लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

बुधवार, 20 मई 2009

58. कविता ख़ामोश हो गई है

›
कविता ख़ामोश हो गई है ******** कविता पल-पल बनती है मन पर शाया होती है, उतार सकूँ काग़ज़ पर रोशनाई की पहचान, अब मुझसे नहीं होती । मन ...
बुधवार, 6 मई 2009

57. मेरी कविता में तुम ही तो हो

›
मेरी कविता में तुम ही तो हो ******* तुम कहते, मेरी कविता में तुम नहीं होते हो । तुम नहीं, तो फिर, ये कौन होता है? मेरी कविता तुमसे ही...
2 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 1 मई 2009

56. आँखों में नमी तैरी है (क्षणिका)

›
आँखों में नमी तैरी है *******   बदली घिर रही आसमान में, भादो तो आया नहीं धुंध पसर रही आँगन में, माघ तो आया नहीं मानो तपते जेठ की असह्य ...
सोमवार, 20 अप्रैल 2009

55. ख़ुद पर कैसे लिखूँ

›
ख़ुद पर कैसे लिखूँ ******* कल पूछा किसी ने मैं दर्द के नग़्मे  लिखती हूँ किसका दर्द है, किसके ग़म में लिखती हूँ मेरा ग़म नहीं ये, फिर...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

54. न तुम भूले, न भूली मैं

›
न तुम भूले, न भूली मैं ******* जिन-जिन राहों से होकर, मेरी तक़दीर चली थक-थककर तुम्हे ढूँढ़ा, जब जहाँ भी थमी बार-बार जाने क्यों, मैं ह...
गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

53. क्या बात करें (अनुबन्ध/तुकान्त)

›
क्या बात करें *** सफ़र ज़िन्दगी का कटता नहीं एक रात की क्या बात करें ।   हाल पूछा नहीं कभी किसी ने ग़मे-दिल की क्या बात करें ।   दर...
बुधवार, 15 अप्रैल 2009

52. मैं और मछली (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 107)

›
मैं और मछली ******* जल-बिन मछली की तड़प मेरी तड़प क्योंकर बन गई? उसकी आत्मा की पुकार मेरे आत्मा में जैसे समा गई । उसकी कराह, चीत्क...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

51. रिश्तों का लिबास सहेजना होगा (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 91)

›
रिश्तों का लिबास सहेजना होगा ******* रिश्तों के लिबास में, फिर एक खरोंच लगी पैबंद लगा के, कुछ दिन और ओढ़ना होगा ।   पहले तो छुप जाता...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

50. रिश्तों की भीड़ (क्षणिका)

›
रिश्तों की भीड़  ******* रिश्तों की भीड़ में प्यार गुम हो गया है प्यार ढूँढ़ती हूँ बस रिश्ते हाथ आते हैं ।   - जेन्नी शबनम (7. 4. 20...
2 टिप्‍पणियां:

49. ज़िन्दगी एक बेशब्द किताब (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 92)

›
ज़िन्दगी एक बेशब्द किताब ******* पन्नों से सिमट, ज़िन्दगी, हाशिए पर आ पहुँची हसरतें हाशिए से, किताब तक जा पहुँची, मालूम नहीं ज़िन्दगी...
रविवार, 5 अप्रैल 2009

48. वक़्त मिले न मिले (क्षणिका)

›
वक़्त मिले न मिले  ******* जो भी लम्हा मिले, चुन-चुनकर बटोरती हूँ दामन में अपने जतन से सहेजती हूँ, न जाने फिर कभी वक़्त मिले न मिले ।...
2 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 31 मार्च 2009

47. बीती यादें

›
बीती यादें ******* याद आता है वो लम्हा बार-बार जब तुमने अपने दिल की बात कही थी मैंने तुम्हें सिर्फ़ देखा उत्तर न तो 'ना' था...

46. चुनाव! नेता!

›
चुनाव! नेता! ******* राजनीति का दामन थामे, चलते कूटनीति की चाल बड़ा कठिन है समझना इनको, चलते ऐसी-ऐसी चाल ।        पूरे औरत-मर्द और आ...
सोमवार, 30 मार्च 2009

45. कामना

›
कामना ******* चाहती हूँ तुम देखो ज़िन्दगी मेरी नज़रों से मेरी चाहतों से मेरी समस्त कामनाओं से ।    समझ सकोगे तुम कैसे? तुम पुरुष ...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 27 मार्च 2009

44. हँसी, ख़ुशी और ज़िन्दगी बेकार है पड़ी (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 103)

›
हँसी, ख़ुशी और ज़िन्दगी बेकार है पड़ी ******* हँसी बेकार पड़ी है, यूँ ही कोने में कहीं ख़ुशी ग़मगीन रखी है, ज़ीने में कहीं ज़िन्दगी ग...
बुधवार, 25 मार्च 2009

43. अपंगता (क्षणिका)

›
अपंगता ******* एक अपंगता होती तन की जिसे मिलती बहुत करुणा, जग की ।    एक अपंगता होती मन की जिसे नहीं मिलती संवेदना, जग की ।    तन की व्य...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 24 मार्च 2009

42. दुआ (क्षणिका)

›
दुआ  *******   कोई शख्स ज़ख़्म देता, कुरेदकर नासूर बनाता फिर कहता- "अल्लाह! उसे जन्नत बख़्श दो!" क्या कहूँ उस ज़ालिम को  अज़ीज़ या रक़...
सोमवार, 23 मार्च 2009

41. यकीन

›
यकीन ******* चाहती हूँ, यकीन कर लूँ तुम पर और अपने आप पर ख़ुदा की गवाही का भ्रम और तुमसे बाबस्ता मेरी ज़िन्दगी दोनों ही तक़दीर है । ...
रविवार, 22 मार्च 2009

40. बुत और काया (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 101)

›
बुत और काया ******* ख़यालों के बुत ने अरमान के होंठों को चूम लिया, काले लिबास-सी वो रात तमन्नाओं की रौशनी में नहा गई ।   बुत की रूह ...

39. अवैध सम्बन्ध

›
अवैध सम्बन्ध (वर्षों पूर्व लिखी यह रचना, साझा कर रही हूँ ।  कानून और समाज में वैधता-अवैधता की परिभाषा चाहे जो हो, मेरी नज़र में हम सभी ख़...
2 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 19 मार्च 2009

38. हम अब भी जीते हैं (तुकान्त)

›
हम अब भी जीते हैं ******* इश्क़ की हद, पूछते हैं आप बारहा हमसे क्या पता, हम तो हर सरहदों के पार जीते हैं ।     इश्क़ की रस्म से अनजान,...
1 टिप्पणी:

37. ख़ुद को बचा लाई हूँ (क्षणिका)

›
ख़ुद को बचा लाई हूँ  ******* कुछ टुकड़े हैं अतीत के रेहन रख आई हूँ, ख़ुद को बचा लाई हूँ ।     साबुत माँगते हो, मुझसे मुझको लो सँभाल ल...
रविवार, 8 मार्च 2009

36. एक गीत तुम गाओ न

›
एक गीत तुम गाओ न ******* एक गीत तुम गाओ न! एक ऐसा गीत गाओ कि - मेरे पाँव उठ चल पड़े, घायल पड़े हैं कब से हाथों में ताक़त आ जाए, छीन लि...
1 टिप्पणी:

35. कल रात (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 29)

›
कल रात ******* कल तमाम रात मैंने तुमसे बातें की थी ।   तुम सुनो कि न सुनो, ये मैंने सोचा नहीं तुम जवाब न दोगे, ये भी मैंने सोचा नही...
1 टिप्पणी:

34. कुछ पता नहीं

›
कुछ पता नहीं ******* बेइंतिहा जीने के जुनून में ज़िन्दगी कब कहाँ छूट गई कुछ होश नहीं ।      कारवाँ आता रहा, जाता रहा कोई अपना, कब ...
शुक्रवार, 6 मार्च 2009

33. ख़ुशनसीबी की हँसी (क्षणिका)

›
ख़ुशनसीबी की हँसी  ******* चोट जब दिल पर लगती है एक आह-सी उठती है, एक चिंगारी, दहकती है चुपके से दिल रोता है और एक हँसी गूँजती है ।  सब प...
1 टिप्पणी:
रविवार, 1 मार्च 2009

32. अपनी हर बात कही (अनुबन्ध/तुकान्त)

›
अपनी हर बात कही *** समेट ख़ुद को सीने में उसके, अपने सारे हालात कही तर कर उसका सीना, अपने मन की बात कही ।  शाया किया अपने सुख-दुःख, ...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

31. चुप (क्षणिका)

›
चुप  ******* एक सब्र मन का, उतर गया है आँखों पर एक सब्र बदन का, ओढ़ लिया है ज़िन्दगी पर एक चुप पी ली है, अपने होंठों से एक चुप चुरा ...
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

30. लिखूँगी रोज़ मैं एक ख़त

›
लिखूँगी रोज़ मैं एक ख़त ******* लिखूँगी रोज़ मैं एक ख़त सिर्फ़ तुम्हारे लिए, मेरा ख़त । मेरी स्याही मेरे ज़ख़्मों से रिसती है जिससे तु...
1 टिप्पणी:

29. नफ़रत के बीज

›
नफ़रत के बीज *** नफ़रत के बड़े-बड़े पेड़ उगे हैं, हर कहीं इन्सान के अलग-अलग रूपों में   ये बीज हमने कब बोए? सोचती हूँ - ख़ुदा ने ज़...
1 टिप्पणी:

28. शाइर

›
शाइर ******* शाइर के अल्फ़ाज़ में जाने किसकी रूह तड़पती है हर हर्फ़ में जाने कौन सिसकता है ख़्वाबों में जाने कौन पनाह लेता है किसक...
1 टिप्पणी:

27. मैं आज ग़ज़लों की किताब बनूँगी

›
मैं आज ग़ज़लों की किताब बनूँगी ******* आज मैं कोरा काग़ज़ बनूँगी    या कैनवास का रूप धरुँगी,    आज किसी के कलम की स्याही बनूँगी    ...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

26. ख़ुदा की नाइन्साफ़ी

›
ख़ुदा की नाइन्साफ़ी  *** ख़ुदा ने बनाए दो इन्सान, स्त्री और मर्द दो जात सब कुछ बाँटना था आधा-आधा  जी सकें प्यार से जीवन पूरा पर ख़ुदा ...

25. अधूरी कविता

›
अधूरी कविता ******* तुम कहते - सुनाओ कुछ अपनी कविता, कैसे कहूँ अब होती नहीं पूरी, मेरी कविता । अधूरी कविता अब बन गई ज़िन्दगी जैसे...
2 टिप्‍पणियां:

24. थक गई मैं

›
थक गई मैं ******* वादा किया उसने  उम्रभर साथ निभाने का  लम्हों का सफ़र और रुसवा हो गया वो जाने वादाखिलाफ़ी थी या अंत क़रीब मेरा डर गय...

23. रात का नाता मुझसे

›
रात का नाता मुझसे ******* मेरी कराह का नाता है रातों से, जाने कितना गहरा ख़ामोशी से सुनती और साथ मेरे जागती है । हौले से थाम मेरी ब...
1 टिप्पणी:

22. मुहब्बत! पहला लफ़्ज़

›
मुहब्बत! पहला लफ़्ज़ ******* मुहब्बत ही था पहला लफ़्ज़, जो कहा तुमने    अजनबी थे, जब पहली ही बार हम मिले थे।    कुछ भी साथ नहीं, क्षत...
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

21. घर

›
घर *** शून्य को ईंट-गारे से घेर, घर बनाना एक भ्रम ही तो है बेजान दीवारों से घर नहीं, महज़ आशियाना बनता है घरों को मकान बनते अक्सर दे...

20. अच्छा हुआ तुम न आए

›
अच्छा हुआ तुम न आए ******* अच्छा हुआ जो तुम न आए आदत थी तुम्हारी हमें सदा पास रहने की साथ जीने की । तुम्हारा न आना अच्छा तो न लगा...

19. अनुत्तरित प्रश्न है (क्षणिका)

›
अनुत्तरित प्रश्न है  ******* अनुत्तरित प्रश्न है- अहमियत क्या है मेरी? कच्चा गोश्त हूँ, पिघलता जिस्म हूँ बेजान बदन हूँ, भटकती रूह हू...

18. मेरी आज़माइश करते हो (अनुबन्ध/तुकान्त) (पुस्तक-नवधा)

›
मेरी आज़माइश करते हो *** ग़ैरों के सामने इश्क़ की नुमाइश करते हो क्यों भला ज़िन्दगी की फ़रमाइश करते हो । इश्क़ करते नहीं ईमान से तुम कभी  ...

17. मेरा अपना कुछ (क्षणिका)

›
मेरा अपना कुछ ******* मेरा अपना एक टुकड़ा सूरज-चाँद है एक कतरा धरती-आसमान है कुछ छींटे सुर्ख़ उजाले, कुछ स्याह अँधियारे हैं कुछ ख़ुशी...
बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

16. सुलगती ज़िन्दगी (क्षणिका)

›
सुलगती ज़िन्दगी ******* मेरी नसों में लहू बनकर इक दर्द पिघलता है मेरी साँसों में ख़ुमार बनकर इक ज़ख़्म उतरता है इक ठंडी आग है समाती है...
बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

15. ज़िन्दगी रेत का महल

›
ज़िन्दगी रेत का महल ******* ज़िन्दगी रेत का महल है हर लहर आकर बिखेर जाती है, सपनों से रेत का महल हम फ़िर बनाते हैं जानते हैं बिखर जा...

14. तुमने सब दे दिया (अनुबन्ध/तुकान्त) (पुस्तक- नवधा))

›
तुमने सब दे दिया *** एक इम्तिहान-सा था, कल जो आकर गुज़र गया वक़्त भी मुस्कुराया, जब तुमने मुझे जिता दिया ।   एक वादा था तुम्हारा, कि...

13. ज़ब्त-ए-ग़म (तुकान्त)

›
ज़ब्त-ए-ग़म ******* सुर्ख़ स्याही से सफ़ेद पन्नों पर लिखी है किसी के ज़ब्त-ए-ग़म की तहरीर । शब्द के सीने में ज़ब्त है किसी के जज़्बात...

12. संतान की आहुति

›
संतान की आहुति (यह सिर्फ़ कविता नहीं, आप सभी के सोचने के लिए सवाल है ।  परिवार द्वारा अपनी संतान का क़त्ल कर देना क्योंकि उसने प्रेम करने क...

11. मेरी बिटिया का जन्मदिन

›
मेरी बिटिया का जन्मदिन ******* मेरी बिटिया का जन्मदिन आया, स्वर्णिम सुहाना नया सवेरा लाया जन्मदिन मनाने सूरज आया, सर्दी और नर्म धूप...
गुरुवार, 22 जनवरी 2009

10. यूँ ही चलने दो, यूँ ही जीने दो / Yun Hi Chalne Do, Yu Hin Jine Do

›
यूँ ही चलने दो, यूँ ही जीने दो ******* ये क्या कह रहे हो? सब जानते तो हो तुम विध्वंस क्यों लाना चाहते हो? मृग-मरीचिका-सा न भटको तुम...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 20 जनवरी 2009

9. बस सुनो! मेरी सुनो! सुनते जाओ! / Bus Suno! Meri Suno! Sunte Jaao!

›
बस सुनो! मेरी सुनो! सुनते जाओ! ******* कोई सवाल अब तुम तो न पूछो मेरा यकीन अब तुम तो न छीनो सवाल-जवाब और हिसाब-किताब की यूँ ही इंतिह...
4 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.