लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

89. शब को दूर जाने दो (तुकांत) / shab ko door jaane do (tukaant)

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शब को दूर जाने दो ******* ज़िन्दगी को टूट जाने दो, कलम भी छूट जाने दो उसको जाने का बहाना चाहिए, रूठा है रूठ जाने दो ।   साझे एहसासों...
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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

88. शब ने पाले ही नहीं थे (तुकान्त) / shab ne paale hi nahin theye (tukaant)

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शब ने पाले ही नहीं थे ******* कुछ लम्हे ऐसे रूठ गए हैं, जैसे साथ कभी हम जिए ही नहीं थे यूँ कि कोई साथी छूट जाए, जैसे साथ कभी हम चले ही...
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रविवार, 11 अक्टूबर 2009

87. अनाम प्रेम कहानी / anaam prem kahani

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अनाम प्रेम कहानी ******* रिश्तों की बनी एक अनाम कहानी प्रेम ने रचा फिर एक नया इतिहास, बातें हुईं जो कल हमारी तुम्हारी महफ़ूज़ रखना सद...
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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

86. तुम्हारी अतियों से डरती हूँ / tumhaari atiyon se darti hun

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तुम्हारी अतियों से डरती हूँ ******* तुम्हारी अतियों से बहुत डरती हूँ चाहे तुम्हारा प्यार हो या ग़ुस्सा । जब प्यार में आसमान पर बिठाते...
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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

85. पुरातत्व और अवशेष / puraatatwa aur avshesh

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पुरातत्व और अवशेष *** तुम जानते हो, पुरातत्वों के ज्ञाता हो बुलन्द इमारत को खण्डहर बनने में सदियाँ गुज़रती हैं तुम पहचानते हो, प्राचीन ...
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सोमवार, 14 सितंबर 2009

84. उसका आख़िरी कलाम है (तुकान्त) / uska aakhiree kalaam hai (tukaant)

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उसका आख़िरी कलाम है ******* हर ख़्वाब मेरा वो पालता रहा, जो पल-पल मन मेरा चाहता रहा कितना जान-निसार वो इंसान है, मेरा सुकून उसकी ज़िन्...
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शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

83. किसी कोख में नहीं जाऊँगी माँ

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किसी कोख में नहीं जाऊँगी माँ *** अब तक न जाने कितने कोख से जबरन छीनी गई जीवन जीने की तमन्ना, हर बार बेबस कुचली गई जानती हूँ, बस थोड़ी...
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सोमवार, 7 सितंबर 2009

82. तुम्हें इंसान बना दिया

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तुम्हें इंसान बना दिया ******* सज़दे में झुक गया सिर जब रगों में इश्क़ पसर गया वक़्त की देने गवाही देखो! ख़ुदा भी ज़मीन पे उतर गया ।   ...
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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

81. ख़ुदा बना दिया (तुकान्त)

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ख़ुदा बना दिया ******* मिज़ाज कौन पूछे, जब ख़ुद नासाज़ हो ये सोच हमने, ख़ुद ही सब्र कर लिया ।   इश्क़ का जुनून, कैसे कोई जाने भला वो ज...
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बुधवार, 26 अगस्त 2009

80. आँखों में इश्क़ भर क्यों नहीं देते हो (तुकान्त)

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आँखों में इश्क भर क्यों नहीं देते हो ******* दावा करते तुम, आँखों को मेरी पढ़ लेते हो फिर दर्द मेरा तुम, समझ क्यों नहीं लेते हो ?   ...
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मंगलवार, 18 अगस्त 2009

79. हम दुनियादारी निभा रहे (तुकान्त)

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हम दुनियादारी निभा रहे ******* एक दुनिया, तुम अपनी चला रहे एक दुनिया, हम अपनी चला रहे ।   ख़ुदा तुम सँवारो दुनिया, बहिश्त-सा महज़ इ...
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मंगलवार, 11 अगस्त 2009

78. यही अर्ज़ होता है (तुकान्त)

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यही अर्ज़ होता है ******* मजरूह सही, ये दर्द-ए-इश्क़ का तर्ज़ होता है तजवीज़ न कीजिए, इंसान बड़ा ख़ुदगर्ज़ होता है ।   आप कहते हैं कि...
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गुरुवार, 6 अगस्त 2009

77. काश! हम ज़ंजीर बने न होते

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काश! हम ज़ंजीर बने न होते ******* नहीं मालूम कब हम प्रेम पथिक से, लौह-ज़ंजीर बनते चले गए वक़्त और ज़िन्दगी की भट्ठी में हमारे प्रेम क...
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सोमवार, 27 जुलाई 2009

76. उजाला पी लूँ (क्षणिका) / Ujaala pee loon (kshanika)

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उजाला पी लूँ  ******* चाहती हूँ दिन के उजाले की कुछ किरणें मुट्ठी में बंद कर लूँ जब घनी काली रातें लिपटकर डराती हों मुझे मुट्ठी खोल,...
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शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

75. काश! कोई ज़ंजीर होती (क्षणिका) / kaash! koi zanjeer hotee (kshanika)

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काश! कोई ज़ंजीर होती  ******* वीरान राहों पर तन्हा ख़ामोश चल रही हूँ थक गई हूँ टूट गई हूँ न जाने कैसी राह है ख़त्म नहीं होती समय की ...
बुधवार, 22 जुलाई 2009

74. शमा बुझ रही (तुकान्त)

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कुछ शेर हैं नज़्म-सा सही, नाम क्या दूँ ये पता भी नहीं, जो नाम दें आपकी मर्ज़ी, पेश है शमा पर मेरी एक अर्ज़ी शमा बुझ रही ******* शमा ...
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शनिवार, 18 जुलाई 2009

73. मेरी ज़िन्दगी

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मेरी ज़िन्दगी ******* ज़िन्दगी मेरी  कई रूप में सामने आती है ज़िन्दगी को पकड़ सकूँ दौड़ती हूँ, भागती हूँ, झपटती हूँ साबूत न सही कुछ...
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गुरुवार, 16 जुलाई 2009

72. नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए

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नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए ******* नेह-निमंत्रण तुम बिसरा गए फिर आस खोई तो क्या हुआ? सपनों के बिना भी हम जी लेंगे मेरा दिल टूटा तो क्या हुआ? ...
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71. कोई बात बने (अनुबन्ध/तुकान्त) (पुस्तक- नवधा)

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कोई बात बने *** ज़ख़्म गहरा हो औ ताज़ा मिले, तो कोई बात बने थोड़ी उदासी से, न कोई ग़ज़ल न कोई बात बने । दस्तूर-ए-ज़िन्दगी, अब मुझको न ब...
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शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

70. बुरी नज़र (क्षणिका)

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बुरी नज़र  ******* कुछ ख़ला-सी रह गई ज़िन्दगी में जाने किसकी बददुआ लग गई मुझको कहते थे सभी कि ख़ुद को बचा रखूँ बुरी नज़र से हमने तो ...
रविवार, 5 जुलाई 2009

69. 'शब' की मुराद (अनुबन्ध/तुकान्त)

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'शब' की मुराद *** 'शब' जब 'शव' बन जाए, उसको कुछ वक़्त रहने देना बेदस्तूर सही, सहर होने तक ठहरने देना । उम्र गु...
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शनिवार, 4 जुलाई 2009

68. आज़माया हमको (अनुबन्ध/तुकान्त)

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आज़माया हमको *** बेख़याली ने कहाँ-कहाँ न भटकाया हमको होश आया तो तन्हाई ने तड़पाया हमको । इस बाज़ार की रंगीनियाँ लुभाती नहीं हैं अब  ...
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2009

67. मुमकिन नहीं है (अनुबन्ध/तुकान्त)

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मुमकिन नहीं है *** परों को कतर देना अब तो ख़ुद ही लाज़िमी है वरना उड़ने की ख़्वाहिश, कभी मरती नहीं है ।  कोई अपना कहे, ये चाहत तो बहु...
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सोमवार, 29 जून 2009

66. आख़िर क्यों

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आख़िर क्यों ******* बेअख़्तियार दौड़ी थी जाने क्यों? कुछ पाने या खोने जाने क्यों? कुछ लम्हों की सौग़ात मिली साथ दर्द इक इनाम मिला, अ...
शुक्रवार, 26 जून 2009

65. सपनों के उपले

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सपनों के उपले ******* अपने सपनों से कुछ उपले बनाई हूँ, उपलों को सुलगाकर जीवन सेंक रही हूँ, कहीं मेरी ज़िन्दगी जम न जाए ।   मन को...
बुधवार, 24 जून 2009

64. कृष्ण! एक नई गीता लिखो

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कृष्ण! एक नई गीता लिखो *** फ़र्क़ नहीं पड़ता तुम्हें  जब निरीह मानवता, बेगुनाह मरती है फ़र्क़ पड़ता है तुम्हें  जब कोई तुम्हारे आगे सिर नहीं...
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शुक्रवार, 12 जून 2009

63. बारिश / Baarish

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बारिश ******* बारिश में भीगने से, हुई जो मेरी मनाही क्या करूँ, मदमस्त घनघोर घटा छा गयी, जाऊँ कहाँ, अब किस-किस घर में लूँ पनाह कहीं ज...
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गुरुवार, 4 जून 2009

62. ख़त

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ख़त ******* इबारत लिख प्रेम की लिफ़ाफ़े में रख, छुपा देती हूँ, भेजूँगी ख़त महबूब को ।     पन्नों से फिसल जाते हैं हर्फ़ और प्रेम क...
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शुक्रवार, 29 मई 2009

61. दफ़ना दो यारों (तुकान्त)

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दफ़ना दो यारों ******* चंदा की चाँदनी से रौशनी बिखरा गया कोई  हसीन हुई है रात, सिर्फ़ इतना देखो यारों, कौन बिखरा गया रंगीनी, ये न पूछो ...
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शुक्रवार, 22 मई 2009

60. राजनीति

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राजनीति ******* तिश्नगी राजनीति की, बड़ी तिलिस्मी होती है दफ़न मुर्दा जी पड़े (मिले जो कुर्सी), ऐसी ताक़त होती है ।     भाड़ में जाए दे...
गुरुवार, 21 मई 2009

59. ज़िन्दगी तमाम हो जाएगी

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ज़िन्दगी तमाम हो जाएगी ******* पल भर मिले लम्हा भर थमे क़दम भर भी तो साथ न चले, यूँ साथ हम चले ही कब थे? जो अब, न चलने का हुक्म देते ...
बुधवार, 20 मई 2009

58. कविता ख़ामोश हो गई है

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कविता ख़ामोश हो गई है ******** कविता पल-पल बनती है मन पर शाया होती है, उतार सकूँ काग़ज़ पर रोशनाई की पहचान, अब मुझसे नहीं होती । मन ...
बुधवार, 6 मई 2009

57. मेरी कविता में तुम ही तो हो

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मेरी कविता में तुम ही तो हो ******* तुम कहते, मेरी कविता में तुम नहीं होते हो । तुम नहीं, तो फिर, ये कौन होता है? मेरी कविता तुमसे ही...
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शुक्रवार, 1 मई 2009

56. आँखों में नमी तैरी है (क्षणिका)

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आँखों में नमी तैरी है *******   बदली घिर रही आसमान में, भादो तो आया नहीं धुंध पसर रही आँगन में, माघ तो आया नहीं मानो तपते जेठ की असह्य ...
सोमवार, 20 अप्रैल 2009

55. ख़ुद पर कैसे लिखूँ

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ख़ुद पर कैसे लिखूँ ******* कल पूछा किसी ने मैं दर्द के नग़्मे  लिखती हूँ किसका दर्द है, किसके ग़म में लिखती हूँ मेरा ग़म नहीं ये, फिर...
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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

54. न तुम भूले, न भूली मैं

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न तुम भूले, न भूली मैं ******* जिन-जिन राहों से होकर, मेरी तक़दीर चली थक-थककर तुम्हे ढूँढ़ा, जब जहाँ भी थमी बार-बार जाने क्यों, मैं ह...
गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

53. क्या बात करें (अनुबन्ध/तुकान्त)

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क्या बात करें *** सफ़र ज़िन्दगी का कटता नहीं एक रात की क्या बात करें ।   हाल पूछा नहीं कभी किसी ने ग़मे-दिल की क्या बात करें ।   दर...
बुधवार, 15 अप्रैल 2009

52. मैं और मछली (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 107)

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मैं और मछली ******* जल-बिन मछली की तड़प मेरी तड़प क्योंकर बन गई? उसकी आत्मा की पुकार मेरे आत्मा में जैसे समा गई । उसकी कराह, चीत्क...
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

51. रिश्तों का लिबास सहेजना होगा (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 91)

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रिश्तों का लिबास सहेजना होगा ******* रिश्तों के लिबास में, फिर एक खरोंच लगी पैबंद लगा के, कुछ दिन और ओढ़ना होगा ।   पहले तो छुप जाता...
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

50. रिश्तों की भीड़ (क्षणिका)

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रिश्तों की भीड़  ******* रिश्तों की भीड़ में प्यार गुम हो गया है प्यार ढूँढ़ती हूँ बस रिश्ते हाथ आते हैं ।   - जेन्नी शबनम (7. 4. 20...
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49. ज़िन्दगी एक बेशब्द किताब (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 92)

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ज़िन्दगी एक बेशब्द किताब ******* पन्नों से सिमट, ज़िन्दगी, हाशिए पर आ पहुँची हसरतें हाशिए से, किताब तक जा पहुँची, मालूम नहीं ज़िन्दगी...
रविवार, 5 अप्रैल 2009

48. वक़्त मिले न मिले (क्षणिका)

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वक़्त मिले न मिले  ******* जो भी लम्हा मिले, चुन-चुनकर बटोरती हूँ दामन में अपने जतन से सहेजती हूँ, न जाने फिर कभी वक़्त मिले न मिले ।...
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मंगलवार, 31 मार्च 2009

47. बीती यादें

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बीती यादें ******* याद आता है वो लम्हा बार-बार जब तुमने अपने दिल की बात कही थी मैंने तुम्हें सिर्फ़ देखा उत्तर न तो 'ना' था...

46. चुनाव! नेता!

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चुनाव! नेता! ******* राजनीति का दामन थामे, चलते कूटनीति की चाल बड़ा कठिन है समझना इनको, चलते ऐसी-ऐसी चाल ।        पूरे औरत-मर्द और आ...
सोमवार, 30 मार्च 2009

45. कामना

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कामना ******* चाहती हूँ तुम देखो ज़िन्दगी मेरी नज़रों से मेरी चाहतों से मेरी समस्त कामनाओं से ।    समझ सकोगे तुम कैसे? तुम पुरुष ...
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शुक्रवार, 27 मार्च 2009

44. हँसी, ख़ुशी और ज़िन्दगी बेकार है पड़ी (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 103)

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हँसी, ख़ुशी और ज़िन्दगी बेकार है पड़ी ******* हँसी बेकार पड़ी है, यूँ ही कोने में कहीं ख़ुशी ग़मगीन रखी है, ज़ीने में कहीं ज़िन्दगी ग...
बुधवार, 25 मार्च 2009

43. अपंगता (क्षणिका)

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अपंगता ******* एक अपंगता होती तन की जिसे मिलती बहुत करुणा, जग की ।    एक अपंगता होती मन की जिसे नहीं मिलती संवेदना, जग की ।    तन की व्य...
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मंगलवार, 24 मार्च 2009

42. दुआ (क्षणिका)

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दुआ  *******   कोई शख्स ज़ख़्म देता, कुरेदकर नासूर बनाता फिर कहता- "अल्लाह! उसे जन्नत बख़्श दो!" क्या कहूँ उस ज़ालिम को  अज़ीज़ या रक़...
सोमवार, 23 मार्च 2009

41. यकीन

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यकीन ******* चाहती हूँ, यकीन कर लूँ तुम पर और अपने आप पर ख़ुदा की गवाही का भ्रम और तुमसे बाबस्ता मेरी ज़िन्दगी दोनों ही तक़दीर है । ...
रविवार, 22 मार्च 2009

40. बुत और काया (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 101)

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बुत और काया ******* ख़यालों के बुत ने अरमान के होंठों को चूम लिया, काले लिबास-सी वो रात तमन्नाओं की रौशनी में नहा गई ।   बुत की रूह ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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