लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

212. एक स्वप्न की तरह

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एक स्वप्न की तरह ******* बनते-बनते जाने कैसे मैं कई सवाल बन गई हूँ    जिनके जवाब सिर्फ़ तुम्हारे पास हैं  पर तुम बताओगे नहीं मैं यह भी ज...
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सोमवार, 31 जनवरी 2011

211. तय था (पुस्तक- 28)

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तय था *** तय था प्रेम का बिरवा लगाएँगे फूल खिलेंगे और सुगंध से भर देंगे एक दूजे का दामन हम । तय तो था अंजुरी में भर, खुशिया लुटाए...
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शनिवार, 29 जनवरी 2011

210. आधा-आधा (क्षणिका)

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आधा-आधा ******* तेरे पास वक़्त कम ज़िन्दगी बहुत मेरे पास ज़िन्दगी कम वक़्त बहुत आओ आधा-आधा बाँट लें, पूरा-पूरा जी लें । - जेन्नी शबनम...
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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

209. दस्तावेज़ (क्षणिका)

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दस्तावेज़ ******* ज़िन्दगी एहसासों का दस्तावेज़ है पल-पल हर्फ़ में पिरो दिया शायद कभी कोई पढ़े मुझे भी ।   - जेन्नी शबनम (26. 1. 2011)...
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बुधवार, 26 जनवरी 2011

208. पिघलती शब

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पिघलती शब ******* उन कुछ पलों में जब अग्नि के साथ मैं भी दहक रही थी तुम कह बैठे - क्यों उदास रहती हो? मुझसे बाँट लिया करो न अपना अके...
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रविवार, 23 जनवरी 2011

207. पाप तो नहीं

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पाप तो नहीं *** जीवन के मायने हैं  जीवित होना या जीवित रहना ।   क्या सिर्फ़ साँसें ही तक़ाज़ा हैं?   फिर क्यों दर्द से व्याकुल होता है म...
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206. मर्द ने कहा (पुस्तक पेज - 68)

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मर्द ने कहा ******* मर्द ने कहा - ऐ औरत! ख़ामोश होकर मेरी बात सुन जो कहता हूँ वही कर मेरे घर में रहना है, तो अपनी औक़ात में रह मेरे ...
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गुरुवार, 20 जनवरी 2011

205. तुम्हारा कंधा

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तुम्हारा कंधा ******* अपना कंधा एक दिन उधार दे देना मुझे उस दिन अपना वक़्त जैसे दिया था तुमने तमाम सपनों की टूटन का दर्द जो पिघलता ...
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मंगलवार, 18 जनवरी 2011

204. अब मान ही लेना है

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अब मान ही लेना है  *******  तुम बहुत आगे निकल गए    मैं बहुत पीछे छूट गई    कैसे दिखाऊँ तुम्हें    मेरे पाँव के छाले,    तुम्हारे पीछे भागते...
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बुधवार, 12 जनवरी 2011

203. संकल्प

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संकल्प ******* चलते-चलते उस पुलिया पर चली गई जहाँ से कई बार गुज़र चुकी हूँ और अभी-अभी पटरी पर से एक रेलगाड़ी गुज़री है ।   ठण्ड की ...
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सोमवार, 10 जनवरी 2011

202. तुममें अपनी ज़िन्दगी

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तुममें अपनी ज़िन्दगी ******* सोचती हूँ कैसे तय किया होगा तुमने ज़िन्दगी का वो सफ़र जब तन्हा ख़ुद में जी रहे थे  और ख़ुद से ही एक लड़ाई ल...
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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

201. नए साल में मेरा चाँद (क्षणिका)

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नए साल में मेरा चाँद ******* चाँद के दीदार को हम तरस गए अल्लाह! अमावास का अंत क्यों नहीं होता? मुमकिन है नया साल चाँद से रूबरू करा ज...
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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

200. हर लम्हा सबने उसे (तुकांत)

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हर लम्हा सबने उसे ******* मुद्दतों की तमन्नाओं को, मरते देखा मानों आसमाँ से तारा कोई, गिरते देखा ।   मिलती नहीं राह मुकम्मल, जिधर जा...
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सोमवार, 3 जनवरी 2011

199. अनाम भले हो

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अनाम भले हो ******* तुम्हारी बाहें थाम  पार कर ली रास्ता तनिक तो संकोच होगा  भरोसा भले हो ।   नहीं होता आसान  आँखें मूँद चलना कुछ त...
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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

198. एक टुकड़ा पल

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एक टुकड़ा पल ******* उस मुलाक़ात में तुम दे गए, अपने वक़्त का एक टुकड़ा और ले गए, मेरे वक़्त का एक टुकड़ा ।   तुम्हारा वो टुकड़ा म...
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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

197. तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया

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तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ******* चाह थी मेरी तीन पल में सिमट जाए दूरियाँ हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ।   बाहे...
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शनिवार, 18 दिसंबर 2010

196. जादू की एक अदृश्य छड़ी

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जादू की एक अदृश्य छड़ी *** तुम्हारे हाथ में रहती है जादू की एक अदृश्य छड़ी जिसे घुमाकर करते हो अपनी मनचाही हर कामना पूरी और रचते हो अ...
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रविवार, 12 दिसंबर 2010

195. मेरे साथ-साथ चलो

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मेरे साथ-साथ चलो ******* तुम कहते हो तो चलो पर एक क़दम फ़ासले पर नहीं मेरे साथ-साथ चलो, मुझे भी देखनी है वो दुनिया जहाँ तुम पूर्णता स...
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194. हार (क्षणिका)

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हर हार मुझे और हराती है ******* आज मैं ख़ाली-ख़ाली-सी हूँ, अपने अतीत को टटोल रही तमाम चेष्टा के बाद भी बिखरने से रोक न पायी नहीं मालूम ज...
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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

193. तुम्हारा कहा क्या टाला मैंने

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तुम्हारा कहा क्या टाला मैंने ******* तुम कहते हो हँसती रहा करो दुनिया ख़ूबसूरत है जिया करो कभी आकर देख भी जाओ तुम्हारा कहा क्या टाला ...
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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

192. चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा

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चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा  *** ज़िन्दगी और सपनों के चारों तरफ़  ऊँची चहारदीवारी  जन्म लेते ही तोहफ़े में मिलती है तमाम उम्र उसी में क़ैद रहन...
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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

191. न आओ तुम सपनों में

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न आओ तुम सपनों में ******* क्यों आते हो सपनों में बार-बार जानते हो न मेरी नियति क्यों बढ़ाते हो मेरी मुश्किलें जानते हो न मेरी स्थित...
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बुधवार, 1 दिसंबर 2010

190. अपनों का अजनबी बनना

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अपनों का अजनबी बनना *** समीप की दो समानान्तर राहें कहीं-न-कहीं किसी मोड़ पर मिल जाती हैं दो अजनबी साथ हों  तो कभी-न-कभी अपने बन जाते ...
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रविवार, 14 नवंबर 2010

189. कैसा लगता होगा

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कैसा लगता होगा ******* कैसा लगता होगा जब किसी घर में अम्मा-बाबा संग  बिटिया रहती है कैसा लगता होगा जब अम्मा कौर-कौर  बिटिया को खिलाती...
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शनिवार, 13 नवंबर 2010

188. रचती हूँ अपनी कविता (क्षणिका)

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रचती हूँ अपनी कविता ******* दर्द का आलम यूँ ही नहीं होता लिखना ज़ख़्म को नासूर बना होता है दर्द जीना कैसे कहूँ, कब किसके दर्द को जिया...
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बुधवार, 10 नवंबर 2010

187. आदमी और जानवर की बात

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आदमी और जानवर की बात *** रौशन शहर, चहकते लोग आदमी की भीड़, अपार शोर शुभ आगमन की तैयारी पूरी रात्रि पहर घर आएगी समृद्धि ।   पर जाने...
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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

186. जागता-सा कोई एक पहर जारी है (तुकांत)

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जागता-सा कोई एक पहर जारी है ******* रात बीती और तमन्ना जागने लगी, ये दहर जारी है क़यामत से कब हो सामना, सोच में वो क़हर जारी है ।   म...
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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

185. किसी बोल ने चीर तड़पाया (तुकांत)

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किसी बोल ने चीर तड़पाया ******* पोर-पोर में पीर समाया किसने है ये तीर चुभाया ।     मन का हाल नहीं पूछा और पूछा किसने धीर चुराया ।  ...
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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

184. पहला और आख़िरी वरदान

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पहला और आख़िरी वरदान *** वह हठी ये क्या कर गया विष माँगा, वह अमृत चखा गया एक बूँद अमृत, हलक़ में उतार गया आह! ये कैसा ज़ुल्म कर गया।  ...
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बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

183. देव

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देव *** देव! देव! देव! तुम कहाँ हो, क्यों चले गए? एक क्षण को न ठिठके तुम्हारे पाँव अबोध शिशु पर क्या ममत्व न उमड़ा क्या इतनी भी सुध ...
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शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

182. नहीं होता अभिनन्दन (क्षणिका)/ nahin hota abhinandan (kshanikaa)

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नहीं होता अभिनन्दन ******* सहज जीवन मन का बंधन पार होने की चाह निराशा और क्रंदन अनवरत प्रयास विफलता और रुदन असह्य प्रतिफल नहीं होता ...
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रविवार, 10 अक्टूबर 2010

181. रूह का सफ़र

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रूह का सफ़र ******* इस जीवन के बाद एक और जीवन की चाह, रूहानी इश्क़ का ख्व़ाब है न अजब यह ख़याल! क्या पता क्या हो रूह हो या कि सब स...
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शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2010

180. अपने पाँव / apne paanv

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अपने पाँव ******* क्या बस इतना ही और सब ख़त्म! एक क़दम भी नहीं और सफ़र का अंत! उम्मीद नहीं अब चल पाऊँगी पहुँच पाऊँगी दुनिया के उस ...
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मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010

179. स्याह अँधेरों में न जाना तुम / syaah andheron mein na jana tum

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स्याह अँधेरों में न जाना तुम ******* वो कहता जाने क्यों कहता? स्याह अँधेरों में न जाना तुम उदासी कभी भी न ओढ़ना तुम भोर की लालिमा...
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बुधवार, 29 सितंबर 2010

178. हँसी / Hansi (आशु कविता)

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ऑरकुट पर अपनी दूसरी प्रोफाइल बनाते वक़्त यह रचना लिखी ।  मैं बोलती गई और मेरा बेटा टाइप करता गया, क्योंकि एक शब्द भी टाइप करने में मैं बहुत व...
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रविवार, 26 सितंबर 2010

177. दम्भ हर बार टूटा / dambh har baar toota (क्षणिका)

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दम्भ हर बार टूटा ******* रिश्ते बँध नहीं सकते, जैसे वक़्त नहीं बँधता पर रिश्ते रुक सकते हैं, वक़्त नहीं रुकता फिर भी कुछ तो है समानता ...
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बुधवार, 22 सितंबर 2010

176. पलाश के बीज / गुलमोहर के फूल / palaash ke beej / gulmohar ke phool (पुस्तक - 21)

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पलाश के बीज / गुलमोहर के फूल ******* याद है तुम्हें उस रोज़ चलते-चलते राह के अंतिम छोर तक पहुँच गए थे हम सामने एक पुराना-सा मकान ज...
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सोमवार, 20 सितंबर 2010

175. प्रिय है मुझे मेरा पागलपन / priye hai mujhe mera pagalpan

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प्रिय है मुझे मेरा पागलपन ******* क़ुदरत की बैसाखी मिली मैं जी सकूँ ये क़िस्मत मेरी इसीलिए ख़ुद से ज़्यादा  प्रिय है मुझे मेरा पागलपन ।   ...
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बुधवार, 15 सितंबर 2010

174. मन भी झुलस जाता है (क्षणिका) / mann bhi jhulas jata hai (kshanikaa)

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मन भी झुलस जाता है ******* मेरे इंतिज़ार की इंतिहा देखते हो या अपनी बेरुख़ी से ख़ुद ख़ौफ़ खाते हो नहीं मालूम क्यों हुआ, पर कुछ तो हुआ है ...
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मंगलवार, 14 सितंबर 2010

173. अज्ञात शून्यता / agyaat shoonyata (पुस्तक - 109)

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अज्ञात शून्यता ******* एक शून्यता में प्रवेश कर गई हूँ या कि मुझमें शून्यता प्रवाहित हो गई है, थाह नहीं मिलता  किधर खो गई हूँ या जान...
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मंगलवार, 7 सितंबर 2010

172. नज़्म को ठुकरा दिए वो / nazm ko thukra diye wo (तुकांत)

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नज़्म को ठुकरा दिए वो ******* सवाल-ए-वस्ल पर, मुस्कुरा दिए वो हर बार हमें रुलाके, बिखरा दिए वो । शायरी में नज़्म कहके, सजाया हमें अब ...
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रविवार, 5 सितंबर 2010

171. मेरी दुनिया / meri duniya (क्षणिका)

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मेरी दुनिया ******* यथार्थ से परे, स्वप्न से दूर क्या कोई दुनिया होती है? शायद मेरी दुनिया होती है ।   एक भ्रम अपनों का, एक भ्रम जीन...
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शनिवार, 4 सितंबर 2010

170. अंतिम पड़ाव अंतिम सफ़र / antim padaav antim safar

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अंतिम पड़ाव अंतिम सफ़र ******* जाने कैसा भटकाव था, या कि कोई पड़ाव था नहीं मालूम क्या था, पर न जाने क्यों था मुमकिन कि वहीं ठहर गई, या ...
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शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

169. छोटी-सी चिड़िया / chhoti-see chidiya

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छोटी-सी चिड़िया ******* स्वरचित घोंसले में अपने दाना-पानी जोड़, जीवन भर का थी निश्चिन्त, छोटी-सी चिड़िया । सोचा, अब चैन से जी लूँ ज़र...
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बुधवार, 1 सितंबर 2010

168. क्या मैं आज़ाद हूँ / Kya main aazaad hoon

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क्या मैं आज़ाद हूँ *** "क्या मैं आज़ाद हूँ?" यह प्रश्न अनुत्तरित है और एहसास अन्तस् की अव्यक्त पीड़ा महज़ सीमित हैं  संविधान ...
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शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

167. देह, अग्नि और आत्मा... जाने कौन चिरायु / Deh, Agni aur Aatma... jaane koun chiraayu (पुस्तक- नवधा)

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देह, अग्नि और आत्मा... जाने कौन चिरायु *** जलती लकड़ी पर जल डाल दें अग्नि बुझ जाती है और धुआँ उठता है राख शेष रह जाती है और कुछ अधजले...
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रविवार, 22 अगस्त 2010

166. इकन्नी-दुअन्नी और मैं चलन में नहीं / ikanni duanni aur main chalan mein nahin (पुस्तक - लम्हों का सफ़र - 43)

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इकन्नी-दुअन्नी और मैं चलन में नहीं ******* वो गुल्लक फोड़ दी जिसमें एक पैसे दो पैसे, मैं भरती थी, तीन पैसे और पाँच पैसे भी थे, थोड़े ...
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मंगलवार, 17 अगस्त 2010

165. जीवन की अभिलाषा / jivan ki abhilasha

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जीवन की अभिलाषा ******* कोई अनजाना जो है अनदेखा सुन लेता समझ लेता लिख जाता पढ़ जाता कह देता वह सब जो मेरे मन ने था चाहा ।   भला कै...
6 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 9 अगस्त 2010

164. काँटा भी एक चुभा देगा / kaanta bhi ek chubha dega

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काँटा भी एक चुभा देगा ******* हौले से काँटा भी एक चुभा देगा हाथ में जब कोई फूल थमा देगा, आह निकले तो हाथ थाम लेगा फिर धीमे से वो ज़ख़...
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163. मैं कितनी पागल हूँ न / main kitni paagal hun na

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मैं कितनी पागल हूँ न ******* मैं कितनी पागल हूँ न! तुम्हारा हाल भी नहीं पूछी और तपाक से माँग कर बैठी - एक छोटा चाँद ला दो न अपने सं...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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