 दिसंबर 2021

736. मरजीना (10 क्षणिका)

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मरजीना  *******  1.  मरजीना  ***  मन का सागर दिन-ब-दिन और गहरा होता जा रहा    दिल की सीपियों में क़ैद मरजीना बाहर आने को बेकल    मैंने बिखेर...
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मंगलवार, 16 नवंबर 2021

735. हाँ! मैं बुरी हूँ

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हाँ! मैं बुरी हूँ  *** मैं बुरी हूँ    कुछ लोगों के लिए बुरी हूँ    वे कहते हैं-    मैं सदियों से मान्य रीति-रिवाजों का  पालन नहीं करती    म...
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मंगलवार, 12 अक्टूबर 2021

734. हथेली गरम-गरम

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हथेली गरम-गरम  *******  रात हो मतवाली-सी    सपने पके नरम-नरम    सुबह हो प्यारी-सी    दिन हो रेशम-रेशम    मन में चाहे ढेरों संशय    रस्ता दिख...
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गुरुवार, 2 सितंबर 2021

733. बेइख़्तियार हूँ (8 क्षणिका)

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बेइख़्तियार हूँ  ******* 1. बेइख़्तियार हूँ  ***  भावनाएँ और संवेदनाएँ    अपनी राह से भटक चुकी हैं    अब शब्दों में पनाह नहीं लेती    आँखों मे...
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रविवार, 18 जुलाई 2021

732. पापा

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पापा  *** ख़ुशियों में रफ़्तार है इक    सारे ग़म चलते रहे    तुम्हारे जाने के बाद भी    यह दुनिया चलती रही और हम चलते रहे    जीवन का बहुत लम्बा...
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रविवार, 4 जुलाई 2021

731. प्यारी नदियाँ (36 हाइकु)

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प्यारी नदियाँ (36 हाइकु) ***  1.  नद से मिली    भोरे-भोरे किरणें    छटा निराली।    2.  गंगा पावन     नहीं होती अपावन    भले हो मैली।    3.  ...
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शुक्रवार, 25 जून 2021

730. पखेरू (8 हाइकु)

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पखेरू  (8 हाइकु)  *** 1.  नील गगन    पुकारता रहता-    पाखी, तू आ जा!    2.  उड़ती फिरूँ    हवाओं-संग झूमूँ    बन पखेरू।    3.  कतरे पंख    प...
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सोमवार, 21 जून 2021

729. योग

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योग  *******  जीवन जीना सरल बहुत    अगर समझ लें लोग    करें सदा मनोयोग से    हर दिन थोड़ा योग।    हजारों सालों की विद्या    क्यों लगती अब ढों...
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रविवार, 20 जून 2021

728. ओ पापा!

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ओ पापा!  *******  ओ पापा!    तुम गए    साथ ले गए    मेरा आत्मबल    और छोड़ गए मेरे लिए    कँटीले-पथरीले रास्ते    जिसपर चलकर    मेरा पाँव ही...
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शुक्रवार, 18 जून 2021

727. एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है

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एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है ***  उम्र के सारे वसन्त वार दिए    रेगिस्तान में फूल खिला दिए    जद्दोजहद चलती रही एक अदद घर की    रिश्तों को सँव...
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सोमवार, 14 जून 2021

726. स्मृति (11 हाइकु)

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स्मृति  (11 हाइकु) *** 1.  स्मृति में तुम    जैसे फैला आकाश    सुवासित मैं।    2.  क्षणिक प्रेम    देता बड़ा आघात    रोता है मन।    3.  अधूरी...
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बुधवार, 9 जून 2021

725. पुनर्जीवित

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पुनर्जीवित  ***  मैं पुनर्जीवित होना चाहती हूँ    अपने मन का करना चाहती हूँ    छूटते सम्बन्ध, टूटते रिश्ते    वापस पाना चाहती हूँ    वह सब, ...
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शनिवार, 5 जून 2021

724. पर्यावरण (20 हाइकु)

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पर्यावरण (20 हाइकु)  ***  1.  द्रौपदी-धरा    दुश्शासन मानव    चीर हरण।    2.  पाँचाली-सी भू    कन्हैया भेजो वस्त्र!    धरा निर्वस्त्र।    3....
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शुक्रवार, 4 जून 2021

723. जीने का करो जतन

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जीने का करो जतन  *******  काँटों की तक़दीर में, नहीं होती कोई चुभन    दर्द है फूलों के हिस्से, मगर नहीं देते जलन।    शमा तो जलती है हर रात, ग़...
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सोमवार, 31 मई 2021

722. सिगरेट (5 कविता)

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सिगरेट   *** 1.  अदना-सी सिगरेट (नवधा-197) ***  क्यों कहते हो कि उसे छोड़ दूँ  अदना-सी, वह क्या बिगाड़ती है तुम्हारा? मैंने समय इसके साथ ही गु...
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मंगलवार, 25 मई 2021

721. इश्क़ (10 क्षणिका)

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इ श्क़  *******  1. इश्क़ एक सपना  ***  इश्क़ एक सपना    टूटकर जुड़ता    बेचैन करवटों में    हर बार नया  फिर से पलता    मगर रह जाता    सपना-स...
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मंगलवार, 18 मई 2021

720. अब डर नहीं लगता

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अब डर नहीं लगता  *******  अब डर नहीं लगता!    न हारने को कुछ शेष    न किसी जीत की चाह    फिर किस बात से डरना?    सब याद है    किस-किस ने प्य...
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शनिवार, 1 मई 2021

719. कोरोना (5 कविता)

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कोरोना  ***  1.  ओ कोरोना (कोरोना- नवधा-198)  *** ओ कोरोना!    है कैसा व्यापारी तू    लाशों का करता व्यापार तू    और कितना रुलाएगा    कब तक ...
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शनिवार, 24 अप्रैल 2021

718. पतझर का मौसम

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पतझर का मौसम  ***  पतझर का यह मौसम है    सूखे पत्तों की भाँति चूर-चूर होकर    हमारे अपनों को    एक झटके में वहाँ उड़ाकर ले जा रहा है    जहाँ ...
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रविवार, 18 अप्रैल 2021

717. प्रेम में होना

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प्रेम में होना    ***    प्रेम की पराकाष्ठा कहाँ तक    बदन के घेरों में या मन के फेरों में?    सुध-बुध बिसरा देना प्रेम है    या स्वयं का बो...
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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

716. ज़िन्दगी भी ढलती है

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ज़िन्दगी भी ढलती है  *******  पीड़ा धीरे-धीरे पिघल, आँसुओं में ढलती है    वक़्त की पाबन्दी है, ज़िन्दगी भी ढलती है ।    अजब व्यथा है, सुबह और श...
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सोमवार, 29 मार्च 2021

715. होली मइया (होली पर 21 हाइकु)

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होली मइया  (होली पर 21 हाइकु)  ***  1.  उन्मुक्त रंग    ऋतुराज बसन्त     फगुआ गाते।    2.  बन्धन मुक्त    भेदभाव से मुक्त,    होली सन्देश।  ...
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सोमवार, 22 मार्च 2021

714. झील (झील पर 30 हाइकु)

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झील  (झील पर 30 हाइकु)  ***    1.  अद्भुत छटा    आत्ममुग्ध है झील    ख़ुद में लीन।    2.  ता-ता थइया    थिरकती झील    वो अलबेली।    3.  अनवरत...
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गुरुवार, 18 मार्च 2021

713. अनाथ

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अनाथ  ***  काश! हवा या धुआँ बनकर    आसमान में जाती    चाँद की चाँदनी में उन तारों को ढूँढती    जो बचपन में मेरे पापा बन गए    और अब माँ भी उ...
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शुक्रवार, 12 मार्च 2021

712. रिश्ते (रिश्ते पर 20 सेदोका)

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रिश्ते   ***  1.  रिश्ते हैं फूल    भौतिकता ने छीने    रिश्तों के रंग-गन्ध     मुरझा गए,    नहीं कोई उपाय    कैसे लौटे सुगन्ध।    2.  रिश्ते...
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सोमवार, 8 मार्च 2021

711. अब नहीं हारेगी औरत

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अब नहीं हारेगी औरत *******  जीवन के हर जंग में हारती है औरत    ख़ुद से लड़ती-भिड़ती हारती है औरत    सुख समेटते-समेटते हारती है औरत    दुःख छुपा...
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बुधवार, 27 जनवरी 2021

710. भोर की वेला (भोर पर 7 हाइकु)

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भोर की वेला  ***  1.  माँ-सी जगाएँ    सुनहरी किरणें    भोर की वेला।    2.  पाखी की टोली    भोरे-भोरे निकली    कर्म निभाने।    3.  किरणें बोल...
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बुधवार, 20 जनवरी 2021

709. बात इतनी सी है

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बात इतनी सी है  *******  चले थे साथ बात इतनी सी है    जिए पर तन्हा बात इतनी सी है।    वे मसरूफ़ रहते तो बात न थी    मग़रूर हुए बात इतनी सी है।...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 11 जनवरी 2021

708. आकुल (5 माहिया)

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आकुल  *******  1.  जीवन जब आकुल है    राह नहीं दिखती    मन होता व्याकुल है।    2.  हर बाट छलावा है    चलना ही होगा    पग-पग पर लावा है।    3...
9 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 7 जनवरी 2021

707. कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर

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कम्फर्ट ज़ोन से बाहर  ***  कम्फर्ट ज़ोन से बाहर    जोखिमों की लम्बी क़तार को    बच-बचाकर लाँघ जाना    क्या इतना आसान है    बिना लहूलुहान पार ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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