लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

105. मेरा अल्लाह मेरा राम (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mera Allah Mera Ram (Anubandh/Tukaant)

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मेरा अल्लाह मेरा राम *** आँतें सिकुड़ी भूख से, मासूम जानो की बढ़ती क़तार तुम कहते हो, हम हैं लाचार, देता अल्लाह देता राम । दुनिया एक छ...
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मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

104. राह मुकम्मल करनी है (अनुबन्ध/तुकान्त) / Raah mukammal karni hai (Anubandh/Tukaant)

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राह मुकम्मल करनी है *** साथी छूटे कि राहें भूलें, ये ज़िन्दगी तो चलनी है मन हारे कि तन हारे, हर राह मुकम्मल करनी है ।   आँखों के साग...
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सोमवार, 30 नवंबर 2009

103. रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल / rumaani waadiyon mein safed baadal

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रूमानी वादियों में सफ़ेद बादल ******* मन की कलियाँ कुछ कच्ची हुई सपनों की गलियाँ कुछ लम्बी हुई, एक फ़रिश्ता मुझे बादल तक लाया पुष्पक...
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बुधवार, 25 नवंबर 2009

102. मुझे जीना नहीं आता (अनुबन्ध/तुकान्त) / Mujhe jeena nahin aata (Anubandh/Tukaant)

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मुझे जीना नहीं आता ***       मुझे जीना नहीं आता, मुझे रहना नहीं आता     दुनिया के रिवाजों पे मुझे चलना नहीं आता ।   ज़माने के दुःखों ...
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सोमवार, 23 नवंबर 2009

101. वदीयत दर्द का / vadeeyat dard ka

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वदीयत दर्द का ******* रूह लिपटी रही जिस्म से ऐसे दो अजनबी मिल रहे हों जैसे, पता पूछा मेरे ज़ीस्त से उसने और जुदा हो गया सजदा करके ।  ...
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शनिवार, 21 नवंबर 2009

100. मैं / main (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 111)

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मैं ******* मैं, मैं, सिर्फ़ मैं, सर्वत्र मैं...! एक रूह मैं, एक इंसान मैं, एक हैवान मैं, एक ख्व़ाब मैं, एक जज़्बात मैं, एक ख़्वाबगाह...
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गुरुवार, 19 नवंबर 2009

99. वक़्त को इतनी बेसब्री क्यों / waqt ko itni besabri kyon

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वक़्त को इतनी बेसब्री क्यों ******* कुछ लम्हे चुराकर दे दो न ठहर ज़रा हम भी जी लें न, जब देखो छीन जाता हमसे वक़्त की इतनी सख़्ती क्यो...
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रविवार, 15 नवंबर 2009

98. वह अमरूद का पेड़ / Wah Amruud ka Ped (पुस्तक - लम्हों का सफ़र पेज - 35)

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वह अमरूद का पेड़ *** घर के सामने अमरूद का पेड़ आज भी वहीं पर स्थित है बिछुड़े हुए अपनों की आस लगाए घर को सूनी आँखों से निहारता वक़्त के ...
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गुरुवार, 12 नवंबर 2009

97. इन्सानियत मरती है (अनुबन्ध/तुकान्त) / Insaaniyat martee hai (Anubandh/Tukaant) (पुस्तक- नवधा)

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इन्सानियत मरती है ******* गुनहगारों को आजकल राहत मिलती है बेगुनाही सज़ा और ज़िल्लत से घिरती है ।   किसी की मासूमियत का कैसे हो फ़ैसला  ...
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बुधवार, 11 नवंबर 2009

96. नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं (अनुबन्ध/तुकान्त) / Naam tumhara kabhi liya nahin (Anubandh/Tukaant) (पुस्तक- नवधा)

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नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं *** उँगली के पोरों से मन में, नाम कभी लिखा नहीं शून्य में न जा ठहरे, नाम तुम्हारा कभी लिया नहीं ।   आस्था ...
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95. वर्जित फल / varjit phal (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 110)

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वर्जित फल ******* ख़ुदा का वर्जित फल इश्क़ था जो कभी दो प्राणी ने, उत्सुकता में खाया था, वो अनजानी गलती उनकी, इश्क़ की बुनियाद थी जिसस...
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रविवार, 8 नवंबर 2009

94. तुम कहाँ गए (तुकांत) / tum kahaan gaye (tukaant)

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तुम कहाँ गए ******* एक साँझ घिर आयी है मन पर मेरी सुबह लेकर तुम कहाँ गए? एक फूल खिला एक दीप जला सब बुझाकर तुम कहाँ गए? बीता रात क...
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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

93. नज़्म तुम्हारी बनते हैं / nazm tumhaari bante hain

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नज़्म तुम्हारी बनते हैं ******* चलो ऐसा कुछ करते हैं एक दर्द अपना रोज़ कहते हैं तुम सुनते जाना मेरा अफ़साना एक नज़्म तुम्हारी हम रोज़...
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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2009

92. ये बस मेरा मन है / ye bas mera mann hai (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 46)

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ये बस मेरा मन है ******* ज़िन्दगी के अर्थ मिलते नहीं खो से गए हैं जैसे सब कहीं ब्रह्माण्ड की असीम शून्यता में, अधर में लटके हैं शब्द...
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91. पैग़ाम चाँद को सुना जाना (तुकांत) / paighaam chaand ko suna jaanaa (tukaant)

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पैग़ाम चाँद को सुना जाना ******* चाँद खिले तो छत पर आ जाना, महूरत हमें भी बता जाना पैग़ाम हम चाँद से पूछेंगे, अपना पैग़ाम चाँद को सुना जा...
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रविवार, 25 अक्टूबर 2009

90. भागलपुर दंगा (24-26.10.1989) / Bhagalpur danga (24-26.10.1989)

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(1989 में बिहार में साम्प्रदायिक दंगा हुआ ।  भागलपुर शहर में कई दिनों तक क़त्ले-आम जारी रहा, कई मोहल्ले उजड़ गए, कई गाँवों के नामोनिशान मिट ग...
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

89. शब को दूर जाने दो (तुकांत) / shab ko door jaane do (tukaant)

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शब को दूर जाने दो ******* ज़िन्दगी को टूट जाने दो, कलम भी छूट जाने दो उसको जाने का बहाना चाहिए, रूठा है रूठ जाने दो ।   साझे एहसासों...
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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

88. शब ने पाले ही नहीं थे (तुकान्त) / shab ne paale hi nahin theye (tukaant)

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शब ने पाले ही नहीं थे ******* कुछ लम्हे ऐसे रूठ गए हैं, जैसे साथ कभी हम जिए ही नहीं थे यूँ कि कोई साथी छूट जाए, जैसे साथ कभी हम चले ही...
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रविवार, 11 अक्टूबर 2009

87. अनाम प्रेम कहानी / anaam prem kahani

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अनाम प्रेम कहानी ******* रिश्तों की बनी एक अनाम कहानी प्रेम ने रचा फिर एक नया इतिहास, बातें हुईं जो कल हमारी तुम्हारी महफ़ूज़ रखना सद...
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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

86. तुम्हारी अतियों से डरती हूँ / tumhaari atiyon se darti hun

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तुम्हारी अतियों से डरती हूँ ******* तुम्हारी अतियों से बहुत डरती हूँ चाहे तुम्हारा प्यार हो या ग़ुस्सा । जब प्यार में आसमान पर बिठाते...
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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

85. पुरातत्व और अवशेष / puraatatwa aur avshesh

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पुरातत्व और अवशेष *** तुम जानते हो, पुरातत्वों के ज्ञाता हो बुलन्द इमारत को खण्डहर बनने में सदियाँ गुज़रती हैं तुम पहचानते हो, प्राचीन ...
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सोमवार, 14 सितंबर 2009

84. उसका आख़िरी कलाम है (तुकान्त) / uska aakhiree kalaam hai (tukaant)

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उसका आख़िरी कलाम है ******* हर ख़्वाब मेरा वो पालता रहा, जो पल-पल मन मेरा चाहता रहा कितना जान-निसार वो इंसान है, मेरा सुकून उसकी ज़िन्...
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शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

83. किसी कोख में नहीं जाऊँगी माँ

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किसी कोख में नहीं जाऊँगी माँ *** अब तक न जाने कितने कोख से जबरन छीनी गई जीवन जीने की तमन्ना, हर बार बेबस कुचली गई जानती हूँ, बस थोड़ी...
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सोमवार, 7 सितंबर 2009

82. तुम्हें इंसान बना दिया

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तुम्हें इंसान बना दिया ******* सज़दे में झुक गया सिर जब रगों में इश्क़ पसर गया वक़्त की देने गवाही देखो! ख़ुदा भी ज़मीन पे उतर गया ।   ...
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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

81. ख़ुदा बना दिया (तुकान्त)

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ख़ुदा बना दिया ******* मिज़ाज कौन पूछे, जब ख़ुद नासाज़ हो ये सोच हमने, ख़ुद ही सब्र कर लिया ।   इश्क़ का जुनून, कैसे कोई जाने भला वो ज...
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बुधवार, 26 अगस्त 2009

80. आँखों में इश्क़ भर क्यों नहीं देते हो (तुकान्त)

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आँखों में इश्क भर क्यों नहीं देते हो ******* दावा करते तुम, आँखों को मेरी पढ़ लेते हो फिर दर्द मेरा तुम, समझ क्यों नहीं लेते हो ?   ...
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मंगलवार, 18 अगस्त 2009

79. हम दुनियादारी निभा रहे (तुकान्त)

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हम दुनियादारी निभा रहे ******* एक दुनिया, तुम अपनी चला रहे एक दुनिया, हम अपनी चला रहे ।   ख़ुदा तुम सँवारो दुनिया, बहिश्त-सा महज़ इ...
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मंगलवार, 11 अगस्त 2009

78. यही अर्ज़ होता है (तुकान्त)

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यही अर्ज़ होता है ******* मजरूह सही, ये दर्द-ए-इश्क़ का तर्ज़ होता है तजवीज़ न कीजिए, इंसान बड़ा ख़ुदगर्ज़ होता है ।   आप कहते हैं कि...
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गुरुवार, 6 अगस्त 2009

77. काश! हम ज़ंजीर बने न होते

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काश! हम ज़ंजीर बने न होते ******* नहीं मालूम कब हम प्रेम पथिक से, लौह-ज़ंजीर बनते चले गए वक़्त और ज़िन्दगी की भट्ठी में हमारे प्रेम क...
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सोमवार, 27 जुलाई 2009

76. उजाला पी लूँ (क्षणिका) / Ujaala pee loon (kshanika)

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उजाला पी लूँ  ******* चाहती हूँ दिन के उजाले की कुछ किरणें मुट्ठी में बंद कर लूँ जब घनी काली रातें लिपटकर डराती हों मुझे मुट्ठी खोल,...
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शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

75. काश! कोई ज़ंजीर होती (क्षणिका) / kaash! koi zanjeer hotee (kshanika)

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काश! कोई ज़ंजीर होती  ******* वीरान राहों पर तन्हा ख़ामोश चल रही हूँ थक गई हूँ टूट गई हूँ न जाने कैसी राह है ख़त्म नहीं होती समय की ...
बुधवार, 22 जुलाई 2009

74. शमा बुझ रही (तुकान्त)

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कुछ शेर हैं नज़्म-सा सही, नाम क्या दूँ ये पता भी नहीं, जो नाम दें आपकी मर्ज़ी, पेश है शमा पर मेरी एक अर्ज़ी शमा बुझ रही ******* शमा ...
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शनिवार, 18 जुलाई 2009

73. मेरी ज़िन्दगी

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मेरी ज़िन्दगी ******* ज़िन्दगी मेरी  कई रूप में सामने आती है ज़िन्दगी को पकड़ सकूँ दौड़ती हूँ, भागती हूँ, झपटती हूँ साबूत न सही कुछ...
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गुरुवार, 16 जुलाई 2009

72. नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए

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नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए ******* नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए फिर आस खोई तो क्या हुआ? सपनों के बिना भी हम जी लेंगे मेरा दिल टूटा तो क्या हुआ? ...
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71. कोई बात बने (अनुबन्ध/तुकान्त) (पुस्तक- नवधा)

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कोई बात बने *** ज़ख़्म गहरा हो औ ताज़ा मिले, तो कोई बात बने थोड़ी उदासी से, न कोई ग़ज़ल न कोई बात बने । दस्तूर-ए-ज़िन्दगी, अब मुझको न ब...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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