लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

431. मन (10 हाइकु) पुस्तक 49,50

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मन  ******* 1. मन में बसी धूप सीली-सीली-सी ठंडी-ठंडी सी। 2. भटका मन सवालों का जंगल सब है मौन। 3. शाख से टूटे उदा...
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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

430. प्रीत (7 हाइकु) पुस्तक - 48, 49

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प्रीत *******  1. प्रीत की डोरी ख़ुद ही थी जो बाँधी ख़ुद ही तोड़ी। 2. प्रीत रुलाए मन को भरमाए पर टूटे न। 3 . प्रीत की राह...
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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

429. फिर आता नहीं

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फिर आता नहीं ******  जाने कब आएगा,  मेरा वक़्त    जब पंख मेरे और परवाज़ मेरी    दुनिया की सारी सौग़ात मेरी    फूलों की खुशबू, तारों...
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बुधवार, 11 दिसंबर 2013

428. ज़िन्दगी की उम्र (पुस्तक - 97)

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ज़िन्दगी की उम्र ******* लौट आने की ज़िद,  अब न करो यही मुनासिब है,  क्योंकि कुछ रास्ते वापसी के लिए बनते ही नहीं हैं,   इन राह...
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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

427. ज़िन्दगी लिख रही हूँ

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ज़िन्दगी लिख रही हूँ ******* लकड़ी के कोयले से  आसमान पर ज़िन्दगी लिख रही हूँ  उन सबकी  जिनके पास शब्द तो हैं  पर लिखने की आज़ा...
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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

426. जी उठे इन्सानियत

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जी उठे इन्सानियत *** कभी तफ़्सील से करेंगे,  रूमानी ज़ीस्त के चर्चे अभी तो चल रही है  नाज़ुक, लहूलुहान हवा डगमगाती,  थरथराती,  घबराती इसे सँभा...
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गुरुवार, 21 नवंबर 2013

425. साँसों की लय (चोका - 5)

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साँसों की लय   *** साँसें ज़िन्दगी  निरन्तर चलती  ज़िंदा होने का    मानो फ़र्ज़ निभाती,  साँसों की लय  है हिचकोले खाती     ब...
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शनिवार, 16 नवंबर 2013

424. जन्म-नक्षत्र

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जन्म-नक्षत्र ******* सारे नक्षत्र अपनी-अपनी जगह आसमान में देदीप्यमान थे कहीं संकट के कोई चिह्न नहीं ग्रहों की दशा विपरीत नहीं...
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सोमवार, 11 नवंबर 2013

423. खिड़कियाँ

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खिड़कियाँ  ***  अभेद दीवारों से झाँकती    कभी बंद, कभी खुलती    जाने क्या-क्या सोचती है खिड़की    शहर का हाल,  मोहल्ले का सरोकार...
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शनिवार, 2 नवंबर 2013

422. दीप-दीपाली (दीपावली पर 18 हाइकु) पुस्तक 46-48

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दीप-दीपाली  ******* 1. उतरे नीचे नक्षत्र आसमाँ के ज़मीन पर । 2. लौटे प्रवासी त्योहार का मौसम सजी दीवाली । 3. राम प्रवासी ...
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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

421. ज़िन्दगी (21 हाइकु) पुस्तक 44-46

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ज़िन्दगी ******* 1. लम्हों की लड़ी एक-एक यूँ जुड़ी ज़िन्दगी ढली। 2. गुज़र गई जैसे साज़िश कोई तमाम उम्र। 3. ताकती रही जी...
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सोमवार, 30 सितंबर 2013

420. क्या बिगड़ जाएगा

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क्या बिगड़ जाएगा *** गहराती शाम के साथ   मन में धुक-धुकी समा जाती है  सब ठीक तो होगा न  कोई मुसीबत तो न आई होगी  कहीं कुछ ग़...
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बुधवार, 25 सितंबर 2013

419. पीर जिया की (10 ताँका)

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पीर जिया की *** 1. आँखों की कोर जहाँ पे चुपके से   ठहरा लोर,  कहे निःशब्द कथा  मन अपनी व्यथा।  2. छलके आँसू  बह गय...
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सोमवार, 9 सितंबर 2013

418. क़दम ताल

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क़दम ताल *** समय की भट्टी में पककर कभी कंचन  तो कभी  बंजर  बन जाता है  जीवन  कभी कोई आकार ले लेता है  तो कभी  सदा के लिए  जल जाता है जीव...
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बुधवार, 21 अगस्त 2013

417. मन के नाते (राखी पर 12 हाइकु) पुस्तक 43,44

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मन के नाते (राखी के हाइकु) (12 हाइकु) ******* 1. हाथ पसारे  बँधवाने राखी  चाँद तरसे।  2. सूनी कलाई  बहना नहीं आई भैय...
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शनिवार, 17 अगस्त 2013

416. माथे पे बिन्दी (11 हाइकु) पुस्तक 42,43

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माथे पे बिन्दी  *** 1. माथे की बिन्दी  आसमान में चाँद  सलोना रूप ।  2. लाल बिन्दिया  ज्यों उगता सूरज चेहरा खिला । ...
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बुधवार, 7 अगस्त 2013

415. मत सोच अधिक (15 हाइकु) पुस्तक 40-42

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मत सोच अधिक  *******  1. जो बीत गया  मत सोच अधिक, बढ़ता चल। 2. जीवन-पथ  डराता है बहुत,  हारना मत। 3. सब आएँगे...
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रविवार, 28 जुलाई 2013

414. वापस अपने घर

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वापस अपने घर *** अरसे बाद  ख़ुद के साथ वक़्त बीत रहा है   यों लगता है  जैसे बहुत दूर से चलकर आए हैं सदियों बाद वापस अपने घर। उफ़!  कित...
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बुधवार, 24 जुलाई 2013

413. धूप (15 हाइकु) पुस्तक 39,40

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धूप ******* 1. सूर्य जो जला    किसके आगे रोए   ख़ुद ही आग।  2. घूमता रहा  सारा दिन सूरज  शाम को थका।  3. भुट्ट...
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गुरुवार, 18 जुलाई 2013

412. जादूगर

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जादूगर ******* ओ जादूगर! तुम्हारा सबसे ख़ास मेरा प्रिय जादू दिखाओ न! जानती हूँ  तुम्हारी काया जीर्ण हो चुकी है  और अब मैं  ...
22 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 13 जुलाई 2013

411. सन्नाटे के नाम ख़त (10 हाइकु) पुस्तक 38, 39

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सन्नाटे के नाम ख़त (10 हाइकु) *** 1. सन्नाटा भागा चुप्पी ने मौन तोड़ा,  जाने क्या बोला।   2. कोई न आया  पसरा है सन्ना...
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शनिवार, 22 जून 2013

410. उठो अभिमन्यु

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उठो अभिमन्यु *** उचित वेला है  कितना कुछ जानना-समझना है   कैसे-कैसे अनुबंध करने हैं पलटवार की युक्ति सीखनी है  तुम्हें मिटन...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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