लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

745. अब्र (6 क्षणिका)

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अब्र  (6 क्षणिका) *******  1. अब्र    ज़माने के हलाहल पीकर    जलती-पिघलती मेरी आँखों से    अब्र की नज़रें आ मिली    न कुछ कहा, न कुछ पूछा    ...
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सोमवार, 4 जुलाई 2022

744. भोर (40 हाइकु)

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भोर  *** 1. भोर होते ही हड़बड़ाके जागी, धूप आलसी। 2. आँखें मींचता भोरे-भोरे सूरज जगाने आया। 3. घूमता रहा सूरज निशाचर भोर में लौटा। 4. हाल पू...
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शनिवार, 18 जून 2022

743. साढ़े-सात सदी

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साढ़े-सात सदी  ***  बाबा जी ने चिन्तित होकर कहा    शनि की दूसरी साढ़ेसाती चल रही है    फलाँ ग्रह, इस घर से उस घर को देख रहा है    फलाँ घर मे...
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गुरुवार, 5 मई 2022

742. मन (मन पर 20 हाइकु)

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मन   (मन पर 20 हाइकु )  *** 1.  जीवन-मृत्यु    निरन्तर का खेल    मन हो, न हो।    2.  डटके खड़ा    गुलमोहर मन    कोई मौसम।    3.  काटता मन   ...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2022

741. दुलारी होली (होली पर 15 हाइकु)

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दुलारी होली ***  1.  दे गया दग़ा     रंगों का ये मौसम,    मन है कोरा।    2.  छूके गुज़रा    कर अठखेलियाँ    मौसमी-रंग।    3.  होली आई    मन न...
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मंगलवार, 8 मार्च 2022

740. एक दिन मुक्ति के नाम

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एक दिन मुक्ति के नाम  ***  कभी अधिकार के लिए शुरु हुई लड़ाई    हमारी ज़ात को ज़रा-सा हक़ दे गई    बस एक दिन, राहत की  साँसें भर लूँ    ख़ूब गर...
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सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

739. अलगनी

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अलगनी  ***  हर रोज़ थक-हारकर टाँग देती हूँ ख़ुद को खूँटी पर    जहाँ से मौन होकर देखती-सुनती हूँ, दुनिया का जिरह    कभी-कभी जीवित महसूस करने क...
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शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

738. वसन्त पञ्चमी (वसन्त पञ्चमी पर 10 हाइकु)

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वसन्त पञ्चमी  ***  1.  पीली सरसों    आया जो ऋतुराज    ख़ूब है खिली।    2.  ज्ञान की चाह    है वसन्त पञ्चमी    अर्चन करो।    3.  पावस दिन    ...
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रविवार, 23 जनवरी 2022

737. समय (10 क्षणिका)

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समय  *** 1. समय  समय हर बार  मरहम नहीं बनता   कई बार  पुराने से ज़्यादा बड़ा घाव दे  देता है जो ताउम्र नहीं भरता  उस घाव का  सड़ना, गलना  और ...
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गुरुवार, 2 दिसंबर 2021

736. मरजीना (10 क्षणिका)

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मरजीना  *******  1.  मरजीना  ***  मन का सागर दिन-ब-दिन और गहरा होता जा रहा    दिल की सीपियों में क़ैद मरजीना बाहर आने को बेकल    मैंने बिखेर...
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मंगलवार, 16 नवंबर 2021

735. हाँ! मैं बुरी हूँ

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हाँ! मैं बुरी हूँ  *** मैं बुरी हूँ    कुछ लोगों के लिए बुरी हूँ    वे कहते हैं-    मैं सदियों से मान्य रीति-रिवाजों का  पालन नहीं करती    म...
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मंगलवार, 12 अक्टूबर 2021

734. हथेली गरम-गरम

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हथेली गरम-गरम  *******  रात हो मतवाली-सी    सपने पके नरम-नरम    सुबह हो प्यारी-सी    दिन हो रेशम-रेशम    मन में चाहे ढेरों संशय    रस्ता दिख...
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गुरुवार, 2 सितंबर 2021

733. बेइख़्तियार हूँ (8 क्षणिका)

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बेइख़्तियार हूँ  ******* 1. बेइख़्तियार हूँ  ***  भावनाएँ और संवेदनाएँ    अपनी राह से भटक चुकी हैं    अब शब्दों में पनाह नहीं लेती    आँखों मे...
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रविवार, 18 जुलाई 2021

732. पापा

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पापा  *** ख़ुशियों में रफ़्तार है इक    सारे ग़म चलते रहे    तुम्हारे जाने के बाद भी    यह दुनिया चलती रही और हम चलते रहे    जीवन का बहुत लम्बा...
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रविवार, 4 जुलाई 2021

731. प्यारी नदियाँ (36 हाइकु)

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प्यारी नदियाँ (36 हाइकु) ***  1.  नद से मिली    भोरे-भोरे किरणें    छटा निराली।    2.  गंगा पावन     नहीं होती अपावन    भले हो मैली।    3.  ...
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शुक्रवार, 25 जून 2021

730. पखेरू (8 हाइकु)

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पखेरू  (8 हाइकु)  *** 1.  नील गगन    पुकारता रहता-    पाखी, तू आ जा!    2.  उड़ती फिरूँ    हवाओं-संग झूमूँ    बन पखेरू।    3.  कतरे पंख    प...
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सोमवार, 21 जून 2021

729. योग

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योग  *******  जीवन जीना सरल बहुत    अगर समझ लें लोग    करें सदा मनोयोग से    हर दिन थोड़ा योग।    हजारों सालों की विद्या    क्यों लगती अब ढों...
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रविवार, 20 जून 2021

728. ओ पापा!

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ओ पापा!  *******  ओ पापा!    तुम गए    साथ ले गए    मेरा आत्मबल    और छोड़ गए मेरे लिए    कँटीले-पथरीले रास्ते    जिसपर चलकर    मेरा पाँव ही...
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शुक्रवार, 18 जून 2021

727. एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है

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एक गुलमोहर का इन्तिज़ार है ***  उम्र के सारे वसन्त वार दिए    रेगिस्तान में फूल खिला दिए    जद्दोजहद चलती रही एक अदद घर की    रिश्तों को सँव...
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सोमवार, 14 जून 2021

726. स्मृति (11 हाइकु)

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स्मृति  (11 हाइकु) *** 1.  स्मृति में तुम    जैसे फैला आकाश    सुवासित मैं।    2.  क्षणिक प्रेम    देता बड़ा आघात    रोता है मन।    3.  अधूरी...
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बुधवार, 9 जून 2021

725. पुनर्जीवित

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पुनर्जीवित  ***  मैं पुनर्जीवित होना चाहती हूँ    अपने मन का करना चाहती हूँ    छूटते सम्बन्ध, टूटते रिश्ते    वापस पाना चाहती हूँ    वह सब, ...
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शनिवार, 5 जून 2021

724. पर्यावरण (20 हाइकु)

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पर्यावरण (20 हाइकु)  ***  1.  द्रौपदी-धरा    दुश्शासन मानव    चीर हरण।    2.  पाँचाली-सी भू    कन्हैया भेजो वस्त्र!    धरा निर्वस्त्र।    3....
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शुक्रवार, 4 जून 2021

723. जीने का करो जतन

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जीने का करो जतन  *******  काँटों की तक़दीर में, नहीं होती कोई चुभन    दर्द है फूलों के हिस्से, मगर नहीं देते जलन।    शमा तो जलती है हर रात, ग़...
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सोमवार, 31 मई 2021

722. सिगरेट (5 कविता)

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सिगरेट   *** 1.  अदना-सी सिगरेट (नवधा-197) ***  क्यों कहते हो कि उसे छोड़ दूँ  अदना-सी, वह क्या बिगाड़ती है तुम्हारा? मैंने समय इसके साथ ही गु...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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