लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

291. मुक्ति पा सकूँ

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मुक्ति पा सकूँ *** मस्तिष्क के जिस हिस्से में विचार पनपते हैं जी चाहता है, उसे काटकर फेंक दूँ न कोई भाव जन्म लेंगे, न कोई सृजन होगा ।...
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सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

290. तब हुआ अबेर (क्षणिका)

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तब हुआ अबेर ******* जब मिला बेर, तब हुआ अबेर मचा कोलाहल, चित्र दिया उकेर छटपटाया मन, शब्द दिया बिखेर बिछा सन्नाटा, अब जगा अँधेर ...
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गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

289. मेरी हथेली

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मेरी हथेली *******  अपनी एक हथेली तुम्हें सौंप आई जब तुमसे मिली थी  जिसकी लकीरों में है मेरी तक़दीर  और मेरी तक़दीर सँवारने की तजवीज़ ...
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मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

288. भस्म होती हूँ (क्षणिका)

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भस्म होती हूँ ******* अक्सर सोचकर हत्प्रभ हो जाती हूँ चूड़ियों की खनक हाथों से निकल चेहरे तक कैसे पहुँच जाती है? झुलसता मन अपना रंग ...
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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

287. अपशगुन

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अपशगुन ******* उस दिन तुम जा रहे थे कई बार आवाज़ दी कि तुम मुड़ो और मैं हाथ हिलाकर तुम्हें विदा करूँ, लौटने पर तुम कितना नाराज़ हुए ...
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शनिवार, 24 सितंबर 2011

286. ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं (तुकांत)

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ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं ******* चलते-चलते मैं चलती रही, ज़िन्दगी कभी ठहरी नहीं ख़ुद को जब रोक के देखा, ज़िन्दगी तो बढ़ी ही नहीं ।  क़िस्म...
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बुधवार, 21 सितंबर 2011

285. मैं तेरी सूरजमुखी

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मैं तेरी सूरजमुखी ******* ओ मेरे सूरज मैं तेरी सूरजमुखी (सूर्यमुखी) बाट जोहते-जोहते मुर्झाने लगी कई दिनों से तू आया नहीं जाने कौन-स...
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गुरुवार, 15 सितंबर 2011

284. चाँद-सितारे / chaand-sitaare

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चाँद-सितारे ******* बचपन में जब चाँद-सितारों के लिए मचलती थी अम्मा फ़्राक में ज़री-गोटे से, चाँद-तारे टाँक देती थी बाबा चाँद-सी गोल चौ...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2011

283. अभिवादन की औपचारिकता

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अभिवादन की औपचारिकता *** अभिवादन में पूछते हैं आप कैसी हो ? क्या हाल है ? सब ठीक है न ? करती हूँ मैं अविलम्ब  निःसंवेदि...
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सोमवार, 12 सितंबर 2011

282. लौट चलते हैं अपने गाँव

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लौट चलते हैं अपने गाँव *** मन उचट गया है शहर के सूनेपन से अब डर लगने लगा है भीड़ की बस्ती में अपने ठहरेपन से।    चलो लौट चलते हैं अप...
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

281. अनुबन्ध

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अनुबन्ध *** एक अनुबन्ध है जन्म और मृत्यु के बीच कभी साथ-साथ घटित न होना एक अनुबन्ध है प्रेम और घृणा के बीच कभी साथ-साथ फलित न होना  ...
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मंगलवार, 6 सितंबर 2011

280. जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ

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जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ ******* मन में कुछ दरक-सा जाता है जब क्षितिज पर अस्त होता सूरज देखती हूँ ज़िन्दगी बार-बार डराती है जब भी तन्हा ...
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शनिवार, 3 सितंबर 2011

279. दर्द की मियाद और कितनी है (क्षणिका)

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दर्द की मियाद और कितनी है ******* कोई भी दर्द उम्र से पहले ख़त्म नहीं होता किससे पूछूँ कि दर्द की मियाद और कितनी है ।  - जेन्नी शबनम...
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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

278. फ़िज़ूल हैं अब (क्षणिका)

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फ़िज़ूल हैं अब ******* फ़िज़ूल हैं अब इसलिए नहीं कि सब जान लिया इसलिए कि जीवन बेमक़सद लगता है जैसे चलती हुई साँसें या फिर बहती हुई हवा रा...
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सोमवार, 29 अगस्त 2011

277. शेष न हो (क्षणिका)

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शेष न हो ******* सवाल भी ख़त्म और जवाब भी शायद ऐसे ही ख़त्म होते हैं रिश्ते जब सामने कोई हो और कहने को कुछ भी शेष न हो ।  - जेन्नी...
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रविवार, 28 अगस्त 2011

276. इन्द्रधनुष खिला (बरसात पर 10 हाइकु) (पुस्तक - 19)

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इन्द्रधनुष खिला  (बरसात पर 10 हाइकु) *******  1. आकाश दिखा इन्द्रधनुष खिला मचले जिया। 2. हुलसे जिया घिर आए बदरा जल्दी बरसे। 3. ...
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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

275. राखी के धागे (राखी पर 11 हाइकु) (पुस्तक - 18)

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राखी के धागे (राखी पर 11 हाइकु) ******* 1.    राखी का पर्व    पूर्णमासी का दिन    सावन माह ।     2.    राखी-त्योहार    स...
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सोमवार, 22 अगस्त 2011

274. दुनिया बहुत रुलाती है (क्षणिका)

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दुनिया बहुत रुलाती है ******* प्रेम की चाहत कभी कम नहीं होती ज़िन्दगी बस दुनियादारी में कटती है कमबख़्त ये दुनिया बहुत रुलाती है ।  -...
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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

273. फिर से मात (तुकांत)

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फिर से मात ******* बेअख़्तियार-सी हैं करवटें, बहुत भारी है आज की रात कह दिया यूँ तल्ख़ी से उसने, तन्हाई है ज़िन्दगी की बात ।  साथ रहने...
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सोमवार, 15 अगस्त 2011

272. राम नाम सत्य है

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राम नाम सत्य है *** कोई तो पुकार सुनो कोई तो साहस करो चीख नहीं निकलती पर दम निकल रहा है उनका । वे अपने दर्द में ऐसे टूटे हैं कि ज़ख़्...
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गुरुवार, 11 अगस्त 2011

271. अलविदा कहती हूँ

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अलविदा कहती हूँ ******* ख़्वाहिशें ऐसे ही दम तोड़ेंगी जानते हुए भी नए-नए ख़्वाब देखती हूँ दामन से छूटते जाते   जाने कितने पल फिर भी वक़...
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रविवार, 7 अगस्त 2011

270. तुम मेरे दोस्त जो हो

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तुम मेरे दोस्त जो हो ******* मेरे लिए एक काम कर दोगे ''ज़हर ला दोगे बहुत थक गई हूँ ज़िन्दगी से ऊब गई हूँ'', जानती हूँ...
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शनिवार, 6 अगस्त 2011

269. उन्हीं दिनों की तरह (पुस्तक - 37)

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उन्हीं दिनों की तरह ******* चौंककर उसने कहा- ''जाओ लौट जाओ  क्यों आई हो यहाँ क्या सिर्फ़ वक़्त बिताना चाहती हो यहाँ? हमने तो ...
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बुधवार, 3 अगस्त 2011

268. कह न पाऊँगी कभी

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कह न पाऊँगी कभी ******* अपने जीवन का सत्य कह न पाऊँगी किसी से कभी अपने पराए का भेद समझती हूँ पर जानती हूँ कह न पाऊँगी किसी से कभी ।...
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सोमवार, 1 अगस्त 2011

267. कुछ तो था मेरा अपना

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कुछ तो था मेरा अपना ******* जी चाहता है सब कुछ छोड़कर लौट जाऊँ, अपने उसी अँधेरे कोने में जहाँ कभी किसी दिन दुबकी हुई, मैं मिली थी तुम...
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बुधवार, 20 जुलाई 2011

266. एक चूक मेरी

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एक चूक मेरी *** रास्ते पर चलते हुए मैं उससे टकरा गई उसके हाथ में पड़े सभी फ़लसफ़े गिर पड़े जो मेरे लिए ही थे सभी टूट गए और मैं देखती रही...
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शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

265. मैं भी इंसान हूँ (पुस्तक - 30)

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मैं भी इंसान हूँ ******* मैं, एक शब्द नही,  एहसास हूँ,  अरमान हूँ साँसे भरती हाड़-मांस की,  मैं भी जीवित इंसान हूँ ।  दर्द में आँसू निकलते...
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रविवार, 10 जुलाई 2011

264. आत्मकथा

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आत्मकथा ******* एक सदी तक चहकती फिरी घर आँगन गलियों में थी कथा परियों की और जीवन फुदकती गौरैया-सी ।      दूसरी सदी में आ बसी हर क...
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गुरुवार, 7 जुलाई 2011

263. स्तब्ध खड़ी हूँ

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स्तब्ध खड़ी हूँ ******* ख़्वाबों के गलियारे में, स्तब्ध मैं हूँ खड़ी आँखों से ओझल, ख़ामोश पास तुम भी हो खड़े, साँसे हैं घबराई-सी, वक़्त भी ...
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बुधवार, 6 जुलाई 2011

262. ज़िन्दगी मौक़ा नहीं देती (क्षणिका)

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ज़िन्दगी मौक़ा नहीं देती ******* ख़ौफ़ के साये में ज़िन्दगी को तलाशती हूँ ढेरों सवाल हैं पर जवाब नहीं हर पल हर लम्हा एक इम्तहान से गुज़रती ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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