लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

223. प्रवासी मन (प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु)

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प्रवासी मन (प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु) *** 1. लौटता कहाँ मेरा प्रवासी मन कोई न घर। 2. कुछ ख्व़ाहिशें फलीभूत न होतीं  सदियाँ बीती। ...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

222. आदम और हव्वा

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आदम और हव्वा *** क़ुदरत की कारस्तानी है स्त्री-पुरुष की कहानी है फल खाकर आदम-हव्वा ने की ग़ज़ब नादानी है ।   चालाकी क़ुदरत की या आदम-ह...
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बुधवार, 16 मार्च 2011

221. ये कैसी निशानी है (पुस्तक - 42)

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ये कैसी निशानी है ******* उम्र की स्लेट पर, वक़्त ने कुछ लकीरें खींच दी हैं  सारे हर्फ़ उलट-पलट हैं जैसा कि उस दिन हुआ था जब हाथ में...
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रविवार, 13 मार्च 2011

220. कब उजास होता है (तुकांत)

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कब उजास होता है ******* जाने कौन है जो आस पास होता है दर्द यूँ ही तो नहीं ख़ास होता है । बहकते क़दमों को भला रोकें कैसे हर तरफ़ उनका ...
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शुक्रवार, 11 मार्च 2011

219. चलते रहें हम

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चलते रहें हम ******* दूर आसमान के पार तक या धरती के अंतिम छोर तक हाथ थामे चलते रहें हम । आओ कोई गीत गाएँ  प्रेम की बात करें चलो यू...
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गुरुवार, 10 मार्च 2011

218. तुम शामिल हो (पुस्तक - 26)

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तुम शामिल हो ******* तुम शामिल हो मेरी ज़िंदगी की  कविता में... कभी बयार बनकर जो कल रात चुपके से घुस आई, झरोखे से और मेरे बदन से लि...
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मंगलवार, 8 मार्च 2011

217. आज़ादी चाहती हूँ बदला नहीं

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आज़ादी चाहती हूँ बदला नहीं *** तुम कहते हो- ‘’अपनी क़ैद से आज़ाद हो जाओ।’’ बँधे हाथ मेरे, सींखचे कैसे तोडूँ ? जानती हूँ, उनके साथ मुझमें भी ज़...
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रविवार, 6 मार्च 2011

216. क्यों होती है आहत

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क्यों होती है आहत ******* लपलपाती ज़बाँ ने जाने क्या कहा थर्रा उठी वो बीच सड़क गुज़र गए कई लोग बगल से मुस्कुराकर यूँ जैसे देख लिया ह...
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शनिवार, 5 मार्च 2011

215. और कर ली पूरी मुराद

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और कर ली पूरी मुराद ******* वक़्त से माँग लायी अपने लिए कुछ चोरी के लम्हात मन किया जी लूँ ज़रा बेफ़िक्र पा लूँ कुछ अनोखे एहसास । कम ...
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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

214. ज़ख़्मी पहर

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ज़ख़्मी पहर ******* वक़्त का एक ज़ख़्मी पहर लहू संग ज़ेहन में समाकर जकड़ लिया है मेरी सोच । कुछ बोलूँ वो पहर अपने ज़ख़्म से रंग देता है ...
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सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

213. यह सब इत्तिफ़ाक़ नहीं

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यह सब इत्तिफ़ाक़ नहीं ******* कई लम्हे जो चुपके से मेरे हवाले किये तुमने और कुछ पल चुरा लिए ज़माने से हमने । इतना जानती हूँ यह सब इत्तिफ़ाक़ नह...
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रविवार, 13 फ़रवरी 2011

212. एक स्वप्न की तरह

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एक स्वप्न की तरह ******* बनते-बनते जाने कैसे मैं कई सवाल बन गई हूँ    जिनके जवाब सिर्फ़ तुम्हारे पास हैं  पर तुम बताओगे नहीं मैं यह भी ज...
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सोमवार, 31 जनवरी 2011

211. तय था (पुस्तक- 28)

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तय था *** तय था प्रेम का बिरवा लगाएँगे फूल खिलेंगे और सुगंध से भर देंगे एक दूजे का दामन हम । तय तो था अंजुरी में भर, खुशिया लुटाए...
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शनिवार, 29 जनवरी 2011

210. आधा-आधा (क्षणिका)

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आधा-आधा ******* तेरे पास वक़्त कम ज़िन्दगी बहुत मेरे पास ज़िन्दगी कम वक़्त बहुत आओ आधा-आधा बाँट लें, पूरा-पूरा जी लें । - जेन्नी शबनम...
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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

209. दस्तावेज़ (क्षणिका)

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दस्तावेज़ ******* ज़िन्दगी एहसासों का दस्तावेज़ है पल-पल हर्फ़ में पिरो दिया शायद कभी कोई पढ़े मुझे भी ।   - जेन्नी शबनम (26. 1. 2011)...
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बुधवार, 26 जनवरी 2011

208. पिघलती शब

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पिघलती शब ******* उन कुछ पलों में जब अग्नि के साथ मैं भी दहक रही थी तुम कह बैठे - क्यों उदास रहती हो? मुझसे बाँट लिया करो न अपना अके...
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रविवार, 23 जनवरी 2011

207. पाप तो नहीं

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पाप तो नहीं *** जीवन के मायने हैं  जीवित होना या जीवित रहना ।   क्या सिर्फ़ साँसें ही तक़ाज़ा हैं?   फिर क्यों दर्द से व्याकुल होता है म...
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206. मर्द ने कहा (पुस्तक पेज - 68)

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मर्द ने कहा ******* मर्द ने कहा - ऐ औरत! ख़ामोश होकर मेरी बात सुन जो कहता हूँ वही कर मेरे घर में रहना है, तो अपनी औक़ात में रह मेरे ...
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गुरुवार, 20 जनवरी 2011

205. तुम्हारा कंधा

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तुम्हारा कंधा ******* अपना कंधा एक दिन उधार दे देना मुझे उस दिन अपना वक़्त जैसे दिया था तुमने तमाम सपनों की टूटन का दर्द जो पिघलता ...
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मंगलवार, 18 जनवरी 2011

204. अब मान ही लेना है

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अब मान ही लेना है  *******  तुम बहुत आगे निकल गए    मैं बहुत पीछे छूट गई    कैसे दिखाऊँ तुम्हें    मेरे पाँव के छाले,    तुम्हारे पीछे भागते...
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बुधवार, 12 जनवरी 2011

203. संकल्प

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संकल्प ******* चलते-चलते उस पुलिया पर चली गई जहाँ से कई बार गुज़र चुकी हूँ और अभी-अभी पटरी पर से एक रेलगाड़ी गुज़री है ।   ठण्ड की ...
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सोमवार, 10 जनवरी 2011

202. तुममें अपनी ज़िन्दगी

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तुममें अपनी ज़िन्दगी ******* सोचती हूँ कैसे तय किया होगा तुमने ज़िन्दगी का वो सफ़र जब तन्हा ख़ुद में जी रहे थे  और ख़ुद से ही एक लड़ाई ल...
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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

201. नए साल में मेरा चाँद (क्षणिका)

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नए साल में मेरा चाँद ******* चाँद के दीदार को हम तरस गए अल्लाह! अमावास का अंत क्यों नहीं होता? मुमकिन है नया साल चाँद से रूबरू करा ज...
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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

200. हर लम्हा सबने उसे (तुकांत)

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हर लम्हा सबने उसे ******* मुद्दतों की तमन्नाओं को, मरते देखा मानों आसमाँ से तारा कोई, गिरते देखा ।   मिलती नहीं राह मुकम्मल, जिधर जा...
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सोमवार, 3 जनवरी 2011

199. अनाम भले हो

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अनाम भले हो ******* तुम्हारी बाहें थाम  पार कर ली रास्ता तनिक तो संकोच होगा  भरोसा भले हो ।   नहीं होता आसान  आँखें मूँद चलना कुछ त...
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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

198. एक टुकड़ा पल

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एक टुकड़ा पल ******* उस मुलाक़ात में तुम दे गए, अपने वक़्त का एक टुकड़ा और ले गए, मेरे वक़्त का एक टुकड़ा ।   तुम्हारा वो टुकड़ा म...
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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

197. तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया

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तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ******* चाह थी मेरी तीन पल में सिमट जाए दूरियाँ हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ।   बाहे...
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शनिवार, 18 दिसंबर 2010

196. जादू की एक अदृश्य छड़ी

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जादू की एक अदृश्य छड़ी *** तुम्हारे हाथ में रहती है जादू की एक अदृश्य छड़ी जिसे घुमाकर करते हो अपनी मनचाही हर कामना पूरी और रचते हो अ...
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रविवार, 12 दिसंबर 2010

195. मेरे साथ-साथ चलो

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मेरे साथ-साथ चलो ******* तुम कहते हो तो चलो पर एक क़दम फ़ासले पर नहीं मेरे साथ-साथ चलो, मुझे भी देखनी है वो दुनिया जहाँ तुम पूर्णता स...
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194. हार (क्षणिका)

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हर हार मुझे और हराती है ******* आज मैं ख़ाली-ख़ाली-सी हूँ, अपने अतीत को टटोल रही तमाम चेष्टा के बाद भी बिखरने से रोक न पायी नहीं मालूम ज...
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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

193. तुम्हारा कहा क्या टाला मैंने

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तुम्हारा कहा क्या टाला मैंने ******* तुम कहते हो हँसती रहा करो दुनिया ख़ूबसूरत है जिया करो कभी आकर देख भी जाओ तुम्हारा कहा क्या टाला ...
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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

192. चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा

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चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा  *** ज़िन्दगी और सपनों के चारों तरफ़  ऊँची चहारदीवारी  जन्म लेते ही तोहफ़े में मिलती है तमाम उम्र उसी में क़ैद रहन...
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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

191. न आओ तुम सपनों में

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न आओ तुम सपनों में ******* क्यों आते हो सपनों में बार-बार जानते हो न मेरी नियति क्यों बढ़ाते हो मेरी मुश्किलें जानते हो न मेरी स्थित...
10 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 1 दिसंबर 2010

190. अपनों का अजनबी बनना

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अपनों का अजनबी बनना *** समीप की दो समानान्तर राहें कहीं-न-कहीं किसी मोड़ पर मिल जाती हैं दो अजनबी साथ हों  तो कभी-न-कभी अपने बन जाते ...
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रविवार, 14 नवंबर 2010

189. कैसा लगता होगा

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कैसा लगता होगा ******* कैसा लगता होगा जब किसी घर में अम्मा-बाबा संग  बिटिया रहती है कैसा लगता होगा जब अम्मा कौर-कौर  बिटिया को खिलाती...
8 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 13 नवंबर 2010

188. रचती हूँ अपनी कविता (क्षणिका)

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रचती हूँ अपनी कविता ******* दर्द का आलम यूँ ही नहीं होता लिखना ज़ख़्म को नासूर बना होता है दर्द जीना कैसे कहूँ, कब किसके दर्द को जिया...
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बुधवार, 10 नवंबर 2010

187. आदमी और जानवर की बात

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आदमी और जानवर की बात *** रौशन शहर, चहकते लोग आदमी की भीड़, अपार शोर शुभ आगमन की तैयारी पूरी रात्रि पहर घर आएगी समृद्धि ।   पर जाने...
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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

186. जागता-सा कोई एक पहर जारी है (तुकांत)

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जागता-सा कोई एक पहर जारी है ******* रात बीती और तमन्ना जागने लगी, ये दहर जारी है क़यामत से कब हो सामना, सोच में वो क़हर जारी है ।   म...
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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

185. किसी बोल ने चीर तड़पाया (तुकांत)

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किसी बोल ने चीर तड़पाया ******* पोर-पोर में पीर समाया किसने है ये तीर चुभाया ।     मन का हाल नहीं पूछा और पूछा किसने धीर चुराया ।  ...
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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

184. पहला और आख़िरी वरदान

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पहला और आख़िरी वरदान *** वह हठी ये क्या कर गया विष माँगा, वह अमृत चखा गया एक बूँद अमृत, हलक़ में उतार गया आह! ये कैसा ज़ुल्म कर गया।  ...
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बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

183. देव

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देव *** देव! देव! देव! तुम कहाँ हो, क्यों चले गए? एक क्षण को न ठिठके तुम्हारे पाँव अबोध शिशु पर क्या ममत्व न उमड़ा क्या इतनी भी सुध ...
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शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

182. नहीं होता अभिनन्दन (क्षणिका)/ nahin hota abhinandan (kshanikaa)

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नहीं होता अभिनन्दन ******* सहज जीवन मन का बंधन पार होने की चाह निराशा और क्रंदन अनवरत प्रयास विफलता और रुदन असह्य प्रतिफल नहीं होता ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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