लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

रविवार, 25 अगस्त 2024

779. तुम (10 क्षणिका)

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तुम (10 क्षणिका) *** 1. तुम  मन में उमंग हो साथ अगर तुम हो खिल जाती है मुसकान नाचता-गाता है आसमान और कैमरे में उतरता है  हमारा बचपन। 2. यारी...
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रविवार, 30 जून 2024

778. ज़िन्दगी बौनी (10 ताँका)

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ज़िन्दगी बौनी  ***  1. दहलीज़ पे बैठा राह रोकके  औघड़ चाँद  न आ सका वापस  मेरा दर्द या प्रेम। 2. ज़िन्दगी बौनी आकाश पे मंज़िल पहुँचे कैसे? चारो...
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शुक्रवार, 21 जून 2024

777. खण्डहर (10 क्षणिका)

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खण्डहर  *** 1. खण्डहर होना  ***  न समय के, न समाज के ध्यान में होता है मन का खण्डहर होना सिर्फ़ मन के संज्ञान में होता है। 2. खण्डहर में तब्...
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बुधवार, 12 जून 2024

776. कशमकश

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कशमकश ***  रिश्तों की कशमकश में ज़ेहन उलझा है उम्र और रिश्तों के इतने बरस बीते  मगर आधा भी नहीं समझा है फ़क़त एक नाते के वास्ते कितने-कितने फ...
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बुधवार, 1 मई 2024

775. वक़्त आ गया है

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वक़्त आ गया है  *** अक्सर सोचती हूँ  हर बार, बार-बार  मैं   चुप   क्यों   हो   जाती   हूँ ? जानती   हूँ   मेरी   चुप्पी   हर   किसी   को   भा...
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मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

774. नैनों से नीर बहा (19 माहिया)

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नैनों से नीर बहा (19 माहिया) ***  1. नैनों से नीर बहा किसने कब जाना कितना है दर्द सहा। 2. मन है रूखा-रूखा यों लगता मानो सागर हो ज्यों सूखा। ...
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सोमवार, 25 मार्च 2024

773. रंगों की झोली (20 हाइकु)

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रंगों की झोली  *** 1. विजयी भव होली का आशीर्वाद हर माँ देती। 2. माँ-बाबा पास रॉकेट से भेजती रंगों की झोली! 3. जम के खेलो प्राकृतिक गुलाल न ह...
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शुक्रवार, 8 मार्च 2024

772. स्त्री जानती है

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स्त्री जानती है  *** उलझनें मिलती हैं, पर कम उलझती है  स्त्री ये जानती है, स्त्री सब समझती है  कब कहाँ कितना बोलना है कब कहाँ कितना छुपाना ह...
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मंगलवार, 30 जनवरी 2024

771. अन्तिम लक्ष्य

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अन्तिम लक्ष्य  *** यूँ लगता है मैं बाढ़ में ज़मीन से उखड़ा हुआ कोई दरख़्त हूँ नदी के पानी पर चल रही हूँ चल नहीं रही, फिसल रही हूँ जाने कहाँ ट...
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गुरुवार, 21 दिसंबर 2023

770. हँसती हुई नारी (चोका- 19)

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हँसती हुई नारी  *** लगती प्यारी हँसती हुई नारी घर-संसार समृद्धि भरमार रिश्तों की गूँज पसरी अनुगूँज चहके घर सुवासित आँगन बच्चों का प्यार पुरु...
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बुधवार, 20 दिसंबर 2023

769. मन गुल्लक (5 हाइकु)

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मन गुल्लक (5 हाइकु) 1. मन गुल्लक ख़ुशियों का ख़ज़ाना ख़त्म न होता। 2. मन है बना ख़ुशियों का गुल्लक कोई न लूटे। 3. भर के रखो ख़ुशियों का गुल्...
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गुरुवार, 16 नवंबर 2023

768. जीकर देखना है

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जीकर देखना है    *** जीवन   तो   जी   लिया   कभी   अपने   लिए   जीकर  देखा क्या?   सच   ही  है  जीते - जीते   जीना   कब   कोई   भूल   जाता  ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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