लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

784. सूरज किसका चाँद किसका

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सूरज किसका चाँद किसका  *** हम चाँद हैं तुम्हारे   तुम सूरज हो हमारे  हम भी तनहा, तुम भी तनहा  संसार में हम दोनों तनहा  पर साथ-साथ हम चलते है...
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गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

783. पैरहन (5 क्षणिका)

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पैरहन ***  1. लकीर *** हथेली में सिर्फ़ सुख की लकीरें थीं कब किसने दुःख की लकीरें उकेर दीं जो ज़िन्दगी की लकीर से भी लम्बी हो गई अब उम्मीद क...
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बुधवार, 20 नवंबर 2024

782. ज़िन्दगी

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ज़िन्दगी 1.  ज़िन्दगी चली बिना सोचे-समझे किधर मुड़े? कौन बताए दिशा मंज़िल मिले जहाँ।  2.  मालूम नहीं  मिलती क्यों ज़िन्दगी बेइख़्तियार, डोर जिसने...
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शनिवार, 16 नवंबर 2024

781. आग मुझे खल रही है

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आग मुझे खल रही है  *** एक आग में तमाम उम्र  जलती, तपती, झुलसती रही आह निकले, पर सब्र किया ज़ख़्म दुःखे, पर हँस दिया आसमाँ से वर्षा की गुहार लग...
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शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

780. कुछ ताँका (28 ताँका)

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बच्चे  1. बच्चों के बिना  फीका है पकवान  सूना घर-संसार, लौटते ही बच्चों के  होता पर्व-त्योहार।     2.  तोतली बोली माँ-बाबा को पुकारे वो नौनि...
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रविवार, 25 अगस्त 2024

779. तुम (10 क्षणिका)

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तुम (10 क्षणिका) *** 1. तुम  मन में उमंग हो साथ अगर तुम हो खिल जाती है मुसकान नाचता-गाता है आसमान और कैमरे में उतरता है  हमारा बचपन। 2. यारी...
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रविवार, 30 जून 2024

778. ज़िन्दगी बौनी (10 ताँका)

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ज़िन्दगी बौनी  ***  1. दहलीज़ पे बैठा राह रोकके  औघड़ चाँद  न आ सका वापस  मेरा दर्द या प्रेम। 2. ज़िन्दगी बौनी आकाश पे मंज़िल पहुँचे कैसे? चारो...
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शुक्रवार, 21 जून 2024

777. खण्डहर (10 क्षणिका)

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खण्डहर  *** 1. खण्डहर होना  ***  न समय के, न समाज के ध्यान में होता है मन का खण्डहर होना सिर्फ़ मन के संज्ञान में होता है। 2. खण्डहर में तब्...
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बुधवार, 12 जून 2024

776. कशमकश

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कशमकश ***  रिश्तों की कशमकश में ज़ेहन उलझा है उम्र और रिश्तों के इतने बरस बीते  मगर आधा भी नहीं समझा है फ़क़त एक नाते के वास्ते कितने-कितने फ...
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बुधवार, 1 मई 2024

775. वक़्त आ गया है

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वक़्त आ गया है  *** अक्सर सोचती हूँ  हर बार, बार-बार  मैं   चुप   क्यों   हो   जाती   हूँ ? जानती   हूँ   मेरी   चुप्पी   हर   किसी   को   भा...
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मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

774. नैनों से नीर बहा (19 माहिया)

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नैनों से नीर बहा (19 माहिया) ***  1. नैनों से नीर बहा किसने कब जाना कितना है दर्द सहा। 2. मन है रूखा-रूखा यों लगता मानो सागर हो ज्यों सूखा। ...
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सोमवार, 25 मार्च 2024

773. रंगों की झोली (20 हाइकु)

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रंगों की झोली  *** 1. विजयी भव होली का आशीर्वाद हर माँ देती। 2. माँ-बाबा पास रॉकेट से भेजती रंगों की झोली! 3. जम के खेलो प्राकृतिक गुलाल न ह...
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शुक्रवार, 8 मार्च 2024

772. स्त्री जानती है

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स्त्री जानती है  *** उलझनें मिलती हैं, पर कम उलझती है  स्त्री ये जानती है, स्त्री सब समझती है  कब कहाँ कितना बोलना है कब कहाँ कितना छुपाना ह...
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मंगलवार, 30 जनवरी 2024

771. अन्तिम लक्ष्य

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अन्तिम लक्ष्य  *** यूँ लगता है मैं बाढ़ में ज़मीन से उखड़ा हुआ कोई दरख़्त हूँ नदी के पानी पर चल रही हूँ चल नहीं रही, फिसल रही हूँ जाने कहाँ ट...
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गुरुवार, 21 दिसंबर 2023

770. हँसती हुई नारी (चोका- 19)

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हँसती हुई नारी  *** लगती प्यारी हँसती हुई नारी घर-संसार समृद्धि भरमार रिश्तों की गूँज पसरी अनुगूँज चहके घर सुवासित आँगन बच्चों का प्यार पुरु...
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बुधवार, 20 दिसंबर 2023

769. मन गुल्लक (5 हाइकु)

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मन गुल्लक (5 हाइकु) 1. मन गुल्लक ख़ुशियों का ख़ज़ाना ख़त्म न होता। 2. मन है बना ख़ुशियों का गुल्लक कोई न लूटे। 3. भर के रखो ख़ुशियों का गुल्...
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गुरुवार, 16 नवंबर 2023

768. जीकर देखना है

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जीकर देखना है    *** जीवन   तो   जी   लिया   कभी   अपने   लिए   जीकर  देखा क्या?   सच   ही  है  जीते - जीते   जीना   कब   कोई   भूल   जाता  ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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