लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

555. कैसी आज़ादी पाई (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु) पुस्तक - 91, 92

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कैसी आज़ादी पाई   *******   1.   मन है क़ैदी,   कैसी आज़ादी पाई?   नहीं है भायी ।      2.   मन ग़ुलाम   सर्वत्र कोहर...
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बुधवार, 9 अगस्त 2017

554. सँवार लूँ (क्षणिका)

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सँवार लूँ *******   मन चाहता है   एक बोरी सपनों के बीज   मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ   मनचाहे सपने उगा  ज़िन्दगी सँवार लूँ। ...
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सोमवार, 7 अगस्त 2017

553. रिश्तों की डोर (राखी पर 10 हाइकु) पुस्तक - 90, 91

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रिश्तों की डोर   *******   1.   हो गए दूर   सम्बन्ध अनमोल   बिके जो मोल ।     2.   रक्षा का वादा   याद दिलाए राखी...
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सोमवार, 17 जुलाई 2017

552. मुल्कों की रीत है (तुकांत)

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मुल्कों की रीत है   ******* कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है ।  मज़हब व भ...
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शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

551. उदासी (क्षणिका)

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उदासी   *******   ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते   ज़बरन साँसों की आवाजाही   काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!   - जेन्नी शबनम (7....
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शनिवार, 1 जुलाई 2017

550. ज़िद (क्षणिका)

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ज़िद *******   एक मासूम सी ज़िद है-   सूरज तुम छुप जाओ   चाँद तुम जागते रहना   मेरे सपनों को आज   ज़मीं पर है उतरना।  -...
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शुक्रवार, 30 जून 2017

549. धरा बनी अलाव (गर्मी के 10 हाइकु)

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धरा बनी अलाव   ***   1.   दोषी है कौन?   धरा बनी अलाव,   हमारा कर्म ।      2.   आग उगल   रवि गर्व से बोला-   स...
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रविवार, 25 जून 2017

548. फ़ौजी-किसान (19 हाइकु)

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फ़ौजी-किसान   ***   1.   कर्म पे डटा   कभी नहीं थकता   फ़ौजी-किसान ।      2.   किसान हारे   ख़ुदकुशी करते,   बेबस सा...
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गुरुवार, 1 जून 2017

547. मर गई गुड़िया

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मर गई गुड़िया   *******   गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया   ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया   ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िय...
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शनिवार, 13 मई 2017

546. तहज़ीब (क्षणिका)

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तहज़ीब *******   तहज़ीब सीखते-सीखते   तमीज़ से हँसने का शऊर आ गया   तमीज़ से रोने का हुनर आ गया   न आया तो तहज़ीब और तमीज़ से  ...
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गुरुवार, 11 मई 2017

545. हमारी माटी (गाँव पर 20 हाइकु)

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हमारी माटी     ***   1.   किरणें आईं    खेतों को यूँ जगाती    जैसे हो माई।   2.   सूरज जागा   पेड़-पौधे मुस्काए   ...
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सोमवार, 24 अप्रैल 2017

544. सुख-दुःख जुटाया है (क्षणिका)

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सुख-दुःख जुटाया है   *******   तिनका-तिनका जोड़कर सुख-दुःख जुटाया है   सुख कभी-कभी झाँककर    अपने होने का  एहसास कराता है    दु...
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सोमवार, 17 अप्रैल 2017

543. एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में (तुकांत)

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एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ******* तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में   एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में ।     वक़्त के आइन...
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शनिवार, 1 अप्रैल 2017

542. विकल्प (क्षणिका)

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विकल्प   *******   मेरे पास कोई विकल्प नहीं   मैं हर किसी की विकल्प हूँ      कामवाली, सफ़ाईवाली, रसोईया छुट्टी पर  पशु को खिलाने...
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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

541. साथ-साथ

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साथ-साथ  *******   तुम्हारा साथ   जैसे बंजर ज़मीन में फूल खिलना   जैसे रेगिस्तान में जल का स्रोत फूटना।   अकसर सोचती हूँ   ...
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मंगलवार, 21 मार्च 2017

540. नीयत और नियति

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नीयत और नियति   ***   नीयत और नियति समझ से परे है एक झटके में सब बदल देती है   ज़िन्दगी अवाक्!    काँधे पर हाथ धरे चलते-चलते   पीठ में गहरी...
शनिवार, 18 मार्च 2017

539. रेगिस्तान

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रेगिस्तान *******   मुमकिन है यह उम्र   रेगिस्तान में ही चुक जाए   कोई न मिले उस जैसा   जो मेरी हथेलियों पर   चमकते सितारो...
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सोमवार, 13 मार्च 2017

538. जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)

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जागा फागुन  ***   1.   होली कहती-   खेलो रंग गुलाल   भूलो मलाल ।      2.   जागा फागुन   एक साल के बाद,   खिलखिला...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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